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बंद होंगी पाॅलिथीन फैक्ट्रियां
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Fri, 22 Jul 2016 01:10 AM IST
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पानी के पाउचों में मानकों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है
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कानपुर। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पाॅलिथीन कैरीबैग बनाने वाली शहर की सभी फैक्ट्रियों की बंदी का आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि यदि ये फैक्ट्रियां बंदी के आदेश का पालन नहीं करती हैं तो इनका बिजली, पानी का कनेक्शन काट दिया जाए। शहर में इस समय 53 फैक्ट्रियां हैं जिन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय इकाई ने चिह्नित किया है। इसके अलावा गैर चिह्नित 100 से अधिक छोटी-मोटी इकाइयां हैं।
कुछ महीने पहले जब पाॅलिथीन बंदी का अभियान चलाया गया था तो इन फैक्ट्रियों की सूची तैयार की गई थी। गुरुवार को प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों ने शहर के कई क्षेत्रों में छापा मारा। इस दौरान दुकानों-प्रतिष्ठानों से 35 किलोग्राम पाॅलिथीन कैरीबैग जब्त किया गया। इन लोगों को चेतावनी दी गई कि पाॅलिथीन खरीदना-बेचना बंद करें। क्षेत्रीय इकाई अधिकारी डा. मोहम्मद सिकंदर ने बताया कि पाॅलिथीन फैक्ट्रियों को बंदी नोटिस भिजवा दिया गया है। इन्हें अभियान चलाकर बंद कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि शहर में छापामार अभियान के लिए दो टीमें बना दी गई हैं। यह शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग दिनों में छापे मारकर फैक्ट्रियां पकड़ेंगी। यदि कोई पालिथीन बनाते मिला तो कानूनी कार्रवाई होगी और प्रयोग करते पाया गया तो उसे भी जुर्माना भरना पड़ेगा।
नॉन वोवेन पॉलिथीन भी प्रतिबंधित
कानपुर (ब्यूरो)। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नॉन वोवेन पॉलिथीन पर भी प्रतिबंध लागू है। प्लास्टिक पॉलिथीन की तरह ही इसका भी निर्माण, आयात, भंडारण, ढुलाई और विक्रय नहीं किया सकता। पब्लिक और व्यापारियों में इस बात का भ्रम है कि नॉन वोवेन पॉलिथीन पर प्रतिबंध लागू नहीं है। इस वजह से बाजार में बड़े पैमाने पर नॉन वोवेन कैरीबैग की बिक्री हो रही है। कपड़े जैसा दिखने की वजह से कुछ निर्माताओं ने इसका उत्पादन शुरू कर दिया। पूर्व में शासनादेश में स्पष्ट न होने की वजह से बाजार में इस बात का प्रचार भी हो गया कि नॉन वोवेन कैरीबैग मिट्टी में मिलकर नष्ट हो जाता है। बता दें गत 30 जनवरी को कानपुर प्लास्टिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कमिश्नर से मिलकर नॉन वोवेन कैरीबैग की बिक्री पर एतराज भी जताया था।
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कागज के लिफाफे विकल्प
पॉलीथिन का सबसे अच्छा विकल्प कागज के लिफाफे, गत्ते और जूट के थैले हैं। कागज के लिफाफे बनाने का कुटीर उद्योग अब फलने भी लगा है। शहर में करीब 4000 घरों में बनते हैं कागज के लिफाफे। 500 से अधिक घरों व दुकानों में चलता है यह कुटीर उद्योग। करीब 10,000 लोगों की रोजी रोटी इसी पर निर्भर है। ईदगाह स्थित न्यू कालोनी में इसका बड़ा कारोबार है।
मिट्टी में मिल होता नष्ट
बाजार में नॉन वोवेन फैब्रिक बैग भी हैं जो मिट्टी में मिलकर एक महीने में नष्ट हो जाते हैं। ये बैग किलो के हिसाब से बिकते हैं। एक किलो में करीब 100 पीस कैरीबैग चढ़ते हैं। इसकी कीमत 95 रुपये से 130 रुपये रुपये किलो है। साइज और क्वालिटी के हिसाब से एक किलो में कैरी बैग की संख्या कम ज्यादा हो सकती है। शहर में करीब 25 थोक विक्रेता हैं।
पहले भी चला अभियान
जनवरी में भी शहर में पॉलीथिन बैन करने के लिए अभियान शुरू किया गया था। तब एसडीएम, नगर निगम, निदेशक पर्यावरण, नगर निगम, छावनी परिषद, विपणन एवं आपूर्ति अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, श्रम विभाग के अधिकारियों को पॉलीथिन पाबंदी लागू करवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ दिन तक टीमों ने छापे मारे लेकिन बाद में स्थिति जस की तस हो गई।
गंगा किनारे पॉलीथिन
गंगा किनारे पॉलीथिन पर भी सख्ती से रोक है। घाटों, मंदिरों में पॉलीथिन में फल-फूल, प्रसाद आदि बेचना मना है लेकिन इसका पालन कम ही हो पाता है। डीएम ने इसके लिए अभियान चलाने को कहा था लेकिन वो हवा-हवाई रहा। घाटों के किनारे अब भी बड़ी मात्रा में पॉलीथिन पड़ी रहती हैं।
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कुछ महीने पहले जब पाॅलिथीन बंदी का अभियान चलाया गया था तो इन फैक्ट्रियों की सूची तैयार की गई थी। गुरुवार को प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों ने शहर के कई क्षेत्रों में छापा मारा। इस दौरान दुकानों-प्रतिष्ठानों से 35 किलोग्राम पाॅलिथीन कैरीबैग जब्त किया गया। इन लोगों को चेतावनी दी गई कि पाॅलिथीन खरीदना-बेचना बंद करें। क्षेत्रीय इकाई अधिकारी डा. मोहम्मद सिकंदर ने बताया कि पाॅलिथीन फैक्ट्रियों को बंदी नोटिस भिजवा दिया गया है। इन्हें अभियान चलाकर बंद कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि शहर में छापामार अभियान के लिए दो टीमें बना दी गई हैं। यह शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग दिनों में छापे मारकर फैक्ट्रियां पकड़ेंगी। यदि कोई पालिथीन बनाते मिला तो कानूनी कार्रवाई होगी और प्रयोग करते पाया गया तो उसे भी जुर्माना भरना पड़ेगा।
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नॉन वोवेन पॉलिथीन भी प्रतिबंधित
कानपुर (ब्यूरो)। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नॉन वोवेन पॉलिथीन पर भी प्रतिबंध लागू है। प्लास्टिक पॉलिथीन की तरह ही इसका भी निर्माण, आयात, भंडारण, ढुलाई और विक्रय नहीं किया सकता। पब्लिक और व्यापारियों में इस बात का भ्रम है कि नॉन वोवेन पॉलिथीन पर प्रतिबंध लागू नहीं है। इस वजह से बाजार में बड़े पैमाने पर नॉन वोवेन कैरीबैग की बिक्री हो रही है। कपड़े जैसा दिखने की वजह से कुछ निर्माताओं ने इसका उत्पादन शुरू कर दिया। पूर्व में शासनादेश में स्पष्ट न होने की वजह से बाजार में इस बात का प्रचार भी हो गया कि नॉन वोवेन कैरीबैग मिट्टी में मिलकर नष्ट हो जाता है। बता दें गत 30 जनवरी को कानपुर प्लास्टिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कमिश्नर से मिलकर नॉन वोवेन कैरीबैग की बिक्री पर एतराज भी जताया था।
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कागज के लिफाफे विकल्प
पॉलीथिन का सबसे अच्छा विकल्प कागज के लिफाफे, गत्ते और जूट के थैले हैं। कागज के लिफाफे बनाने का कुटीर उद्योग अब फलने भी लगा है। शहर में करीब 4000 घरों में बनते हैं कागज के लिफाफे। 500 से अधिक घरों व दुकानों में चलता है यह कुटीर उद्योग। करीब 10,000 लोगों की रोजी रोटी इसी पर निर्भर है। ईदगाह स्थित न्यू कालोनी में इसका बड़ा कारोबार है।
मिट्टी में मिल होता नष्ट
बाजार में नॉन वोवेन फैब्रिक बैग भी हैं जो मिट्टी में मिलकर एक महीने में नष्ट हो जाते हैं। ये बैग किलो के हिसाब से बिकते हैं। एक किलो में करीब 100 पीस कैरीबैग चढ़ते हैं। इसकी कीमत 95 रुपये से 130 रुपये रुपये किलो है। साइज और क्वालिटी के हिसाब से एक किलो में कैरी बैग की संख्या कम ज्यादा हो सकती है। शहर में करीब 25 थोक विक्रेता हैं।
पहले भी चला अभियान
जनवरी में भी शहर में पॉलीथिन बैन करने के लिए अभियान शुरू किया गया था। तब एसडीएम, नगर निगम, निदेशक पर्यावरण, नगर निगम, छावनी परिषद, विपणन एवं आपूर्ति अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, श्रम विभाग के अधिकारियों को पॉलीथिन पाबंदी लागू करवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ दिन तक टीमों ने छापे मारे लेकिन बाद में स्थिति जस की तस हो गई।
गंगा किनारे पॉलीथिन
गंगा किनारे पॉलीथिन पर भी सख्ती से रोक है। घाटों, मंदिरों में पॉलीथिन में फल-फूल, प्रसाद आदि बेचना मना है लेकिन इसका पालन कम ही हो पाता है। डीएम ने इसके लिए अभियान चलाने को कहा था लेकिन वो हवा-हवाई रहा। घाटों के किनारे अब भी बड़ी मात्रा में पॉलीथिन पड़ी रहती हैं।