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Kanpur News: अहेरीपुर के लोगों को अभी गांव में नहीं मिलेगा राशन
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:राशन डीलर चुनाव स्थगन के बाद खाली पड़ी कुर्सियां।
- फोटो : कुंडौरा के पास केे लाइन ठीक करते विद्युत कर्मीं। संवाद
इटावा/निवाड़ीकला। अहेरीपुर में गुरुवार को राशन डीलर के लिए होने वाली चुनाव प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। बीडीओ ने सुरक्षा व्यवस्था का सवाल उठाते हुए प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। अगली कोई तारीख भी तय नहीं की गई है। इससे साफ है कि यहां के लोगों को फिलहाल गांव राशन नहीं मिलेगा। बता दें कि एक बैठक में लगभग 25 हजार रुपये का खर्चा आता है, अब तक दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव नहीं हो सके। चुनाव के लिए सिर्फ तारीख मिल रही है।
ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत अहेरीपुर में राशन डीलर का चुनाव होना है। मई में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की ओर से 25 मई को गांव में खुली बैठक कर चुनाव करवाने की घोषणा की गई। इसके लिए प्रचार-प्रसार भी किया गया, लेकिन बैठक के एक दिन पहले यानि कि 24 मई को प्रक्रिया यह कहकर स्थगित कर दी गई कि ग्राम पंचायत की ओर से बैठक का प्रचार-प्रसार नहीं करवाया गया है। एक दिन पहले बीडीओ की ओर से जारी स्थगन पत्र की जानकारी न प्रधान को मिली और न ही सचिव को।
ऐसे में इस बैठक में लगभग 25 हजार रुपये का खर्चा आया। ठीक उसी प्रकार चुनाव की यह प्रक्रिया गुरुवार को होनी थी, इसके लिए फिर से तैयारी की गई। सुबह से ही बैठक स्थल पुलिस की छावनी में तब्दील हो गया, करीब 10 बजे लोगों को बताया गया कि चुनाव आज भी रद्द हो गया है। इस बार बीडीओ की ओर से सुरक्षा को लेकर तर्क दिया गया कि पर्याप्त सुरक्षा न होने के कारण चुनाव को स्थगित किया गया है। इस प्रकार दोनों बैठकों में लगभग 50 हजार रुपये का खर्च हो चुका है। लेकिन गांव के लोगों को तीन किमी दूर दूसरे गांव से राशन लेने जाना पड़ता है।
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ग्राम पंचायत अहेरीपुर की प्रधान संगीता वर्मा ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया बीडीओ की ओर से स्थगित की जाती है। उसकी जानकारी तक नहीं दी जाती है। बैठक से जुड़ी तैयारी होने के बाद पता चलता है कि बैठक निरस्त हो गई है। दोनों बैठकों में 50 हजार रुपये खर्च हो चुका है। अब यह धनराशि कौन देगा। यह बताने को कोई तैयार नहीं है, अगर चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाती तो इस खर्चे का निर्वहन पंचायत की ओर से किया जाता, लेकिन जब प्रक्रिया संपन्न नहीं हुई तो पंचायत क्यों इसका भुगतान करेगी। इसकी शिकायत वह डीएम से भी करेंगी।
महेवा बीडीओ यदुवीर सिंह ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के स्थगन का पत्र बुधवार को ही जारी कर दिया था। इसके बाद भी बैठक की तैयारी की गई और पुलिस फोर्स पहुंची तो इस बारे में वह जानकारी नहीं दे सकते है। इस चुनाव में कोई खर्चा ही नहीं होता है, जिसका भुगतान करवाया जाए। पिछले बैठक के बारे में भी वह स्पष्ट जानकारी देने के बजाए बचते हुए बचते हुए नजर आए।
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ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत अहेरीपुर में राशन डीलर का चुनाव होना है। मई में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की ओर से 25 मई को गांव में खुली बैठक कर चुनाव करवाने की घोषणा की गई। इसके लिए प्रचार-प्रसार भी किया गया, लेकिन बैठक के एक दिन पहले यानि कि 24 मई को प्रक्रिया यह कहकर स्थगित कर दी गई कि ग्राम पंचायत की ओर से बैठक का प्रचार-प्रसार नहीं करवाया गया है। एक दिन पहले बीडीओ की ओर से जारी स्थगन पत्र की जानकारी न प्रधान को मिली और न ही सचिव को।
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ऐसे में इस बैठक में लगभग 25 हजार रुपये का खर्चा आया। ठीक उसी प्रकार चुनाव की यह प्रक्रिया गुरुवार को होनी थी, इसके लिए फिर से तैयारी की गई। सुबह से ही बैठक स्थल पुलिस की छावनी में तब्दील हो गया, करीब 10 बजे लोगों को बताया गया कि चुनाव आज भी रद्द हो गया है। इस बार बीडीओ की ओर से सुरक्षा को लेकर तर्क दिया गया कि पर्याप्त सुरक्षा न होने के कारण चुनाव को स्थगित किया गया है। इस प्रकार दोनों बैठकों में लगभग 50 हजार रुपये का खर्च हो चुका है। लेकिन गांव के लोगों को तीन किमी दूर दूसरे गांव से राशन लेने जाना पड़ता है।
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ग्राम पंचायत अहेरीपुर की प्रधान संगीता वर्मा ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया बीडीओ की ओर से स्थगित की जाती है। उसकी जानकारी तक नहीं दी जाती है। बैठक से जुड़ी तैयारी होने के बाद पता चलता है कि बैठक निरस्त हो गई है। दोनों बैठकों में 50 हजार रुपये खर्च हो चुका है। अब यह धनराशि कौन देगा। यह बताने को कोई तैयार नहीं है, अगर चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाती तो इस खर्चे का निर्वहन पंचायत की ओर से किया जाता, लेकिन जब प्रक्रिया संपन्न नहीं हुई तो पंचायत क्यों इसका भुगतान करेगी। इसकी शिकायत वह डीएम से भी करेंगी।
महेवा बीडीओ यदुवीर सिंह ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के स्थगन का पत्र बुधवार को ही जारी कर दिया था। इसके बाद भी बैठक की तैयारी की गई और पुलिस फोर्स पहुंची तो इस बारे में वह जानकारी नहीं दे सकते है। इस चुनाव में कोई खर्चा ही नहीं होता है, जिसका भुगतान करवाया जाए। पिछले बैठक के बारे में भी वह स्पष्ट जानकारी देने के बजाए बचते हुए बचते हुए नजर आए।