मैं जिंदा हूं: फिल्म ‘कागज’ की तरह सिस्टम ने ओम प्रकाश को मार दिया था, पढ़ें- पांच महीने के डेडमैन की कहानी
फिल्म ‘कागज’ में जिस तरह सिस्टम की कमजोरियों व भ्रष्ट कर्मचारियों के कारण अभिनेता पंकज त्रिपाठी को मृत दिखाकर उनकी जमीन किसी और ने अपने नाम करा ली थी। वैसे ही कन्नौज में भी एक ‘डेडमैन’ सामने आया है। हालांकि, इस ‘डेडमैन’ की किस्मत अच्छी थी, जिसने चार दिन में खुद को जिंदा साबित कर दिया।
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पांच महीने से खुद को जिंदा साबित करने की कवायद में लगा ओम प्रकाश आखिरकार सोमवार को जीवन पा ही गया। डीएम के आदेश पर तिर्वा तहसीलदार ने ओम प्रकाश का नाम खतौनी में दर्ज करा दिया। नई खतौनी तहसीलदार ने सोमवार को अपने कार्यालय कक्ष में ओम प्रकाश को सौंपी। पांच महीने पहले मृत घोषित ओम प्रकाश जिंदा हो गया।
सरसई भड़हा निवासी ओम प्रकाश ने बीती 22 जुलाई को डीएम शुभ्रांत शुक्ला से जनता दर्शन में मुलाकात की थी। इस दौरान उसने डीएम को बताया था कि बीती 17 फरवरी को राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने जानबूझकर उसे मृत दर्शाकर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए खतौनी से नाम काट दिया था। उसका दावा था कि खाता संख्या 58,735 ग्राम सरसई का वह दर्ज खातेदार था और अब भी जीवित है।
पूरा मामला पता चलने पर ओम प्रकाश ने तिर्वा तहसील में गुहार लगाई, तो लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने गलत रिपोर्ट निरस्त कर दूसरी आख्या न्यायालय तहसीलदार तिर्वा में पेश की, लेकिन फिर भी उसकी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ।
इस पर डीएम ने एसडीएम तिर्वा गरिमा सिंह और तहसीलदार अनिल सरोज को निस्तारण कराकर अवगत कराने के निर्देश दिए। इसी क्रम में सोमवार को तहसीलदार ने अपने कार्यालय कक्ष में संशोधित खतौनी ओम प्रकाश को सौंपी, जिसमें उसका नाम खातेदार के तौर पर दर्ज है। ओम प्रकाश ने खुद के जिंदा साबित हो जाने के लिए डीएम का आभार जताया।