Pratap Bhawan: कभी यहां से तय होती थी हरदोई की सियासत, लगभग ढाई दशक से पसरा रहता है सन्नाटा, जानें पूरी कहानी
Hardoi News: शासन के रुतबे का सबसे बड़ा प्रतीक आजादी के बाद से ही कार की छत पर लगी लाल बत्ती हुआ करती थी। जनपद के अधिकांश लोगों को यह नहीं पता होगा कि जिले में शासन की पहली लालबत्ती वर्ष 1964 में आई। तब विधायक शारदा भक्त सिंह को नेता विरोधी दल बनाया गया था।
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हरदोई शहर के छोटा चौराहा पर स्थित इस कोठी को लोग प्रताप भवन नाम से जानते हैं। बदले राजनीतिक दौर और नई पीढ़ी के अधिकांश नए-नवेले नेताओं को न तो इस कोठी के बारे में बहुत जानकारी है और न ही प्रताप भवन के बारे में। दरअसल, हकीकत तो यह है कि लगभग तीन दशक तक जिले की राजनीतिक का केंद्र यही कोठी होती थी। यह बात और है कि पिछले लगभग ढाई दशक से इस कोठी में सन्नाटा पसरा रहता है।
आजादी के बाद के राजनीतिक माहौल की चर्चा जब कभी होती है, तो जनपद के दो दिग्गज नेताओं शारदा भक्त सिंह और गंगा भक्त सिंह का नाम जरूर आता है। स्वतंत्र भारत में हुए शुरुआती चुनावों में जब पूरे देश में कांग्रेस का डंका बजता था, तो हरदोई जनपद के हरियावां गांव में जन्मे यह दोनों भाई जनसंघ का दीया लेकर पार्टी का उजाला फैलाने की कोशिश में लगे रहते थे।
दोनों भाई राजनीतिक रूप से न सिर्फ जनता के बीच मजबूत रहे बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी और नाना जी देशमुख जैसे कर्मयोगियों के नजदीकी होने का लाभ शासन और संगठन से भी लेने में सफल रहे। शहर के छोटा चौराहा पर स्थित प्रताप भवन में शारदा भक्त सिंह के साथ गंगा भक्त सिंह रहा करते थे। शारदा भक्त सिंह के निधन के बाद वह इस कोठी को छोड़ आए। गांधी मैदान के सामने स्थित एक आवासीय परिसर में तकरीबन सात साल रहने के बाद वह कृषि मंत्री बनने पर 1991 में नघेटा रोड स्थित एक कोठी में रहने लगे थे।
जिले की पहली लालबत्ती शारदा भक्त सिंह के हिस्से में आई
शासन के रुतबे का सबसे बड़ा प्रतीक आजादी के बाद से ही कार की छत पर लगी लाल बत्ती हुआ करती थी। जनपद के अधिकांश लोगों को यह नहीं पता होगा कि जिले में शासन की पहली लालबत्ती वर्ष 1964 में आई। तब विधायक शारदा भक्त सिंह को नेता विरोधी दल बनाया गया था। वह दो फरवरी 1964 से दो अप्रैल 1965 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल बने थे। बाद में 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर वह राजस्व मंत्री भी बने थे। वह दो बार हरदोई नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे और तीन बार विधायक चुने गए।
जनपद से पहली बार मंत्री बनने का रुतबा गंगा भक्त सिंह को मिला
शारदा भक्त सिंह के छोटे भाई थे गंगा भक्त सिंह। जनपद से किसी भी विधायक को वर्ष 1967 से पहले प्रदेश सरकार में मंत्री बनने का सौभाग्य नहीं मिला था। 1967 में गंगा भक्त सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उन्हें लोक निर्माण विभाग दिया गया था। 1991 में वह कल्याण सिंह सरकार में कृषि मंत्री रहे। इसके बाद हथकरघा निगम के अध्यक्ष और योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1977 में वह तत्कालीन शाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के टिकट पर सांसद भी रहे। सियासी कॅरिअर में वह चार बार विधायक, दो बार मंत्री और एक बार सांसद रहे। जनसंघ के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।