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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   No treatment of nose, ear and throat in Lohia for three years, new doctor has not been appointed yet

Farrukhabad: लोहिया में तीन साल से नाक, कान व गले का इलाज नहीं, अब तक नहीं हुई है नए डॉक्टर की तैनाती

Fri, 22 Dec 2023 06:17 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 22 Dec 2023 06:17 PM IST
सार

Farrukhabad News: डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि हर माह शासन को डॉक्टरों समेत अन्य स्टॉफ की रिपोर्ट भेजी जाती है। ईएनटी सर्जन की भी जानकारी शासन को है, जो डॉक्टर नहीं हैं, उनकी फिर से रिपोर्ट भेजेंगे। कुछ डॉक्टर मिलने के संकेत मिल रहे हैं।

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No treatment of nose, ear and throat in Lohia for three years, new doctor has not been appointed yet
जांच करता ऑडियोलॉजिस्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्रुखाबाद जिले में डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में तीन साल से ईएनटी सर्जन का पद रिक्त है। तभी से नाक, कान व गले की बीमारी से परेशान मरीजों को निजी अस्पतालों लूट का शिकार होना पड़ रहा है। अस्पताल में ईएनटी सर्जन संबंधी रोजाना करीब 50 मरीज पहुंच रहे हैं। मगर इन्हें बिना इलाज लौटना पड़ता है।

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लोहिया अस्पताल में अगस्त 2020 तक तैनात रहे ईएनटी सर्जन डॉ. शिखर सक्सेना की संविदा को नवीनीकरण नहीं किया गया। इसके बाद शासन ने इस पद पर किसी अन्य डॉक्टर की तैनाती नहीं की। जबकि उस वक्त अस्पताल में ईएनटी सर्जन के सौ से अधिक मरीज तक आते थे। अभी भी रोजाना 50 मरीज बिना इलाज के ही लौट जाते हैं। ऐसे में निजी अस्पताल में इलाज करने वालों के यहां मोटी रकम खर्च करना मरीजों की मजबूरी है।

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लाखों रुपये से बना श्रवण कक्ष, ऑडियालॉजिस्ट तैनात
अस्पताल में लाखों रुपये खर्च करके साउंड लैस श्रवण कक्ष का निर्माण किया गया था। इसमें कान की जांच करने वाली अत्याधुनिक प्योरटोन ओडोमेटरी मशीन भी लगी है। यही नहीं इसके संचालन के लिए ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी है। श्रवण कक्ष में बैठने वाले ऑडियोलॉजिस्ट नावेद रहमानी ने बताया कि यदि कोई मरीज अपनी कान की जांच कराना चाहता है, तो वह कर देते हैं। ईएनटी सर्जन न होने की वजह से पूरी तरह से लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने में दिक्कत
दिव्यांग बोर्ड में ईएनटी सर्जन भी शामिल होता है। जिले में एक भी ईएनटी सर्जन न होने की वजह से प्रत्येक सोमवार को फतेहगढ़ में लगने वाले दिव्यांग शिविर में आने वाले कान से परेशान लोगों को रेफर कर दिया जाता है। लिहाजा वह दूरदराज जिलों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

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हर माह शासन को डॉक्टरों समेत अन्य स्टॉफ की रिपोर्ट भेजी जाती है। ईएनटी सर्जन की भी जानकारी शासन को है, जो डॉक्टर नहीं हैं, उनकी फिर से रिपोर्ट भेजेंगे। कुछ डॉक्टर मिलने के संकेत मिल रहे हैं।  -डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल

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