{"_id":"60f6c7168ebc3e6d3e4e8b80","slug":"non-bailable-warrants-against-two-including-wife-of-former-foreign-minister","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फर्रुखाबाद: पूर्व विदेश मंत्री की पत्नी समेत दो के खिलाफ गैर जमानती वारंट, फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का चल रहा मुकदमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्रुखाबाद: पूर्व विदेश मंत्री की पत्नी समेत दो के खिलाफ गैर जमानती वारंट, फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का चल रहा मुकदमा
Tue, 20 Jul 2021 07:31 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 20 Jul 2021 07:31 PM IST
सार
अनुसंधान संगठन के विवेचक ने 30 दिसंबर 2019 को लुईस खुर्शीद व अतहर फारूखी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट से आरोपियों को समन जारी किए गए थे।
विज्ञापन
पूर्व विदेश मंत्री की पत्नी लुईस खुर्शीद
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट की परियोजना निदेशक व पूर्व विदेश मंत्री की पत्नी लुईस खुर्शीद और सचिव अतहर फारूखी उर्फ मोहम्मद अतहर के खिलाफ सीजेएम कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुए हैं।
इनके खिलाफ फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी का मुकदमा चल रहा है। ट्रस्ट को 30 मार्च 2010 को केंद्र सरकार से 71.50 लाख रुपये दिव्यांगों को उपकरण बांटने के लिए मिले थे।
इस धनराशि से चार लाख रुपये के उपकरण फर्रुखाबाद में कैंप लगाकर दिव्यांगों को बांटे जाने थे। इस धनराशि का उपभोग प्रमाणपत्र तीन माह में देने का आदेश परियोजना निदेशक व सचिव को दिया गया था।
विज्ञापन
इसके साथ 10 प्रतिशत दिव्यांगों का सत्यापन जिला स्तरीय समिति से कराकर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजनी थी। 3 जून 2010 को 32 लाभार्थियों की सूची सत्यापन रिपोर्ट के साथ केंद्र सरकार को भेजी गई।
विज्ञापन
इनके खिलाफ फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी का मुकदमा चल रहा है। ट्रस्ट को 30 मार्च 2010 को केंद्र सरकार से 71.50 लाख रुपये दिव्यांगों को उपकरण बांटने के लिए मिले थे।
विज्ञापन
इस धनराशि से चार लाख रुपये के उपकरण फर्रुखाबाद में कैंप लगाकर दिव्यांगों को बांटे जाने थे। इस धनराशि का उपभोग प्रमाणपत्र तीन माह में देने का आदेश परियोजना निदेशक व सचिव को दिया गया था।
विज्ञापन
इसके साथ 10 प्रतिशत दिव्यांगों का सत्यापन जिला स्तरीय समिति से कराकर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजनी थी। 3 जून 2010 को 32 लाभार्थियों की सूची सत्यापन रिपोर्ट के साथ केंद्र सरकार को भेजी गई।
केंद्र सरकार के आदेश पर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को सौंपी। निरीक्षक रामशंकर यादव ने जांच की। इसमें पाया कि सूची सत्यापन में तहसीलदार कायमगंज व सीएमओ के पदनाम की मुहर फर्जी है।
29 मई 2010 को कायमगंज में कोई भी कैंप नहीं लगाया गया था। न ही दिव्यांगों को उपकरण बांटे गए थे। इस मामले की कायमगंज कोतवाली में रामशंकर यादव ने 10 जून 2017 को एफआईआर दर्ज कराई थी।
29 मई 2010 को कायमगंज में कोई भी कैंप नहीं लगाया गया था। न ही दिव्यांगों को उपकरण बांटे गए थे। इस मामले की कायमगंज कोतवाली में रामशंकर यादव ने 10 जून 2017 को एफआईआर दर्ज कराई थी।
अनुसंधान संगठन के विवेचक ने 30 दिसंबर 2019 को लुईस खुर्शीद व अतहर फारूखी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट से आरोपियों को समन जारी किए गए थे।
कोर्ट में हाजिर न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। मुकदमे में 16 अगस्त 2021 की तारीख लगाई है।
कोर्ट में हाजिर न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। मुकदमे में 16 अगस्त 2021 की तारीख लगाई है।