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अमर उजाला संवाद: बॉलीवुड के मशहूर सॉन्ग राइटर की इस नज्म पर झूम उठा कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 27 Mar 2018 09:10 AM IST
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अमर उजाला संवाद कार्यक्रम अमर उजाला संवाद में इरशाद कामिल
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बॉलीवुड के मशहूर सॉन्ग राइटर इरशाद कामिल ने अपने गीत की एक कहानी सुनाई। सोचा न था फिल्म के टाइटल सॉन्ग को लेकर हम वर्सोवा बीच पर घूम रहे थे. रात का १ बज गया। पुलिसवाले हमें अपने साथ ले गए।
इरशाद कामिल ने कहा कि- आपको आपका कॉन्फिडेंस ही बनाता है। आइटम सॉन्ग होना कोई खराब बात नहीं है। सॉन्ग के बारे में अगर एटीट्यूड खराब होता है तो वो भद्दे लगते हैं। सबसे पहली मेरी फिल्म चमेली थी जिसका गाना- मन सात समंदर डोल गया, गाना लोग आज भी पसंद करते हैं। डांस बार के गाने को लोगों ने खूब सराहा। जिंदादिली बहुत जरूरी है। अपनी कला और विचारों को व्यक्त करना बहुत जरूरी है।
ये शेर सुनाया-
पहले तो दिल में बस गया ईमान की तरह, अब बात भी करता है तो एहसान की तरह
मैं जिसको मानता हूं कई साल से खुदा, रुसवाई से डरता है वो इंसान की तरह।
नज्म- मैं उसका हो भी चुका और उसको खबर ही नहीं, इलाही इस खबर से बेखबर करे मुझको, मैं खोया है खुद को बड़ी मुश्किल से, यहां खुदा कोई मुझे ढूंढ न लाए कहीं।
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धूप का एक टुकड़ा रहता है इन पलकों की छांव में अच्छा खासा शहर बसा है एक छोटे से गांव में।
शौक से तोड़ो मेरे सपने लेकिन इतना ध्यान रहे कोई सपना चुभ न जाए मेहंदी वाले पांव में।
------ इरशाद कामिल
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इरशाद कामिल ने कहा कि- आपको आपका कॉन्फिडेंस ही बनाता है। आइटम सॉन्ग होना कोई खराब बात नहीं है। सॉन्ग के बारे में अगर एटीट्यूड खराब होता है तो वो भद्दे लगते हैं। सबसे पहली मेरी फिल्म चमेली थी जिसका गाना- मन सात समंदर डोल गया, गाना लोग आज भी पसंद करते हैं। डांस बार के गाने को लोगों ने खूब सराहा। जिंदादिली बहुत जरूरी है। अपनी कला और विचारों को व्यक्त करना बहुत जरूरी है।
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ये शेर सुनाया-
पहले तो दिल में बस गया ईमान की तरह, अब बात भी करता है तो एहसान की तरह
मैं जिसको मानता हूं कई साल से खुदा, रुसवाई से डरता है वो इंसान की तरह।
नज्म- मैं उसका हो भी चुका और उसको खबर ही नहीं, इलाही इस खबर से बेखबर करे मुझको, मैं खोया है खुद को बड़ी मुश्किल से, यहां खुदा कोई मुझे ढूंढ न लाए कहीं।
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धूप का एक टुकड़ा रहता है इन पलकों की छांव में अच्छा खासा शहर बसा है एक छोटे से गांव में।
शौक से तोड़ो मेरे सपने लेकिन इतना ध्यान रहे कोई सपना चुभ न जाए मेहंदी वाले पांव में।
------ इरशाद कामिल