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उरई: ‘आग लगी थी फिर भी छिपाते रहे चालक-कंडक्टर', खुद घायल होकर भी बचाई 13 जिंदगियां, हिसार ने सुनाईं आपबीती

Thu, 24 Sep 2026 03:28 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उरई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उरई Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 24 Sep 2026 03:28 PM IST
सार

Orai News: नोएडा में भीषण आग का शिकार हुई स्लीपर बस हादसे में बचे उरई निवासी यात्री हिसार ने दिल दहला देने वाली आपबीती साझा की। यात्री के मुताबिक, बस में आग लगने के बावजूद चालक और कंडक्टर यात्रियों को गुमराह करते रहे और अंत में गाड़ी छोड़कर भाग गए। हिसार ने खुद घायल होने के बावजूद 13 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। 

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Orai fire broken out yet driver and conductor kept it under wraps saved 13 lives despite injured themselves
घटना की जानकारी देता यात्री - फोटो : amar ujala

विस्तार

नोएडा में स्लीपर बस में आग लगने के बाद उरई निवासी यात्री ने हादसे की दिल दहला देने वाली आपबीती सुनाई। यात्री के मुताबिक, बस में आग लग चुकी थी। फिर भी, चालक और कंडक्टर ने यात्रियों को इसकी जानकारी नहीं दी। यात्रियों के पूछने पर भी वह गोलमोल जवाब देते रहे। कुछ ही देर में बस में भगदड़ मच गई। चालक और कंडक्टर बस खड़ी कर वहां से निकल गए, जबकि अंदर फंसे यात्री जान बचाने के लिए जूझते रहे।

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उरई निवासी यात्री हिसार ने बताया कि वह रात करीब नौ बजे बस में सवार हुआ था। बस को अगले दिन सुबह करीब पांच बजे उरई पहुंचना था। रात में सफर के दौरान अचानक बस में आग लग गई। जब यात्रियों को इसकी भनक लगी और उन्होंने चालक-कंडक्टर से पूछा, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट नहीं की। देखते ही देखते आग और धुआं बढ़ने लगा और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

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13 लोगों को बस से बाहर निकालने में मदद की
यात्री ने बताया कि उस समय उसे अपनी जान की परवाह तो थी ही, लेकिन बस में फंसे दूसरे यात्रियों को देखकर वह भी उन्हें बाहर निकालने में जुट गया। उसने करीब 13 लोगों को बस से बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान भगदड़ में कई लोग उसके ऊपर गिर पड़े, जिससे उसे भी चोटें आईं। उसने बताया कि लोग किसी तरह खिड़कियों और दरवाजे की ओर भाग रहे थे और हर तरफ अफरातफरी का माहौल था।

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1.14 लाख रुपये बस में ही रह गए
हादसे के दौरान यात्री के स्लीपर में करीब 1.14 लाख रुपये रखे थे। आग बढ़ने पर उसने रुपये निकालने के बारे में नहीं सोचा। उसका कहना है कि उस समय सामने सिर्फ जान बचाने की चुनौती थी। वह पैसे वहीं छोड़कर किसी तरह बस से बाहर निकल आया। यात्री ने बताया कि हादसे में करीब नौ लोगों की मौत की जानकारी उसे मिली है, जबकि कुछ यात्रियों के बारे में अभी पता नहीं है। बस में उरई के दो-तीन अन्य यात्री भी सवार थे। हादसे के बाद उनका क्या हुआ, इसकी उसे कोई जानकारी नहीं है।

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पैसे मिल जाएंगे, जान दोबारा नहीं मिलेगी
पीड़ित ने कहा कि बस में उसका करीब 1.14 लाख रुपये का सामान रह गया, लेकिन उस समय उसे पैसे बचाने की बजाय अपनी जान बचाना जरूरी लगा। उसने किसी तरह बाहर निकलकर राहत की सांस ली। हादसे की भयावहता का जिक्र करते हुए वह बार-बार यही बताता रहा कि कुछ ही देर में पूरी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

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