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सामने आया ट्रस्ट और एनजीओ का हैरान करने वाला सच, आयकर विभाग कसेगा शिकंजा
Tue, 05 Feb 2019 03:47 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 05 Feb 2019 03:47 PM IST
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आयकर विभाग छूट के नाम पर अनुचित लाभ कमाने वाले ट्रस्टों और एनजीओ संचालकों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। कालेधन के खिलाफ आयकर विभाग का यह अगला कदम होगा। आयकर विभाग के पास इस तरह की सूचनाएं हैं कि बड़ी संख्या में एनजीओ और ट्रस्ट संचालक छूट के नाम पर सरकार को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगा रहे हैं।
कानपुर में अभी आयकर आयुक्त स्तर के कार्यालयों की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले 50-50 बड़े ट्रस्टों का विवरण जुटाया जा रहा है। नवनियुक्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (यूपी पश्चिम एवं उत्तराखंड) प्रमोद कुमार गुप्ता ने इस बात के संकेत दिए हैं।
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कानपुर में अभी आयकर आयुक्त स्तर के कार्यालयों की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले 50-50 बड़े ट्रस्टों का विवरण जुटाया जा रहा है। नवनियुक्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (यूपी पश्चिम एवं उत्तराखंड) प्रमोद कुमार गुप्ता ने इस बात के संकेत दिए हैं।
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उन्होंने बताया कि कानपुर स्थित आयुक्तालय का अतिरिक्त प्रभार होने के साथ ही उनके पास एग्जम्पशन (छूट) विंग की भी जिम्मेदारी है। उनके अनुभव बताते हैं कि 80 फीसदी एनजीओ और ट्रस्टों में कुछ न कुछ गड़बड़ी है।
एक करोड़ से 1000 करोड़ की हैसियत वाले ट्रस्ट और एनजीओ छूट का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। अनुमान के तौर पर देश भर में हर साल ट्रस्ट और एनओजी के पास 25 लाख करोड़ रुपये दान के तौर पर आता है। फिलहाल इसका हिसाब किताब आयकर विभाग के पास नहीं होता।
एक करोड़ से 1000 करोड़ की हैसियत वाले ट्रस्ट और एनजीओ छूट का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। अनुमान के तौर पर देश भर में हर साल ट्रस्ट और एनओजी के पास 25 लाख करोड़ रुपये दान के तौर पर आता है। फिलहाल इसका हिसाब किताब आयकर विभाग के पास नहीं होता।
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इस वजह से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को इस आशय का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है कि ट्रस्टों को मिलने वाली छूट का भी हिसाब किताब रखा जाए। जिस बात के लिए छूट ली जा रही है उस धन का उचित इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।
इन सभी बातों की पड़ताल के लिए दो साल तक व्यापक अभियान चलाए जाने की तैयारी चल रही है। मुख्यालय की मुहर लगते ही ट्रस्ट और एनजीओ भी जांच के दायरे में आएंगे।
इन सभी बातों की पड़ताल के लिए दो साल तक व्यापक अभियान चलाए जाने की तैयारी चल रही है। मुख्यालय की मुहर लगते ही ट्रस्ट और एनजीओ भी जांच के दायरे में आएंगे।