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Kanpur News: आईसीयू में निमोनिया से बचा रहा प्लाज्मा एयर का सुरक्षा कवच
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कानपुर। प्लाज्मा एयर का सुरक्षा कवच हैलट आईसीयू के रोगियों को अस्पताल के संक्रमण से बचा रहा है। खासतौर पर वेंटिलेटर पर रखे जाने वाले रोगियों को होने वाला जानलेवा निमोनिया के मामले 80 फीसदी तक घट गए हैं। प्लाज्मा एयर मशीन हवा से रोगाणु को खींचकर मार डालती है। फिर शुद्ध हवा माहौल में छोड़ती है। साथ ही आईसीयू में फॉगर लगाया गया है। इससे सफाई के लिए अब आईसीयू को 24 से 48 घंटे के लिए बंद नहीं कर पड़ता है।
हैलट इमरजेंसी के आईसीयू की माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने जीरो ऑर्गेनिज्म रिपोर्ट दी है। अस्पताल से मिलने वाले संक्रमण की दर शून्य होने से गंभीर रोगियों को खतरा घट गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल में सुपर बग, सूडोमोनास जैसे बैक्टीरिया का खतरनाक संक्रमण का खतरा रहता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि हैलट प्रदेश का इकलौता सरकारी अस्पताल है जिसमें प्लाज्मा एयर आदि उपकरण इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक प्लाज्मा एयर की कीमत एक करोड़ रुपये होती है।
आईसीयू प्रभारी सीनियर फिजीशियन डॉ. एसके गौतम ने बताया कि आईसीयू में दो प्लाज्मा एयर लगाए गए हैं। तीन महीने से उपकरण लगे हैं। वेंटिलेटर एसोसिएटेड निमोनिया 80 फीसदी कम हो गया। वेंटिलेटर पर रहने से रोगियों के फेफड़ों में निमोनिया हो जाता है। गंभीर रोगियों का रिकवरी रेट सुधरा है। साथ ही आईसीयू की गाइडलाइन पर अमल किया जा रहा है। बंडल ऑफ केयर के चार्ट लगाए गए हैं। इन्फेक्शन कंट्रोल कमेटी स्थिति पर नजर रखती है। साथ ही रोगियों का एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, इको जांच सब बेड पर ही हो जा रही है।
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हैलट इमरजेंसी के आईसीयू की माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने जीरो ऑर्गेनिज्म रिपोर्ट दी है। अस्पताल से मिलने वाले संक्रमण की दर शून्य होने से गंभीर रोगियों को खतरा घट गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल में सुपर बग, सूडोमोनास जैसे बैक्टीरिया का खतरनाक संक्रमण का खतरा रहता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि हैलट प्रदेश का इकलौता सरकारी अस्पताल है जिसमें प्लाज्मा एयर आदि उपकरण इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक प्लाज्मा एयर की कीमत एक करोड़ रुपये होती है।
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आईसीयू प्रभारी सीनियर फिजीशियन डॉ. एसके गौतम ने बताया कि आईसीयू में दो प्लाज्मा एयर लगाए गए हैं। तीन महीने से उपकरण लगे हैं। वेंटिलेटर एसोसिएटेड निमोनिया 80 फीसदी कम हो गया। वेंटिलेटर पर रहने से रोगियों के फेफड़ों में निमोनिया हो जाता है। गंभीर रोगियों का रिकवरी रेट सुधरा है। साथ ही आईसीयू की गाइडलाइन पर अमल किया जा रहा है। बंडल ऑफ केयर के चार्ट लगाए गए हैं। इन्फेक्शन कंट्रोल कमेटी स्थिति पर नजर रखती है। साथ ही रोगियों का एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, इको जांच सब बेड पर ही हो जा रही है।
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