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जिन्हें वाकई जरूरत है, वही 'आयुष्मान' नहीं, सर्वे में गड़बड़ी से वंचित हो गए पात्र
Tue, 02 Jul 2019 11:10 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 02 Jul 2019 11:10 AM IST
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आयुष्मान योजना
- फोटो : सोशल मीडिया
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आयुष्मान योजना का लाभ पाने के लिए इसकी पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है। वहीं विभागीय सर्वे में गड़बड़ी से पात्र योजना से वंचित हो गए। जरूरतमंद लोग इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। पढ़ें खास रिपोर्ट...
केस एक: कुरसौली ब्लाक कल्याणपुर की रानी कमल कहती हैं कि हमें आज तक जानकारी ही नहीं मिल पाई कि कार्ड कैसे बनता है। पति राधेश्याम मजदूरी करते हैं। बड़ी मुश्किल से गुजारा होता है। पति की बीमारी पर तीन हजार रुपये खर्च हो गए। बीपीएल तो हैं, लेकिन आयुष्मान योजना का कार्ड नहीं बन पाया।
केस दो : अमरावती गौतम का कहना है कि हाईब्लड प्रेशर की समस्या है। पति राजाराम मजदूरी करते हैं। कल्याणपुर के निजी नर्सिंग होम में आठ हजार रुपये खर्च हो गए। बीपीएल कार्ड तो बना है, लेकिन आज तक आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
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केस तीन: नौबस्ता के लिवर सिरोसिस के रोगी जगत का कहना है कि वह रिक्शा चलाते रहे हैं। दवा के लिए पैसा नहीं रहा तो सीएमओ कार्यालय प्रार्थनापत्र लेकर गए और भी अधिकारियों के पास रोए। योजना के बारे में किसी ने नहीं बताया। वह 10 साल से रोग की चपेट में हैं। रिश्तेदार मदद करते हैं तब दवा आती है।
आयुष्मान योजना के पात्रता दायरे के मानकों को पूरा करने वाले ये तीन बीपीएल कार्ड धारक तो उदाहरण के लिए बता रहे हैं, ऐसे पात्र लोगों की बड़ी संख्या है, जिन्हें सर्वे में बरती गई लापरवाही की वजह से इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। सर्वे में शामिल कर्मचारियों ने अपात्र लोगों को शामिल कर लिया और पात्र वंचित रह गए। अब इसका नतीजा बिठूर के कुशलपुरवा गांव के कैंसर रोगी राजकुमार की आत्महत्या जैसी घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है। वंचित वर्ग के गरीब रोगी इलाज न करा पाने की वजह से जान देने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य महकमा अब भी निष्क्रिय है।
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केस एक: कुरसौली ब्लाक कल्याणपुर की रानी कमल कहती हैं कि हमें आज तक जानकारी ही नहीं मिल पाई कि कार्ड कैसे बनता है। पति राधेश्याम मजदूरी करते हैं। बड़ी मुश्किल से गुजारा होता है। पति की बीमारी पर तीन हजार रुपये खर्च हो गए। बीपीएल तो हैं, लेकिन आयुष्मान योजना का कार्ड नहीं बन पाया।
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केस दो : अमरावती गौतम का कहना है कि हाईब्लड प्रेशर की समस्या है। पति राजाराम मजदूरी करते हैं। कल्याणपुर के निजी नर्सिंग होम में आठ हजार रुपये खर्च हो गए। बीपीएल कार्ड तो बना है, लेकिन आज तक आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
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केस तीन: नौबस्ता के लिवर सिरोसिस के रोगी जगत का कहना है कि वह रिक्शा चलाते रहे हैं। दवा के लिए पैसा नहीं रहा तो सीएमओ कार्यालय प्रार्थनापत्र लेकर गए और भी अधिकारियों के पास रोए। योजना के बारे में किसी ने नहीं बताया। वह 10 साल से रोग की चपेट में हैं। रिश्तेदार मदद करते हैं तब दवा आती है।
आयुष्मान योजना के पात्रता दायरे के मानकों को पूरा करने वाले ये तीन बीपीएल कार्ड धारक तो उदाहरण के लिए बता रहे हैं, ऐसे पात्र लोगों की बड़ी संख्या है, जिन्हें सर्वे में बरती गई लापरवाही की वजह से इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। सर्वे में शामिल कर्मचारियों ने अपात्र लोगों को शामिल कर लिया और पात्र वंचित रह गए। अब इसका नतीजा बिठूर के कुशलपुरवा गांव के कैंसर रोगी राजकुमार की आत्महत्या जैसी घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है। वंचित वर्ग के गरीब रोगी इलाज न करा पाने की वजह से जान देने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य महकमा अब भी निष्क्रिय है।
योजना की सूची में करोड़पतियों, जनप्रतिनिधियों का नाम आने का मामला उजागर होने के बाद नाम काटे गए। लेकिन पात्रों के नाम नहीं जोड़े गए। इस संबंध में अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. आरपी यादव का कहना है कि आयुष्मान योजना की सूची वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार की गई, जो वंचित बचे हैं, उन्हें राज्य योजना में शामिल किया जाएगा। उन्हें भी आयुष्मान योजना की तरह ही लाभ मिलेगा।
तंगी में कैंसर पीड़ित ने दे दी थी जान
बिठूर के कुशलपुरवा निवासी कैंसर पीड़ित राजकुमार (42) ने 28 जून की रात कुएं में कूदकर जान दे दी थी। राजमिस्त्री का काम करने वाले राजकुमार के पास इतना पैसा नहीं था कि अपना इलाज करा सके। आवेदन के बाद भी न बीपीएल कार्ड बना और न ही आयुष्मान योजना का लाभ मिल पाया। यही वजह रही कि ढाई साल गले के कैंसर से जूझने के बाद उसने जान दे दी।
तंगी में कैंसर पीड़ित ने दे दी थी जान
बिठूर के कुशलपुरवा निवासी कैंसर पीड़ित राजकुमार (42) ने 28 जून की रात कुएं में कूदकर जान दे दी थी। राजमिस्त्री का काम करने वाले राजकुमार के पास इतना पैसा नहीं था कि अपना इलाज करा सके। आवेदन के बाद भी न बीपीएल कार्ड बना और न ही आयुष्मान योजना का लाभ मिल पाया। यही वजह रही कि ढाई साल गले के कैंसर से जूझने के बाद उसने जान दे दी।