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1984 में हुए सिख विरोधी दंगे पर कुलदीप सिंह भोगल का बड़ा बयान

Mon, 11 Feb 2019 08:23 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 11 Feb 2019 08:23 AM IST
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news related to anti sikh riots of 1984
डेमो पिक
कानपुर पहुंचे अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी 1984 के अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगल ने एसआईटी के गठन पर खुशी जताई है। लाजपत नगर स्थित हवेली रेस्टोरेंट में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में उन लोगों की जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया है।
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अब जरूरत है सिख समाज को एकजुट होकर चलने की। गवाहों और रिपोर्ट दर्ज कराने वाले पीड़ितों को खोजकर टीम से मिलवाने की। तभी दंगा पीड़ितों को उचित मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई हो सकेगी। भोगल का दिल्ली से आते समय अर्मापुर गुरुद्वारा में स्वागत भी हुआ। 
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उन्होंने बताया कि एसआईटी में चार लोग हैं। एक सेवानिवृत्त डीजीपी, एक सेवानिवृत्त जज, एक  पुलिस अधीक्षक और एक निदेशक अभियोजन हैं। जांच के लिए छह माह का समय दिया गया है। प्रेसवार्ता में श्री गुरु सिंह सभा लाटूश रोड के प्रधान हरविंदर सिंह लार्ड, मोहकम सिंह, इकबाल सिंह दुआ, जसवंत सिंह, मीतू सागरी, गुरदेव सिंह, अमरजीत सिंह पम्मी, अजीत सिंह भाटिया, अजीत सिंह छाबड़ा, नरेंद्रजीत सिंह मिंटा आदि मौजूद रहे।
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503 फाइलों की जांच होगी
गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब जीटी रोड के वाइस चेयरमैन मोहकम सिंह ने बताया कि दंगे से जुड़ी शहर की कुल 503 फाइलें है। इनमें से 250 फाइलों की जांच-पड़ताल हो चुकी है। शहर में 127 लोग मारे गए थे। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने 5-5 लाख रुपये देने की बात कही थी जो नहीं दिए। मनमोहन सिंह सरकार ने 715 करोड़ रुपये का पैकेज दिया था, उसमें से भी कुछ नहीं मिला है।
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कानपुर में 15 दिनों में हुई थी घटनाएं
श्रीगुरु सिंह सभा लाटूश रोड के प्रधान हरविंदर सिंह लार्ड ने बताया कि शहर के 15 थाना क्षेत्रों में अधिक घटनाएं हुई थी। इसमें सर्वाधिक नौबस्ता में हुई थी। इसके अलावा सबसे कम नजीराबाद में। इन सभी 15 थानों में जाकर दोबारा फाइलें खुलवानी हैं। 
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