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कानपुर हैलेट अस्पताल: खिड़की-दरवाजे खोलने से आईसीयू संक्रमित, मरीजों को खतरा

Sat, 09 Jun 2018 02:29 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 09 Jun 2018 02:29 PM IST
सार

- आधुनिकता के युग में बाबा आदम के जमाने का यह तरीका अपनाया
- तापमान बढ़ने से बंद हो सकते हैं वेंटीलेटर सहित अन्य चिकित्सा उपकरण

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Patients infected in ICU of Kanpur Heath Hospital
फाइल फोटो
आईसीयू यानी इंटेसिव केयर यूनिट (सघन चिकित्सा कक्ष) में गंभीर मरीजों को अति सतर्कता-सुरक्षा के साथ रखा जाता है, कोई व्यक्ति जूते-चप्पल तक पहनकर अंदर नहीं जा सकता क्योंकि इससे इन्फेक्शन का खतरा रहता है। आईसीयू एयर टाइट रहता है ताकि बाहर की प्रदूषित हवा अंदर गंभीर मरीजों तक न पहुंच सके। ऐसे में हैलट मेडिसिन आईसीयू में एसी प्लांट फेल हो जाने पर गुरुवार को खिड़की-दरवाजे तक खोल दिए गए। सवाल उठता है कि ऐसा करके क्या जान-बूझ कर मरीजों का जीवन संकट में नहीं डाल दिया गया।

 
Patients infected in ICU of Kanpur Heath Hospital
फाइल फोटो
आधुनिकता के युग में क्या बाबा आदम के जमाने का यह तरीका अपनाना बुद्धिजीवी लोगों (डॉक्टर) की बुद्धिमानी थी।  अब आईसीयू में दरवाजे, खिड़कियां खोलने से बैक्टीरिया का घनत्व बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे मरीजों को भी संक्रमण का खतरा है। कालेज प्रशासन आईसीयू को बैक्टीरिया फ्री बनाने के लिए एक - दो दिन में फ्यूमीगेशन (बैक्टीरिया मुक्त) कराने की बात कह रहा है। 

 

तापमान बढ़ने से बंद हो सकते हैं चिकित्सा उपकरण   

Patients infected in ICU of Kanpur Heath Hospital
फाइल फोटो
विशेषज्ञों के अनुसार आईसीयू का एसी प्लांट खराब होने से तापमान बढ़ने लगता है। शुरुआत में वहां मौजूद मरीजों, तीमारदारों, डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को घुटन, सांस लेने में तकलीफ होती है, फिर उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी मरीज को 101 फॉरेनहाइट तापमान में भर्ती कराया गया हो तो उसका तापमान बढ़कर 105 - 106 फॉरेनहाइट पहुंच सकता है। इससे उसकी अन्य तकलीफें भी बढ़ जाती हैं और इलाज करना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं तापमान बढ़ने से एबीजी (आर्टरियल ब्लड गैसेस) मशीन ठीक से काम नहीं करती है। वेंटीलेटर में तापमान को नियंत्रित करने वाले थर्मोस्टेट ट्रिप करने लगते हैं। इससे इनका नियंत्रित, क्रियाशीलता और रीडिंग प्रभावित हो सकती है, जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ सकता है। उसकी जान तक जा सकती है। डी-फ्रेबिलेटर मशीन, मॉनीटर ट्रिप करने, बंद होने या फुंकने का खतरा रहता है।

 
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आईसीयू का दरवाजा, खिड़कियां खोलने से संक्रमण

Patients infected in ICU of Kanpur Heath Hospital
फाइल फोटो
एसी आईसीयू की गंदी हवा खींचता है और फिल्टर्ड एयर छोड़ता है। इससे आईसीयू में बैक्टीरिया कम होते रहते हैं। इसके विपरीत एसी बंद होने से बैक्टीरिया का घनत्व बढ़ने लगता है। इतना ही नहीं हैलट मेडिसिन आईसीयू में जिस प्रकार दरवाजे और खिड़कियां खोल दिए गए थे, उससे वहां बैक्टीरिया का घनत्व बहुत बढ़ गया होगा। ऐसे आईसीयू में मरीजों को भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मेडिसिन आईसीयू के इंचार्ज डा. सौरभ अग्रवाल का दावा है कि एसी खराब होने के बावजद वेंटीलेटर, मॉनीटर सहित सभी चिकित्सा उपकरण सामान्य रूप से काम करते रहे। इस वजह से किसी मरीज की मौत नहीं हुई। 
 
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लिया सबक, होगी दोहरी व्यवस्था

Patients infected in ICU of Kanpur Heath Hospital
फाइल फोटो
मेडिकल कालेज प्रशासन ने इस हादसे से सबक लिया। प्राचार्य डा. नवनीत कुमार ने बताया कि आईसीयू में एसी की दोहरी व्यवस्था की जाएगी। एक एसी प्लांट चलेगा और दूसरा वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में रहेगा। ताकि उन्हें एक - एक कर चलाया जाता रहे और यदि एक खराब हो जाए तो तुरंत दूसरे एसी प्लांट से आईसीयू में सामान्य कूलिंग उपलब्ध होती रहे। 

 
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