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रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पर 23 बिल्डरों को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो कानपुर
Updated Wed, 25 May 2016 01:26 AM IST
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राबर्ट्सगंज धर्मशाला चौक पर नाली में जमा गंदा पानी।
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मनोज चौरसिया
कानपुर। भीषण जल संकट के बाद चेते केडीए ने मल्टीस्टोरियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले एनआरआई सिटी सहित 23 बिल्डरों को नोटिस दिए हैं। उनसे 10 दिन में जवाब तलब किया गया है और यह सिस्टम लगाने के लिए उन्हें एक महीने की मोहलत दी गई है। ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। उधर, केडीए में लगे इस सिस्टम की सफाई तक नहीं कराई गई है।
सबमर्सिबल या मिनी ट्यूबवेल लगाकर धड़ल्ले से भूगर्भ जल के दोहन के बावजूद ज्यादातर बिल्डिंगों में यह सिस्टम लगा ही नहीं है। एक साल में भूगर्भ जल में करीब 55 सेंटीमीटर की गिरावट के बाद केडीए ने कार्रवाई शुरू की है। पहले चरण में एक हजार वर्ग मीटर से बड़े प्लाटों के 23 निर्माणकर्ताओं को नोटिस दिए गए हैं।
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
मानसून सीजन से पहले वर्षा जल संरक्षण के लिए आवास विकास परिषद रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने की मुहिम शुरू करेगा। इसके अंतर्गत आवंटियों को सिस्टम लगवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही बड़े आवंटियों के यहां लगे सिस्टम की जांच की जाएगी। सिस्टम के रख-रखाव में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी। परिषद के अधीक्षण अभियंता एसपीएन सिंह ने बताया कि बिना सिस्टम लगवाए, नक्शा पास नहीं होता। हालांकि लोग इसकी देखरेख नहीं करते, इस कारण सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं करते। जिन प्रापर्टीज में सिस्टम लगाने का प्रावधान है, उनकी जांच की जाएंगी। सिस्टम सही न रखने वालों के खिलाफ नोटिस जारी किए जाएंगे।
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ये है नियम
उ.प्र. नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 के तहत 300 वर्गमीटर या इससे बड़े प्लाटों पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराते समय रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का प्रावधान करना आवश्यक है। केडीए इसी शर्त के साथ नक्शे भी पास करता है, पर ज्यादातर निर्माणकर्ताओं ने यह सिस्टम नहीं लगाया है।
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कानपुर। भीषण जल संकट के बाद चेते केडीए ने मल्टीस्टोरियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले एनआरआई सिटी सहित 23 बिल्डरों को नोटिस दिए हैं। उनसे 10 दिन में जवाब तलब किया गया है और यह सिस्टम लगाने के लिए उन्हें एक महीने की मोहलत दी गई है। ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। उधर, केडीए में लगे इस सिस्टम की सफाई तक नहीं कराई गई है।
सबमर्सिबल या मिनी ट्यूबवेल लगाकर धड़ल्ले से भूगर्भ जल के दोहन के बावजूद ज्यादातर बिल्डिंगों में यह सिस्टम लगा ही नहीं है। एक साल में भूगर्भ जल में करीब 55 सेंटीमीटर की गिरावट के बाद केडीए ने कार्रवाई शुरू की है। पहले चरण में एक हजार वर्ग मीटर से बड़े प्लाटों के 23 निर्माणकर्ताओं को नोटिस दिए गए हैं।
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रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
मानसून सीजन से पहले वर्षा जल संरक्षण के लिए आवास विकास परिषद रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने की मुहिम शुरू करेगा। इसके अंतर्गत आवंटियों को सिस्टम लगवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही बड़े आवंटियों के यहां लगे सिस्टम की जांच की जाएगी। सिस्टम के रख-रखाव में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी। परिषद के अधीक्षण अभियंता एसपीएन सिंह ने बताया कि बिना सिस्टम लगवाए, नक्शा पास नहीं होता। हालांकि लोग इसकी देखरेख नहीं करते, इस कारण सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं करते। जिन प्रापर्टीज में सिस्टम लगाने का प्रावधान है, उनकी जांच की जाएंगी। सिस्टम सही न रखने वालों के खिलाफ नोटिस जारी किए जाएंगे।
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ये है नियम
उ.प्र. नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 के तहत 300 वर्गमीटर या इससे बड़े प्लाटों पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराते समय रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का प्रावधान करना आवश्यक है। केडीए इसी शर्त के साथ नक्शे भी पास करता है, पर ज्यादातर निर्माणकर्ताओं ने यह सिस्टम नहीं लगाया है।