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चित्रकूट: वन कर्मियों से ग्रामीणों व प्रधान की नोकझोंक, मारपीट की नौबत, थाने पहुंचा मामला

Mon, 19 Aug 2019 09:29 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 19 Aug 2019 09:29 PM IST
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Occupation of forest department land in Chitrakoot
निर्माण स्थल पर ग्रामीणों को समझाती पुलिस व मौजूद वन विभाग के कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट में वन विभाग की जमीन में अवैध रूप से अस्थाई गोशाला बनाने की सूचना पर पहुंचे वन कर्मियों को ग्रामीणों ने घेराबंदी कर के गालीगलौज करते हुए मारपीट पर आमादा हो गए। रेंजर ने घटना की सूचना डीएफओ को दी। इस पर डीएफओ ने आनन-फानन एसपी को अवगत कराया। एसपी के निर्देश पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह समझा बुझाकर मामले को शांत कराया। इसके बाद वन रेंजर ने बीडीओ, प्रधान सचिव समेत अज्ञात के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है।
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प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को सौंपे शिकायती पत्र में कर्वी रेंज के वन दरोगा गिरधारीलाल यादव पुत्र मंगली प्रसाद यादव ने बताया कि ग्राम रैपुरवा माफी वन भूमि में गोशाला का ग्रामीण अवैध रूप से अस्थाई निर्माण कर रहे थे। वन कर्मियों के पहुंचने पर ग्रामीणों ने बताया कि खंड विकास अधिकारी कर्वी कुलदीप कुमार, ग्राम पंचायत सचिव राजेश सिंह पटेल, प्रधान मुन्नी देवी व प्रतिनिधि गया प्रसाद पटेल के कहने पर वह लोग अस्थाई गोशाला बना रहे हैं।
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वन कर्मियों के मना करने पर इन लोगों समेत ग्रामीण देवीदयाल आदि ने करीब डेढ़ सैकड़ा ग्रामीणों के साथ घेराबंदी कर ली और गलीगलौज करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए। वन क्षेत्र की लगभग दस बीघे जमीन में ग्रामीण जबरन आारसीसी में इंगल लगाकर कटीले तार लगाने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायती पत्र में बताया गया कि भारतीय वन अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। शिकायतकर्ता वन कर्मियों ने रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाही की मांग की है।
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वन क्षेत्राधिकारी नफीस खान ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा घेराबंदी व अभद्रता की सूचना डीएफओ को मोबाइल के जरिए दी है। इस पर उन्होंने एसपी को घटना से अवगत कराया है। इस मामले में बीडीओ ने बताया कि इस भूमि पर विवाद की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। अब वन विभाग ने बताया है तो निर्माण रोक दिया गया है। अन्य जगह निर्माण कराया जाएगा। कोतवाल अनिल सिंह ने बताया कि तहरीर मिली है लेकिन अभी दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है।
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