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पति, ससुर समेत चार पर रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो कानपुर।
Updated Mon, 11 Apr 2016 12:41 AM IST
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आत्महत्या
- फोटो : amarujala
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घाटमपुर। बच्चियां पैदा होने पर ताने देने और ससुराल से निकाल देने पर परेशान होकर जान देने वाली युवती के मामले में पति, ससुर, जेठ और जेठानी के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। उधर, ससुराल वाले घर में ताला बंद करके फरार हैं। एसओ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश शुरू की गई है।
घाटमपुर थानाक्षेत्र के मुइया गांव निवासी देवीप्रसाद तिवारी की बेटी अन्नपूर्णा (34) का विवाह 11 वर्ष पहले भीतरगांव निवासी विपिन द्विवेदी से हुआ था। अन्नपूर्णा की दो बच्चियां ऋद्धि उर्फ कृति (4) और सिद्धि (1) हैं। अन्नपूर्णा पांच माह की गर्भवती थी। ससुराल वाले ताने मारते थे कि दो बेटियों के बाद फिर गर्भ में कन्या है। सोमवार को विपिन ने अन्नपूर्णा को बच्चियों के साथ घर से निकाल दिया। वह बच्चियों को लेकर कूष्मांडा देवी मंदिर पहुंची और वहीं आसरा बना लिया। शुक्रवार को दोनों बच्चियों को मंदिर में छोड़कर अन्नपूर्णा ने ट्रेन से कटकर जान दे दी थी। रविवार को घाटमपुर कोतवाली पहुंचे अन्नूपूर्णा के भाई सुशील तिवारी ने पुलिस को बताया कि पति विपिन शराब का लती है। बहन को प्रताड़ित करता था। भाई ने पति और ससुर के अलावा जेठ सुनील और जेठानी रानी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। आशंका जताई है कि अन्नपूर्णा की हत्या करके लाश ट्रैक पर डाल दी गई।
नहीं मिल सकती सरकारी मदद
तहसीलदार अनिल कुमार का कहना है कि चूंकि बच्चियों का पिता जिंदा है। इसलिए उन्हें कानूनी रूप से अनाथ या लावारिस नहीं माना जा सकता है। इस कारण बच्चियों को सरकारी मदद नहीं मिल सकती है। जिलाधिकारी अपने स्तर से रेडक्रास सोसाइटी से भले ही कुछ मदद कर सकते हैं।
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समाज के ठेकेदारों के मुंह पर पड़े ताले
बेटा न होने के तानों और प्रताड़ना से तंग होकर जान देने वाली अन्नपूर्णा के मामले में समाज के कथित ठेकेदार चुप्पी साधे दिखाई दिए। रविवार को उसकी ससुराल भीतरगांव में जब पड़ोसियों और अन्य लोगों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बात करने से ही इंकार कर दिया। हालात यह थे कि कोई अपना नाम बताने को भी तैयार नहीं था। यहां तक कि बात शुरू करने पर मोहल्ले वालों ने अपने घरों के दरवाजे तक बंद कर लिए। बेटी बचाओ का नारा देने वाले समाज के ठेकेदार और सामाजिक संगठनों की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं दिया गया है।
चौथी बेटी के रूप में ऋद्धि को पालेंगे
अन्नपूर्णा की दोनों बेटियों के भविष्य पर लोग अटकलें लगा रहे हैं। बड़ी बेटी सिद्धि उर्फ कृति को ननिहाल (मुइया) ले जाया गया है। छोटी बेटी ऋद्धि उर्फ अंशिका को कस्बे के रामेश्वर स्वर्णकार ने अपना लिया है। रविवार दोपहर बाद छोटी बेटी का हाल जानने प्रतिनिधि रामेश्वर के घर पहुंचा तो ऋद्धि गहरी नींद में सो रही थी। रामेश्वर ने बताया कि उनके तीन बेटियां और दो बेटे हैं। तीनों बेटियों का विवाह हो चुका है। ऋद्धि को वह चौथी बेटी के रूप में पालेेंगे।
ननिहाल वाले राजी पर कानूनी अड़चन
कस्बा निवासी रामेश्वर स्वर्णकार के ऋद्धि को अपनाए जाने पर बच्ची के ननिहाल वाले सहमत हैं। लेकिन बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया में कानूनी अड़चन आ सकती है। थानाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने बताया कि बच्ची को गोद लेने के लिए पहले आवश्यक कार्यवाही पूरी करनी पड़ेगी। यदि बच्ची के ननिहाल वाले अथवा उसके परिजन उसे अपने पास रखने को तैयार न हुए तो उसको चाइल्ड हेल्प लाइन में भेजा जा सकता है।
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घाटमपुर थानाक्षेत्र के मुइया गांव निवासी देवीप्रसाद तिवारी की बेटी अन्नपूर्णा (34) का विवाह 11 वर्ष पहले भीतरगांव निवासी विपिन द्विवेदी से हुआ था। अन्नपूर्णा की दो बच्चियां ऋद्धि उर्फ कृति (4) और सिद्धि (1) हैं। अन्नपूर्णा पांच माह की गर्भवती थी। ससुराल वाले ताने मारते थे कि दो बेटियों के बाद फिर गर्भ में कन्या है। सोमवार को विपिन ने अन्नपूर्णा को बच्चियों के साथ घर से निकाल दिया। वह बच्चियों को लेकर कूष्मांडा देवी मंदिर पहुंची और वहीं आसरा बना लिया। शुक्रवार को दोनों बच्चियों को मंदिर में छोड़कर अन्नपूर्णा ने ट्रेन से कटकर जान दे दी थी। रविवार को घाटमपुर कोतवाली पहुंचे अन्नूपूर्णा के भाई सुशील तिवारी ने पुलिस को बताया कि पति विपिन शराब का लती है। बहन को प्रताड़ित करता था। भाई ने पति और ससुर के अलावा जेठ सुनील और जेठानी रानी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। आशंका जताई है कि अन्नपूर्णा की हत्या करके लाश ट्रैक पर डाल दी गई।
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नहीं मिल सकती सरकारी मदद
तहसीलदार अनिल कुमार का कहना है कि चूंकि बच्चियों का पिता जिंदा है। इसलिए उन्हें कानूनी रूप से अनाथ या लावारिस नहीं माना जा सकता है। इस कारण बच्चियों को सरकारी मदद नहीं मिल सकती है। जिलाधिकारी अपने स्तर से रेडक्रास सोसाइटी से भले ही कुछ मदद कर सकते हैं।
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समाज के ठेकेदारों के मुंह पर पड़े ताले
बेटा न होने के तानों और प्रताड़ना से तंग होकर जान देने वाली अन्नपूर्णा के मामले में समाज के कथित ठेकेदार चुप्पी साधे दिखाई दिए। रविवार को उसकी ससुराल भीतरगांव में जब पड़ोसियों और अन्य लोगों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बात करने से ही इंकार कर दिया। हालात यह थे कि कोई अपना नाम बताने को भी तैयार नहीं था। यहां तक कि बात शुरू करने पर मोहल्ले वालों ने अपने घरों के दरवाजे तक बंद कर लिए। बेटी बचाओ का नारा देने वाले समाज के ठेकेदार और सामाजिक संगठनों की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं दिया गया है।
चौथी बेटी के रूप में ऋद्धि को पालेंगे
अन्नपूर्णा की दोनों बेटियों के भविष्य पर लोग अटकलें लगा रहे हैं। बड़ी बेटी सिद्धि उर्फ कृति को ननिहाल (मुइया) ले जाया गया है। छोटी बेटी ऋद्धि उर्फ अंशिका को कस्बे के रामेश्वर स्वर्णकार ने अपना लिया है। रविवार दोपहर बाद छोटी बेटी का हाल जानने प्रतिनिधि रामेश्वर के घर पहुंचा तो ऋद्धि गहरी नींद में सो रही थी। रामेश्वर ने बताया कि उनके तीन बेटियां और दो बेटे हैं। तीनों बेटियों का विवाह हो चुका है। ऋद्धि को वह चौथी बेटी के रूप में पालेेंगे।
ननिहाल वाले राजी पर कानूनी अड़चन
कस्बा निवासी रामेश्वर स्वर्णकार के ऋद्धि को अपनाए जाने पर बच्ची के ननिहाल वाले सहमत हैं। लेकिन बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया में कानूनी अड़चन आ सकती है। थानाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने बताया कि बच्ची को गोद लेने के लिए पहले आवश्यक कार्यवाही पूरी करनी पड़ेगी। यदि बच्ची के ननिहाल वाले अथवा उसके परिजन उसे अपने पास रखने को तैयार न हुए तो उसको चाइल्ड हेल्प लाइन में भेजा जा सकता है।