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Kanpur News: गंगा और पांडु के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती गांवों में दहशत
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फोटो-46-सदनहा में उफान में गंगा बढी किसानों में चिंता। संवाद
चौडगरा। मलवां विकास खंड की अभयपुर ग्राम सभा सहित औसेरी खेड़ा, जाड़े का पुरवा, मल्लू खेड़ा, मदारपुर, बेरीनारी, काली कुंडी, सदनहा, रामघाट और बिंदकी फार्म बंबूरी खेड़ा बस्तियों में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गंगा के विकराल रूप के बीच अब पांडु नदी में भी पानी बढ़ने की आशंका ने तटीय इलाकों के किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
गांव के राम लखन, भोला, मुंसीलाल, पूती और राकेश सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। रात के समय झोपड़ियों के आसपास पानी भरने से लोगों को जहरीले जीव-जंतुओं का भी डर सता रहा है।
बाढ़ प्रबंधन अधिकारी कृष्णकांत ने बताया कि 24 घंटे में गंगा नदी के जलस्तर में 21 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। वर्तमान जलस्तर 100.14 मीटर है। यह खतरे के निशान से 72 सेंटीमीटर नीचे है।
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सब्जी की फसलों पर मंडराया बर्बादी का खतरा
किसान राम लखन निवासी दरियापुर ने बताया कि गंगा का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो पांडु नदी भी उफान पर आ सकती है। इससे पानी खेतों और बस्तियों तक पहुंचने का खतरा है। जलभराव से तरोई, लौकी, कद्दू, खीरा, बन करैली, चचिड़ा और मक्का सहित अन्य हरी सब्जियों की फसलें प्रभावित होंगी। किसानों की महीनों की मेहनत और जमा पूंजी बर्बाद होने की कगार पर है।
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गांव के राम लखन, भोला, मुंसीलाल, पूती और राकेश सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। रात के समय झोपड़ियों के आसपास पानी भरने से लोगों को जहरीले जीव-जंतुओं का भी डर सता रहा है।
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बाढ़ प्रबंधन अधिकारी कृष्णकांत ने बताया कि 24 घंटे में गंगा नदी के जलस्तर में 21 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। वर्तमान जलस्तर 100.14 मीटर है। यह खतरे के निशान से 72 सेंटीमीटर नीचे है।
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सब्जी की फसलों पर मंडराया बर्बादी का खतरा
किसान राम लखन निवासी दरियापुर ने बताया कि गंगा का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो पांडु नदी भी उफान पर आ सकती है। इससे पानी खेतों और बस्तियों तक पहुंचने का खतरा है। जलभराव से तरोई, लौकी, कद्दू, खीरा, बन करैली, चचिड़ा और मक्का सहित अन्य हरी सब्जियों की फसलें प्रभावित होंगी। किसानों की महीनों की मेहनत और जमा पूंजी बर्बाद होने की कगार पर है।