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यूपी: पुलिसवालों का साप्ताहिक अवकाश बना ड्रामा, शर्तें-बंदिशें ऐसी कि ना जाने कब आ जाए बुलावा

Sun, 18 Aug 2019 04:17 AM IST
Abhishek Singh अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Published by: Abhishek Singh Updated Sun, 18 Aug 2019 04:17 AM IST
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Policemen has many restrictions in weekly holiday
यूपी पुलिस (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media (File Photo)

पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की योजना किसी मजाक से कम नहीं है। दरअसल, साप्ताहिक अवकाश के दिन पुलिसकर्मियों को शहर से बाहर जाने की इजाजत नहीं होगी। आदेश पर 15 मिनट के भीतर ड्यूटी ज्वाइन करनी होगी। ऐसे में साफ है कि साप्ताहिक अवकाश में सहूलियत कम, बंदिशें अधिक हैं। इस कवायद के सफल होने की संभावना बेहद कम है।

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बढ़ते दबाव और तनाव को देखते हुए शासन ने पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की पहल की है। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत योजना 20 अगस्त से कानपुर और बाराबंकी जिले में शुरू होनी है। अफसर सिपाही से लेकर दरोगा तक को अवकाश देने का खाका तैयार कर रहे हैं। यह तय समय पर लागू भी हो जाएगा लेकिन जिस तरह के नियम हैं, उससे पुलिसकर्मियों को राहत कम, तनाव अधिक होने वाला है।
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नियमानुसार अवकाश पर रहने वाले पुलिसकर्मी किसी भी हाल में शहर से बाहर नहीं जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर तुरंत ड्यूटी पर पहुंचना होगा। इसके लिए उन्हें 15 मिनट का समय दिया जाएगा। ऐसा नहीं करने पर उन पर कार्रवाई होगी।  

महीने में दो बार होगा ट्रायल

वे पुलिसकर्मी जो अवकाश पर होंगे, उनको लेकर हर महीने दो बार ट्रायल होगा। इसमें उनको अचानक ड्यूटी पर बुलाया जाएगा। इससे आलाधिकारी पुलिसकर्मियों की सतर्कता व सक्रियता जांचेंगे। यानी इससे एक बात तो तय है कि महीने के चार अवकाश में दो दिन पुलिसकर्मी को ड्यूटी करनी ही होगी।


कल तक तैयार हो जाएगा पूरा खाका

एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि सभी पुलिसकर्मियों को पदवार बांटा गया है। फिर उनकी बीट के आधार पर दिनवार अवकाश तय किया जाएगा, जिससे किसी के अवकाश पर रहने से व्यवस्था पर असर न पड़े। सोमवार तक पूरा खाका तैयार हो जाएगा। मंगलवार से व्यवस्था शुरू हो जाएगी।

फोर्स का कम होना बड़ी दिक्कत 

प्रदेश के अन्य शहरों की तरह कानपुर में भी तय मानक से फोर्स करीब तीस फीसदी कम है। वहीं त्योहारों, वीआईपी कार्यक्रमों आदि में भारी पुलिस बल को लगाया जाता है। यही वजह है कि शहर में 2011 से 2018 के बीच तीन बार साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था लागू की गई, लेकिन कारगर साबित नहीं हो सकी थी। फोर्स का कम होना बड़ी दिक्कत है। इसलिए पूरी संभावना है कि इस बार भी योजना का सफल होना आसान नहीं है।

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