संकट के सिपाही : सेवा और भाव देखकर लोग कहने लगे कोरोना योद्धा
- शवों को श्मशान पहुंचाकर कोरोना योद्धा बने हरिबाबू
- स्वर्गारोहण वाहन के चालक पद पर कार्यरत हैं
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कोरोना काल में नगर के समाजसेवियों के सहयोग से संचालित निशुल्क स्वर्गारोहण वाहन मानवता की मिसाल है। जहां स्वाभाविक मृत्यु पर भी लोग अपने संबंधियों के शव के पास जाने से डर रहे हैं वहीं स्वर्गारोहण वाहन के चालक हरीबाबू मृतक को घर से मोक्षधाम तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। हरीबाबू को इलाके में लोग कोरोना योद्धा के नाम से भी पुकारने लगे हैं।
कोरोना संक्रमण के कारण लोगों में इतना डर है कि स्वाभाविक मृत्यु पर भी परिचित लोग अपनी जान पहचान वालों के यहां मृतक को कंधा देना तो दूर उनके पास तक नहीं जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें नगर में समाजसेवियों द्वारा धर्मार्थ चलाए जा रहे अंतिम यात्रा स्वर्गारोहण वाहन की याद आती है। स्वर्गारोहण वाहन कोरोना काल में मानवता की मिसाल है। केवल एक फोन काल पर इस स्वर्गारोहण वाहन के चालक सहावनाका निवासी हरीबाबू मृतक के घर पहुंच जाते हैं और उसे मोक्षधाम तक पहुंचाते हैं।
बता दें कि मृतक के परिजनों से इस सेवा के बदले कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता है। इस वाहन में डीजल भी समाजसेवियों की ओर से ही उपलब्ध कराया जाता है। इस वाहन के दानपात्र में कोई व्यक्ति यदि कुछ डालना चाहे तो डाल सकता है यह उसकी इच्छा पर है। इस कार्य के लिए वाहन के चालक हरीबाबू गंभीर परिस्थिति में भी वह लोगों की सेवा में लगे हैं।
हरीबाबू ने बताया कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक किसी भी समय फोन आने पर वह तुरंत वाहन लेकर गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। इस कठिन परिस्थिति में वह किसी के काम आ रहे हैं यह सोचकर मन को आत्मिक शांति मिलती है। प्रतिदिन कम से कम दो से तीन फोन तो आ ही जाते है। कभी इससे ज्यादा भी होते हैं। हालांकि परिजन कोरोना काल में उन्हें इस कार्य के लिए मना करते हैं। कहते हैं कि रोजी रोटी का कोई दूसरा साधन देखें। पर यह मात्र पेट पालने का काम नहीं है बल्कि इस कठिन दौर में जब अपने ही अपनों के शवों उठाने से दूर भाग रहे हैं तो किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा। यही सोचकर वे शवों को ढोने में जुटे हैं।
डॉ. अरुण द्विवेदी (फतेहपुर) : खुद हुए संक्रमित लेकिन जारी रही मरीजों की मदद
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में गोपालगंज पीएचसी के स्टाफ ने कुछ ऐसा जज्बा दिखाया, जिसकी सराहना लोग कर रहे हैं। यहां के डाक्टर और कर्मचारी एक-एक करके संक्रमित होते रहे लेकिन उन्होंने अपनी सेवाएं बंद नहीं कीं। फोन पर परामर्श दिया तो व्हाट्सएप पर दवा लिखकर भेजी। खुद के इलाज के साथ उन्होंने क्षेत्र से आने वालों की भी सेवा की। स्वस्थ होने के बाद फिर से अस्पताल पहुंचकर मरीजों की मदद में जुट गए।
कल्यानपुर थानाक्षेत्र के गोपालगंज पीएचसी में कोरोना की दूसरी लहर का जबरदस्त असर हुआ। यहां तैनात तीन डाक्टर संक्रमित होकर होम आइसोलेट हो गए। जबकि यहां तैनात 17 स्वास्थ्य कर्मी भी संक्रमण की चपेट में आकर घर में कैद हो गए। ऐसे में पीएचसी की स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं और 24 घंटे के लिए अस्थाई रूप से सेवाएं बंद तक करनी पड़ीं। लोगों में इलाज को लेकर चिंता बढ़ी तो प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण द्विवेदी जो खुद संक्रमित थे, उन्होंने इस संकट की घड़ी में गजब का जज्बा दिखाया और अपने साथियों को भी प्रेरित किया।
उन्होंने दूरभाष के जरिए क्षेत्रीय लोगों को परामर्श देना शुरू किया। लक्षण के आधार पर उन्हें व्हाट्सएप पर दवाएं लिखकर भेजीं। साथियों में ऊर्जा आई तो प्रभारी की अनुपस्थिति में डॉ. अमलेश जोशी ने सभी साथियों की हौसला अफजाई की और ग्रामीणों की मदद के लिए तरह-तरह का प्रयास करते रहे। ऐसे में पीएचसी की चरमरा रही व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आई।
डा. अरुण द्विवेदी बताते हैं कि संक्रमण के दौरान क्षेत्रीय लोगों के बीच तालमेल बनाकर जिम्मेदारी निभाने का जो अनुभव मिला वह अविस्मरणीय है। उनकी गैर मौजूदगी में डॉ. जोशी के प्रयास व उनकी हौसला आफजाई ने स्टाफ में नई ऊर्जा भर दी। जिसके चलते आज पूरा स्टाफ संक्रमण के खिलाफ अपना पूरा योगदान दे रहा है।