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Pitru Paksha: तिल और सत्तू का तर्पण करने से पितर हो जाते हैं तृप्त, ये भी जानें
Mon, 12 Sep 2022 08:07 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 12 Sep 2022 08:07 AM IST
सार
पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने व उन्हें मुक्ति प्रदान का मार्ग दिखाने के लिए गीता के दो और सातवें अध्याय का पाठ जरूर करें। इसके साथ ही लोग हनुमान चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं।
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पितृपक्ष
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
श्राद्ध के दूसरे दिन तिल और सत्तू से तर्पण किया गया। मान्यता है कि इस मिश्रण से पितर तृप्त हो जाते हैं। सुबह पिंडदान करने वालों ने गंगा स्नान किया। इसके बाद पितरों को पानी दिया। मान्यता है कि पांच वेदियों पर पिंडदान से मृत आत्मा यम की यातना से मुक्त हो जाते हैं। ऐसा करने से कुल में कोई प्रेत नहीं रहता है।
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इसमें दस प्रकार के दान भी होते हैं। जूते-चप्पल, वस्त्र, छाता, काला तिल, घी, गुड़, धान्य, नमक, चांदी-स्वर्ण और गौभूमि। गरीबों व जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री, वस्त्र दान करने चाहिए। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने व उन्हें मुक्ति प्रदान का मार्ग दिखाने के लिए गीता के दो और सातवें अध्याय का पाठ जरूर करें। इसके साथ ही लोग हनुमान चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं। जल देते समय हाथ में कुश (पैती) जरूर पहनें।
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