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नोट बंदी से हांफा 100 करोड़ का इत्र कारोबार
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 28 Nov 2016 01:46 AM IST
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नोटबंदी ने फूलों की खुशबू पर सीधा असर डाला है। इत्र कारोबारियों के पास नए नोट नहीं हैं। एग्रीमे्ंट के तहत जो किसान फूल दे रहे हैं, उन्हें व्यापारी पुराने नोट थमा देते हैं। ऐसे में फूलों की खेती करने वाले किसान खेत के बजाय बैंक में चक्कर काट रहे हैं। दूसरी तरफ जिनका एग्रीमेंट नहीं हुआ है, वे किसान किसी भी कीमत पर पुराने नोट लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में इस कारोबार पर दोहरी मार पड़ रही है। कारोबारियों के पास नए नोट नहीं होने की वजह से श्रमिक भी कारखाना छोड़ कर घर चले गए हैं।
इत्र कारोबारी नीरज मेहरोत्रा की मानें तो जिले में 125 छोटे-बडे़ इत्र से जुड़े कारोबारी हैं। 100 करोड़ रुपये सालाना का कारोबार होता है। पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने से कारोबार पर असर पड़ा है। कारोबारी राहुल मिश्रा का कहना है कि नोटबंदी से कारखाने में उत्पादन बंद हो गया है। फुटकर कैश नहीं है। वह फूल किसानों को परेशान नहीं कर सकते हैं। स्थिति सामान्य होने तक व्यापार को ढीला रखेंगे। किसानों को भी नुकसान हो रहा है। दूसरी तरफ पटकाना निवासी किसान अनिल कुमार का कहना है कि कोठी (इत्र कारोबारी का आवास)पर एक साल में हिसाब होता है। उसी समय सिंचाई, उधारी सभी चुकता कर दी जाती है। मार्च में हिसाब होगा। अभी कैश की किल्लत है। घर में कुछ पुराना रुपया था। उसे बैंक में जमा कर दिया। घर खर्च के लिए कोठी से 20 हजार रुपये एडवांस मांगा था। कोठी से पांच सौ व एक हजार के नोट मिले। इन्हें बैंक में जमा करने में परेशानी हो रही है। पांच दिन से फूल की तुड़ाई बंद है।
100 करोड़ सालाना है कन्नौज का इत्र कारोबार
20 फीसदी कारोबार नोटबंदी से हुआ प्रभावित
180 में से मात्र110 कारखाने ही चल रहे हैं
600 हेक्टेयर में होती है जिले में फूलों की खेती
50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार
यूरोप में महकता है कन्नौज का इत्र
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इत्र कारोबारी नीरज मेहरोत्रा की मानें तो जिले में 125 छोटे-बडे़ इत्र से जुड़े कारोबारी हैं। 100 करोड़ रुपये सालाना का कारोबार होता है। पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने से कारोबार पर असर पड़ा है। कारोबारी राहुल मिश्रा का कहना है कि नोटबंदी से कारखाने में उत्पादन बंद हो गया है। फुटकर कैश नहीं है। वह फूल किसानों को परेशान नहीं कर सकते हैं। स्थिति सामान्य होने तक व्यापार को ढीला रखेंगे। किसानों को भी नुकसान हो रहा है। दूसरी तरफ पटकाना निवासी किसान अनिल कुमार का कहना है कि कोठी (इत्र कारोबारी का आवास)पर एक साल में हिसाब होता है। उसी समय सिंचाई, उधारी सभी चुकता कर दी जाती है। मार्च में हिसाब होगा। अभी कैश की किल्लत है। घर में कुछ पुराना रुपया था। उसे बैंक में जमा कर दिया। घर खर्च के लिए कोठी से 20 हजार रुपये एडवांस मांगा था। कोठी से पांच सौ व एक हजार के नोट मिले। इन्हें बैंक में जमा करने में परेशानी हो रही है। पांच दिन से फूल की तुड़ाई बंद है।
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100 करोड़ सालाना है कन्नौज का इत्र कारोबार
20 फीसदी कारोबार नोटबंदी से हुआ प्रभावित
180 में से मात्र110 कारखाने ही चल रहे हैं
600 हेक्टेयर में होती है जिले में फूलों की खेती
50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार
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