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Kanpur News: बेटी की पढ़ाई में गरीबी बाधा, डीएम ने किया फीस भरने का वादा
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छात्रा संग जिलाधिकारी।
- फोटो : सूचना विभाग
कानपुर। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के आदेश पर 25 वर्ष बाद मकान से कब्जा हटने पर शुक्रवार को कलक्ट्रेट में धन्यवाद देने पहुंचे फरियादी की बेटी को डीएम ने कोचिंग में दाखिला दिला दिया। बेटी यूपीएससी की तैयारी करना चाहती थी पर गरीबी रास्ते में बाधा बन रही थी। शुक्रवार को जनता दर्शन में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने उसकी फीस खुद भरने की बात कही।
जिलाधिकारी को जनता दर्शन के दौरान दो सप्ताह पहले नौबस्ता पुरानी बस्ती निवासी राजकुमार कुशवाहा ने बताया था कि 25 साल पहले मकान किराये पर देते समय एक व्यापारी से 1.30 लाख रुपये की पगड़ी ली थी। मेरी आर्थिक स्थित सही नहीं है जिस कारण मैं पगड़ी की धनराशि वापस नहीं कर पा रहा हूं। व्यापारी अब 1.65 लाख रुपये देने के बाद ही कब्जा छोड़ने की बात कह रहा है। ऐसे में डीएम ने एसीएम प्रथम राजेश कुमार को मामला निस्तारित करने के निर्देश दिए थे। एसीएम ने एक सप्ताह में कब्जा खाली करा दिया था।
शुक्रवार को राजकुमार अपनी बेटी देवांशी संग जिलाधिकारी को धन्यवाद देने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान डीएम ने देवांशी से पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसने बताया कि डीबीएस कॉलेज से स्नातक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हूं। इंटर में अच्छे अंक आने पर तत्कालीन मंडलायुक्त ने सम्मानित किया था, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण यूपीएससी की तैयारी का सपना अधूरा है।
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इस पर डीएम ने उसे शिक्षक की तरह पढ़ाई-लिखाई के बारे में गाइड किया और अपना मोबाइल नंबर दिया। इसके बाद कोचिंग करने की इच्छा पूछी तो उसने हां कर दिया। जिलाधिकारी ने मोबाइल से एक कोचिंग संचालक को फोन किया। संचालक से कहा, जितनी भी फीस लगेगी, मैं स्वयं अदा करूंगा। कोचिंग में प्रवेश की समस्या हल होने पर देवांशी भावुक हो गई। पिता-पुत्री ने जिलाधिकारी से धन्यवाद कहा।
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जिलाधिकारी को जनता दर्शन के दौरान दो सप्ताह पहले नौबस्ता पुरानी बस्ती निवासी राजकुमार कुशवाहा ने बताया था कि 25 साल पहले मकान किराये पर देते समय एक व्यापारी से 1.30 लाख रुपये की पगड़ी ली थी। मेरी आर्थिक स्थित सही नहीं है जिस कारण मैं पगड़ी की धनराशि वापस नहीं कर पा रहा हूं। व्यापारी अब 1.65 लाख रुपये देने के बाद ही कब्जा छोड़ने की बात कह रहा है। ऐसे में डीएम ने एसीएम प्रथम राजेश कुमार को मामला निस्तारित करने के निर्देश दिए थे। एसीएम ने एक सप्ताह में कब्जा खाली करा दिया था।
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शुक्रवार को राजकुमार अपनी बेटी देवांशी संग जिलाधिकारी को धन्यवाद देने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान डीएम ने देवांशी से पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसने बताया कि डीबीएस कॉलेज से स्नातक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हूं। इंटर में अच्छे अंक आने पर तत्कालीन मंडलायुक्त ने सम्मानित किया था, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण यूपीएससी की तैयारी का सपना अधूरा है।
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इस पर डीएम ने उसे शिक्षक की तरह पढ़ाई-लिखाई के बारे में गाइड किया और अपना मोबाइल नंबर दिया। इसके बाद कोचिंग करने की इच्छा पूछी तो उसने हां कर दिया। जिलाधिकारी ने मोबाइल से एक कोचिंग संचालक को फोन किया। संचालक से कहा, जितनी भी फीस लगेगी, मैं स्वयं अदा करूंगा। कोचिंग में प्रवेश की समस्या हल होने पर देवांशी भावुक हो गई। पिता-पुत्री ने जिलाधिकारी से धन्यवाद कहा।