{"_id":"68daf98996464b79dd03579f","slug":"petition-for-a-report-against-bnd-college-principal-dismissed-kanpur-news-c-12-1-knp1007-1282795-2025-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: बीएनडी प्राचार्य के खिलाफ रिपोर्ट की अर्जी खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: बीएनडी प्राचार्य के खिलाफ रिपोर्ट की अर्जी खारिज
विज्ञापन
कानपुर। बीएनडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ.विवेक द्विवेदी व अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दाखिल अर्जी को सीजेएम सूरज मिश्रा ने खारिज कर दिया है। कॉलेज में अस्थाई कम्प्यूटर ऑपरेटर पद पर काम करने वाले शशांक शुक्ला ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि वह वर्ष 2007 से कॉलेज में कार्यरत था।
डॉ. विवेक ने वर्ष 2013 में स्थाई नौकरी के लिए उनसे तीन लाख रुपये जमा करा लिए। 26 नवंबर 2024 को डॉ.विवेक ने अपने ऑफिस बुलाकर अतिरिक्त 12 लाख रुपये मांगे।महाविद्यालय में कैट लॉगर पद के लिए 25 लाख रुपये की मांग की। इनकार करने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी दी।
जेब में रखे रुपये भी लूट लिए। शशांक ने मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। वहीं पुलिस रिपोर्ट व विपक्षियों की आख्या में बताया गया कि शशांक कैट लॉगर पद पर नियुक्ति की योग्यता नहीं रखता था। अस्थाई नौकरी के दौरान उसने फर्जी रसीदें छपवाकर छात्रों से उगाही की थी।
विज्ञापन
फर्जीवाड़े में उसके खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। सभी पक्षों को सुनने और रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित है जिसकी सुनवाई का क्षेत्राधिकार उन्हें नहीं है। इस आधार पर शशांक की अर्जी खारिज कर दी।
विज्ञापन
डॉ. विवेक ने वर्ष 2013 में स्थाई नौकरी के लिए उनसे तीन लाख रुपये जमा करा लिए। 26 नवंबर 2024 को डॉ.विवेक ने अपने ऑफिस बुलाकर अतिरिक्त 12 लाख रुपये मांगे।महाविद्यालय में कैट लॉगर पद के लिए 25 लाख रुपये की मांग की। इनकार करने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी दी।
विज्ञापन
जेब में रखे रुपये भी लूट लिए। शशांक ने मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। वहीं पुलिस रिपोर्ट व विपक्षियों की आख्या में बताया गया कि शशांक कैट लॉगर पद पर नियुक्ति की योग्यता नहीं रखता था। अस्थाई नौकरी के दौरान उसने फर्जी रसीदें छपवाकर छात्रों से उगाही की थी।
विज्ञापन
फर्जीवाड़े में उसके खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। सभी पक्षों को सुनने और रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित है जिसकी सुनवाई का क्षेत्राधिकार उन्हें नहीं है। इस आधार पर शशांक की अर्जी खारिज कर दी।