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नीति आयोग को भाया बाल आविष्कारक पार्थ का आइडिया
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 07 Nov 2016 09:43 AM IST
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पु्खरायां नगर के बाल आविष्कारक पार्थ बंसल का आइडिया नीति आयोग के प्रजेंटेशन के लिए चयनित हुआ है। पार्थ ने एक ऐसी ‘लेजर स्टिक’ का आविष्कार किया है जिसके सहारे ‘पार्किन्संस’ मरीजों को लेजर स्टिक के सहारे चलने-फिरने की समस्या से निजात मिलेगी। इस बाबत सात नवंबर को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी पुरस्कृत करेंगे।
पार्थ की दादी इस बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी परेशानी से प्रेरित होकर ही पार्थ ने यह लेजर स्टिक बनाई है। नीति आयोग की ओर से अटल इनोवेशन मिशन के तहत देश के 500 स्कूलों में अटल टिकरिंग लैब बनाने के लिए शनिवार को दिल्ली के फिक्की ऑडीटोरियम में प्रजेंटेशन आयोजित किया गया था, जिसमें एपीजे स्कूल नोएडा के तीन बच्चे भेजे गए थे, उनमें पार्थ का आइडिया चयनित किया गया। इससे एपीजे स्कूल में अटल टिकरिंग लैब बनाने के लिए भी चयनित किए जाने के आसार बने हैं। जिसके लिए केंद्र सरकार से 20 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
पार्थ के पिता संदीप बंसल ने बताया कि लेजर छड़ी पार्थ का पहला आविष्कार नहीं है, इसके पहले उसने एक ऐसा मोबाइल एप तैयार किया है, जिसे कूलर आदि किसी भी उपकरण से जोड़कर उसे बंद या चालू किया जा सकता है। इसके अलावा रोबोट, इंडक्शन प्लेट, जनरेटर आदि भी बना चुका है। हाल ही में उसे ‘गूगल’ ने अपने इंटरनेट सुरक्षा मिशन के लिए चुना है।
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इन मरीजों को मिलेगा फायदा
जिन मरीजों के हाथ-पैर चलते-फिरते समय कांपते हैं, वे खासतौर पर प्लेन फर्श पर नहीं चल पाते हैं। अलबत्ता सीढ़ियों व अन्य किसी अवरोध को वे आसानी से पार नहीं कर पाते हैं। बताया कि दिमाग में डोपामाइन केमिकल की कमी से यह बीमारी होती है। इसके सही कारक की अभी तक खोज नहीं हो सकी है। ऐसे मरीजों के लिए पार्थ की बनाई ‘लेजर स्टिक' काफी सहायक है।
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पार्थ की दादी इस बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी परेशानी से प्रेरित होकर ही पार्थ ने यह लेजर स्टिक बनाई है। नीति आयोग की ओर से अटल इनोवेशन मिशन के तहत देश के 500 स्कूलों में अटल टिकरिंग लैब बनाने के लिए शनिवार को दिल्ली के फिक्की ऑडीटोरियम में प्रजेंटेशन आयोजित किया गया था, जिसमें एपीजे स्कूल नोएडा के तीन बच्चे भेजे गए थे, उनमें पार्थ का आइडिया चयनित किया गया। इससे एपीजे स्कूल में अटल टिकरिंग लैब बनाने के लिए भी चयनित किए जाने के आसार बने हैं। जिसके लिए केंद्र सरकार से 20 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
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पार्थ के पिता संदीप बंसल ने बताया कि लेजर छड़ी पार्थ का पहला आविष्कार नहीं है, इसके पहले उसने एक ऐसा मोबाइल एप तैयार किया है, जिसे कूलर आदि किसी भी उपकरण से जोड़कर उसे बंद या चालू किया जा सकता है। इसके अलावा रोबोट, इंडक्शन प्लेट, जनरेटर आदि भी बना चुका है। हाल ही में उसे ‘गूगल’ ने अपने इंटरनेट सुरक्षा मिशन के लिए चुना है।
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इन मरीजों को मिलेगा फायदा
जिन मरीजों के हाथ-पैर चलते-फिरते समय कांपते हैं, वे खासतौर पर प्लेन फर्श पर नहीं चल पाते हैं। अलबत्ता सीढ़ियों व अन्य किसी अवरोध को वे आसानी से पार नहीं कर पाते हैं। बताया कि दिमाग में डोपामाइन केमिकल की कमी से यह बीमारी होती है। इसके सही कारक की अभी तक खोज नहीं हो सकी है। ऐसे मरीजों के लिए पार्थ की बनाई ‘लेजर स्टिक' काफी सहायक है।