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एडीजी के आदेश बाद पुलिस ने दर्ज की सीएसए के प्रोफेसर पर छेड़छाड़ समेत कई धाराओं में एफआईआर

Sun, 11 Aug 2019 07:04 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 11 Aug 2019 07:04 PM IST
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police filed fir on csa professor in kanpur
एडीजी प्रेम प्रकाश - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के एग्रो बिजनेस विभाग के प्रोफेसर मुनीष कुमार पर गेस्ट लेक्चरर ने रविवार को छेड़छाड़ का प्रयास व धमकी देने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई। नवाबगंज पुलिस ने एडीजी के आदेश पर कार्रवाई की। आरोपी प्रोफेसर के पास वर्तमान में विवि के निदेशक प्रशासन एवं मॉनीटरिंग के पद की भी जिम्मेदारी है। वह मूलरूप से बरेली के रहने वाले हैं।
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पीड़िता के मुताबिक 27 मार्च 2017 को उन्होंने कुलपति को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि एग्रो बिजनेस विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. मुनीष कुमार उनको परेशान कर रहे हैं। आरोप है कि कुलपति ने अपने स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और प्रमुख सचिव आदि को पत्र लिखकर शिकायत की।
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इस पर विवि ने दो बार विभागीय जांच कर प्रोफेसर को क्लीन चिट दी और उसकी रिपोर्ट सभी को भेज दी। आठ अगस्त को पीड़िता ने एसएसपी अनंत देव से शिकायत कर तहरीर दी। एसएसपी ने सीओ स्वरूपनगर अजीत सिंह चौहान को जांच सौंपी।

सीओ ने जांच शुरू कर प्रोफेसर के बयान दर्ज किए। इधर पीड़िता ने खुदकुशी की धमकी दी और रविवार को एडीजी प्रेम प्रकाश से मिलकर मामले की शिकायत की। एडीजी ने मामले में तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। इंस्पेक्टर दिलीप कुमार बिंद ने बताया कि आरोपी पर छेड़छाड़ का प्रयास, सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वास का हनन व धमकाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पीड़िता के बाद आरोपी के बयान लिए जाएंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

पीड़िता पुलिस आमने-सामने
इंस्पेक्टर ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़िता एफआईआर कॉपी लेने थाने पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने बयान दर्ज करवाने से मना कर दिया। हालांकि पीड़िता का कहना है कि पुलिस ने बयान के लिए कहा ही नहीं। केवल व्यक्तिगत व नौकरी आदि के बारे में जानकारी ली। 

सीओ ने जांच छोड़ी
एसएसपी के आदेश पर सीओ स्वरूपनगर अजीत सिंह चौहान जांच कर रहे थे। एफआईआर दर्ज करवाने का दबाव बनाने के बाद ही उन्होंने जांच छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि जांच में पीड़ित पक्ष सहयोग नहीं कर रहा था। जल्दबाजी में एकतरफा जांच करना ठीक नहीं था। जांच अगर पूरी होती तो पूरे तथ्य सामने आते है। इन सभी वजहों से जांच छोड़ी।
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