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रैन बसेरा बने कबाड़, गरीबों को ओवरब्रिज की आड़

Fri, 09 Dec 2016 09:42 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 09 Dec 2016 09:42 AM IST
सार

संकटमोचन के रैन बसेरा में अराजकतत्वों का अड्डा
रोडवेज के विश्राम गृह में अभी तक नहीं खुले ताले
जिला अस्पताल रैन बसेरा में चल रही कैंटीन

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poor shadow of overbridge not night shelter
डेमो

विस्तार

ठंड में ठिठुरने वाले गरीबों और यात्रियों के लिए लाखों रुपये की लागत से बनाए गए रैन बसेरे शराब और जुआं का अड्डा तथा मूत्रालय बन गए हैं। सबसे बुरा हाल रोडवेज परिसर में स्थित रैनबसेरे का है। यहां न कंबल हैं या न बिछाने का बिस्तर। शराब की खाली बोलतें और गंदगी पटी पड़ी है। राहगीर और अनाथ इधर-उधर फुटपाथों पर खुल आसमान तले रातें बिता रहे हैं। 
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बांदा रोडवेज बस स्टैंड के रैन बसेरा का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। यात्रियों को ठंड भरी रात काटने के लिए भटकना पड़ रहा है। रैनबसेरा के अंदर शराब और गंदगी की दुर्गंध गूंज रही है। अलमारी में शराब की खाली बोतलें और फर्श पर शराब के खाली पाउच पड़े हैं। इसमें दिन में ताला पड़ा रहता है। कब खुलता है? यह यात्रियों को पता नहीं चलता। कलेक्ट्रेट की नाक तले जहीर क्लब ग्राउंड के बगल में बना नगर पालिका का रैन बसेरा भी लावारिस है।
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बरामदे में गंदगी की भरमार है। कुछ मजदूर जैसे लोगों ने स्थायी डेरा जमा रखा है। बाहर लगा हैंडपंप भी खराब है। नगर पालिका ने इसे 2004 में साढ़े तीन लाख रुपये खर्च कर बनवाया था लेकिन पिछले तीन सालों से यह खंडहर बन गया है। उधर, जिला अस्पताल के रैन बसेरा में कैंटीन चल रही है। यहां मरीजों और तीमारदारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। शाम होते ही गरीब और बेसहारा लोगों को फुटपाथों या ओवरब्रिज के नीचे रात बिताना पड़ती है। हालांकि यहां भी उन्हें सुकून से सोना नसीब नहीं होता। पुलिस वाले आकर भगा देते हैं। 
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