आज है पितृ विसर्जनी अमावस्या, ऐसे मिलेगी आपके पूर्वजों को मोक्षप्राप्ति
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पितृ को प्रतीक स्वरूप अन्न जल प्रदान करते हैं। इससे प्रसन्न होकर पितृ सहर्ष शुभाशीष देकर अपने लोक लौट जाते हैं। आचार्य पंडित कृष्ण दत्त अवस्थी ने बताया कि परिजनों और पूर्वजों के देहत्याग की तिथि ज्ञात न होने पर या ज्ञात तिथि पर किसी अपरिहार्य कारणों से श्राद्ध न हो पाने पर अमावस्या यानी पितृ विसर्जन के दिन श्राद्ध कर सकते हैं। इसके अलावा अकाल मृत्यु से ग्रसित व्यक्तियों का श्राद्ध भी इसी दिन होता है।
यदि कोई अपने नाना-नानी का श्राद्ध करना चाहता है तो यह क्रिया अमावस्या यानी पितृ विसर्जन के दिन की जा सकती है। जब पितरों के पुत्र या पौत्र श्राद्ध करते हैं तो पितृ लोक में भ्रमण करने से मुक्ति मिलकर पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। पितृ पक्ष में पिंड दान अवश्य करना चाहिए ताकि देवों व पितरों का आशीर्वाद मिल सके।