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पॉलीथिन बंद, घर से झोला लेकर निकलिए
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Thu, 21 Jan 2016 02:26 AM IST
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पॉलीथिन पर 21 जनवरी से पूर्ण पाबंदी लागू हो जाएगी। बेहतर होगा कि आप घर से निकलते समय झोला साथ रखें। प्रदेश सरकार के आदेशानुसार पॉलीथिन के निर्माण, बिक्री, आयात, भंडारन और इस्तेमाल करने पर कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को पॉलीथिन निर्माताओं से लेकर व्यापारियों में मीटिंगों का दौर चलता रहा। मामला हाईकोर्ट में होने की वजह से कोई किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा। तय हुआ कि हाईकोर्ट के रुख के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल पॉलीथिन का न तो निर्माण करेंगे और न ही बिक्री। उधर प्रशासन ने छापामार टीमें गठित कर दी हैं। ये टीमें 21 तारीख के बाद सड़कों पर निकलेंगी।
थोक व्यापारियों ने गोदाम खाली किए
घंटाघर, कलक्टरगंज और एक्सप्रेस रोड के अलावा शहर के कई स्थानों पर पॉलीथिन के थोक व्यापारियों ने अपने गोदाम खाली कर दिए हैं। उन्होंने जमा माल निर्माताओं को भेज दिया है। शहर में करीब 100 थोक व्यापारी हैं। किसी के पास 10 लाख रुपये का स्टॉक है तो किसी के पास 50 लाख का। करीब 100 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
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फैक्ट्रियां बंद, उत्पादन ठप
शहर में करीब 650 छोटी बड़ी फैक्ट्रियां हैं। दादानगर, पनकी, फजलगंज, जाजमऊ, नौबस्ता, किदवई नगर स्थित फैक्ट्रियों में पॉलीथिन का उत्पादन बंद हो गया है। इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन करीब 50 टन पॉलीथिन का उत्पादन किया जाता था। कुछ निर्माताओं ने पहले ही उत्पादन बंद कर दिया था, कुछ ने तब बंद किया जब थोक विक्रेताओं ने माल लेना बंद कर दिया। इसके बावजूद भारी मात्रा में फैक्ट्रियों में माल पड़ा हुआ है।
विकल्प होंगे खादी के थैले, हैंडमेड पेपर
उप्र खादी ग्रामोद्योग की बैठक बुधवार को सिविल लाइंस स्थित ग्रामोद्योग मंडल वस्त्रागार में हुई। इसमें पॉलीथिन के विकल्प के तौर पर खादी के थैले, हैंडमेड पेपर बाजार में पेश करने की रणनीति बनाई गई। तय किया गया कि खादी के थैले में समाज को प्रेरित करने वाले स्लोगन जैसे शराब बंदी, कन्या भ्रूण हत्या न करने, दहेज न लेने और महात्मा गांधी के तमाम विचार लिखे होंगे।
बैठक में उप्र खादी ग्रामोद्योग महासंघ के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कहा कि पॉलीथिन की बंदी खादी कारोबारियों के लिए अच्छा मौका है। खादी ग्रामोद्योग की सभी इकाइयां इस अवसर के लिए तैयार हो जाएं। खादी के थैले और हैंडमेड पेपर बनने से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार के साधन मुहैया होंगे।
पलायन भी रुकेगा। उन्होंने बताया कि खादी के थैले और हैंडमेड पेपर उपलब्ध कराने, क्वालिटी चेक, खादी ग्रामोद्योग इकाइयों में समन्वय स्थापना के लिए दो कमेटी भी बनाई गईं हैं।
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बुधवार को पॉलीथिन निर्माताओं से लेकर व्यापारियों में मीटिंगों का दौर चलता रहा। मामला हाईकोर्ट में होने की वजह से कोई किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा। तय हुआ कि हाईकोर्ट के रुख के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल पॉलीथिन का न तो निर्माण करेंगे और न ही बिक्री। उधर प्रशासन ने छापामार टीमें गठित कर दी हैं। ये टीमें 21 तारीख के बाद सड़कों पर निकलेंगी।
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थोक व्यापारियों ने गोदाम खाली किए
घंटाघर, कलक्टरगंज और एक्सप्रेस रोड के अलावा शहर के कई स्थानों पर पॉलीथिन के थोक व्यापारियों ने अपने गोदाम खाली कर दिए हैं। उन्होंने जमा माल निर्माताओं को भेज दिया है। शहर में करीब 100 थोक व्यापारी हैं। किसी के पास 10 लाख रुपये का स्टॉक है तो किसी के पास 50 लाख का। करीब 100 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
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फैक्ट्रियां बंद, उत्पादन ठप
शहर में करीब 650 छोटी बड़ी फैक्ट्रियां हैं। दादानगर, पनकी, फजलगंज, जाजमऊ, नौबस्ता, किदवई नगर स्थित फैक्ट्रियों में पॉलीथिन का उत्पादन बंद हो गया है। इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन करीब 50 टन पॉलीथिन का उत्पादन किया जाता था। कुछ निर्माताओं ने पहले ही उत्पादन बंद कर दिया था, कुछ ने तब बंद किया जब थोक विक्रेताओं ने माल लेना बंद कर दिया। इसके बावजूद भारी मात्रा में फैक्ट्रियों में माल पड़ा हुआ है।
विकल्प होंगे खादी के थैले, हैंडमेड पेपर
उप्र खादी ग्रामोद्योग की बैठक बुधवार को सिविल लाइंस स्थित ग्रामोद्योग मंडल वस्त्रागार में हुई। इसमें पॉलीथिन के विकल्प के तौर पर खादी के थैले, हैंडमेड पेपर बाजार में पेश करने की रणनीति बनाई गई। तय किया गया कि खादी के थैले में समाज को प्रेरित करने वाले स्लोगन जैसे शराब बंदी, कन्या भ्रूण हत्या न करने, दहेज न लेने और महात्मा गांधी के तमाम विचार लिखे होंगे।
बैठक में उप्र खादी ग्रामोद्योग महासंघ के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कहा कि पॉलीथिन की बंदी खादी कारोबारियों के लिए अच्छा मौका है। खादी ग्रामोद्योग की सभी इकाइयां इस अवसर के लिए तैयार हो जाएं। खादी के थैले और हैंडमेड पेपर बनने से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार के साधन मुहैया होंगे।
पलायन भी रुकेगा। उन्होंने बताया कि खादी के थैले और हैंडमेड पेपर उपलब्ध कराने, क्वालिटी चेक, खादी ग्रामोद्योग इकाइयों में समन्वय स्थापना के लिए दो कमेटी भी बनाई गईं हैं।