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पुलिस-प्रशासन-नेता, अवैध कब्जों के प्रणेता
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Mon, 06 Jun 2016 01:00 AM IST
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काफी मशक्कत के बाद परेड से हटाई गई मुर्गा मार्केट फिर लगने लगी है।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। मथुरा कांड से सबक लेने के बजाय पुलिस और प्रशासन परेड मैदान, फुटपाथ से लेकर सड़क तक अवैध कब्जे करा रहा है। वहां माल रोड की तरफ डेढ़-दो महीने में ही पक्की दुकानें बन गईं। महीनों की मशक्कत और हाईकोर्ट में पैरवी के बाद हटवाई गई मुर्गा मार्केट के बाहर फुटपाथ से सड़क तक ठेलों पर पुन: मुर्गे की दुकानें लगने लगी हैं। इससे यातायात भी प्रभावित हो रहा है। बाद में ये कब्जे नासूर बन सकते हैं, फिर भी अफसर आंखें मूंदे हैं।
मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत परेड में नजूल की 4636 वर्ग मीटर जमीन पर मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने के लिए वहां स्थित मुर्गा मार्केट को काफी मशक्कत कर डेढ़ महीने पहले हटवाया गया। वहां से 79 दुकानदारों को केडीए ने मछली बाजार के बगल में एकता मार्केट बनवाकर नि:शुल्क चबूतरे दिए। पर अब पुरानी जगह फिर दबंगों ने फुटपाथ से लेकर सड़क तक मुर्गे की दुकानें लगवा लीं। इतना ही नहीं पुलिस-प्रशासन और नेताओं की मिलीभगत से परेड रामलीला मैदान के किनारे 40 से ज्यादा पक्की शटरयुक्त दुकानें बन गईं। जबकि इस मैदान में शहर की सबसे पुरानी रामलीला होती है, जिसमें हजारों लोगों की भीड़ जुटती है। डीजीपी के आदेश के बावजूद पुलिस इन कब्जों को न हटवा रही है और न ही जिला प्रशासन रोक रहा है। नगर निगम ने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
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मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत परेड में नजूल की 4636 वर्ग मीटर जमीन पर मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने के लिए वहां स्थित मुर्गा मार्केट को काफी मशक्कत कर डेढ़ महीने पहले हटवाया गया। वहां से 79 दुकानदारों को केडीए ने मछली बाजार के बगल में एकता मार्केट बनवाकर नि:शुल्क चबूतरे दिए। पर अब पुरानी जगह फिर दबंगों ने फुटपाथ से लेकर सड़क तक मुर्गे की दुकानें लगवा लीं। इतना ही नहीं पुलिस-प्रशासन और नेताओं की मिलीभगत से परेड रामलीला मैदान के किनारे 40 से ज्यादा पक्की शटरयुक्त दुकानें बन गईं। जबकि इस मैदान में शहर की सबसे पुरानी रामलीला होती है, जिसमें हजारों लोगों की भीड़ जुटती है। डीजीपी के आदेश के बावजूद पुलिस इन कब्जों को न हटवा रही है और न ही जिला प्रशासन रोक रहा है। नगर निगम ने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
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