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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट: गंगा में घटी आक्सीजन, जलीय जंतुओं को खतरा

Sun, 10 Jun 2018 02:31 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 10 Jun 2018 02:31 PM IST
सार

- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट से खुलासा, 
- एक महीने में करीब 7 मिलीग्राम प्रति लीटर घट गई मात्रा
- जलस्तर घटने, सीवर, टेनरियों का कचरा गिरने से ऐसी स्थिति
 

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Oxygen decreased in river Ganges
डेमाे पिक
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में यूपी के कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र की गंगा में आक्सीजन (डीओ) की मात्रा सामान्य से दो गुना घट गई है। इस समय यह मात्रा 2.8 है। सामान्य मात्रा चार होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में इस क्षेत्र में गंगा में रहने वाले जलीय जंतुओं के लिए खतरा पैदा हो गया है।

 

 

Oxygen decreased in river Ganges
डेमाे पिक
पिछले तीन वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि अप्रैल में गंगा में आक्सीजन की मात्रा कम हुई है। रिपोर्ट अप्रैल महीने की है, मई और जून में भी आक्सीजन की मात्रा सामान्य तक नहीं पहुंच पाई है।पिछले दिनों फर्रुखाबाद और कन्नौज की गंगा में आक्सीजन की कमी होने से लाखों मछलियां मर गई थीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से हर महीने गंगा में आक्सीजन की मात्रा मापी जाती है। बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2018 में पहली बार यह स्थिति पैदा हुई है। तब से स्थिति में आज तक सुधार नहीं आ पाया है। मार्च महीने की अपेक्षा अप्रैल में यह मात्रा 7 मिलीग्राम घट गई। इसकी वजह गंगा का जलस्तर घटना और नालों व टेनरियों का प्रदूषित कचरा है। बोर्ड के अनुसार गंगा में जलीय जंतुओं के जीवित रहने के लिए आक्सीजन की मात्रा कम से कम चार मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप मिश्रा के अनुसार इस बार प्रदूषण का लेवल अधिक होने से ऐसा हुआ है।

 

गंगा में आक्सीजन (डीओ) की मात्रा 

Oxygen decreased in river Ganges
डेमाे पिक
2018 अप्रैल - 2.8
2018 मार्च - 9.6
2017 अप्रैल - 5.80
2016 अप्रैल - 5.80

 
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Oxygen decreased in river Ganges
डेमाे पिक
तथ्य
- पानी में आक्सीजन मात्रा यदि 4 मिलीग्राम है तो उसमें सांस ली जा सकती है। 
- यदि मात्रा 5 मिलीग्राम तक है तो यह जलीय जतुओं के प्रजनन के लिए बेहतर होती है। 
- इससे अधिक मात्रा में सभी जीव आसानी से पानी के अंदर काफी समय तक रह सकते हैं। 
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