फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Netherland will help Ganga cleaning technology

गंगा सफाई में तकनीकी मदद देगा नीदरलैंड

Fri, 18 Sep 2015 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Updated Fri, 18 Sep 2015 01:45 AM IST
विज्ञापन
Netherland will help Ganga cleaning technology
गंगा सफाई अभियान में नीदरलैंड तकनीकी मदद करने के साथ नॉलेज पार्टनर भी बनेगा। इसके लिए नीदरलैंड की टीम ने गुरुवार को जाजमऊ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, टेनरी का कामकाज और सीसामऊ नाले से गंगा में गंदगी गिरते देखी और गंगा सफाई के लिए अफसरों से मंत्रणा की।
विज्ञापन


डच दूतावास की वरिष्ठ सलाहकार माया आचार्य ने बताया कि यहां देखने आए हैं कि गंगा की सफाई के लिए क्या-क्या संभावनाएं हैं। कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी में से इसी शहर में सबसे ज्यादा जोर है। डच सरकार यहां निकल रहे टेनरी वेस्ट, सीवरेज के निस्तारण से लेकर गंगा की सफाई के लिए अत्याधुनिक तकनीकी उपलब्ध कराएगी। वाटर मैनेजमेंट में सहयोग करेगी। नॉलेज पार्टनर भी बनेगी।
विज्ञापन


हम चाहते हैं गंगा बेहतर हो, यह कैसे हो सकती है, इसकी प्लानिंग करेंगे। जून माह में डच प्रधानमंत्री रूट दिल्ली आए थे, तब प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे गंगा सफाई और वेस्ट वाटर मैनेजमेंट में सहयोग मांगा था। इसी पहल पर टीम यहां आई।
विज्ञापन
विज्ञापन


डच काउंसलर जेडब्लू लिस्डॉन, जॉ मॉस, एच हंस क्यूपर, बर्ट जेरॉन, नीदरलैंड दूतावास की वरिष्ठ सलाहकार माया आचार्य, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के सलाहकार अवध नरेश गुप्ता समेत सात सदस्यीय टीम ने पहले गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों के साथ बैठक कर टेनरियों से निकलने वाले वाले क्रोमियमयुक्त जहरीले पानी और सीवरेज वेस्ट के निस्तारण, गंगा की स्थिति की जानकारी ली।

इसके बाद सुबह करीब 9:30 बजे टीम जाजमऊ स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पहुंची। अफसरों ने टीम को 110 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली), 36 एमएलडी और पांच एमएलडी के प्लांट दिखाए। इनकी तकनीकी बताई।

टीम ने सबसे ज्यादा समय 36 एमएलडी प्लांट में दिया। बताया गया कि इस प्लांट में नौ एमएलडी टेनरी वेस्ट और 27 एमएलडी सीवरेज का संयुक्त रूप से शोधन किया जाता है। टेनरी वेस्ट में क्रोमियम की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि इससे निकलने वाले स्लज में भी यह मौजूद रहता है। प्लांट पूरी क्षमता से न चल पाने के सवाल पर अफसरों ने इसकी वजह प्लांट और लाइनें पुरानी होना बताया।

टीम 11 बजे जाजमऊ स्थित सुपर टेनरी में पहुंची। टेनरी में चमड़ा तैयार करने से लेकर प्राइमरी ट्रीटमेंट प्लांट और वहां से एसटीपी में टेनरी वेस्ट जाते देखा। दोपहर करीब 11:51 बजे टीम वीआईपी रोड के पास शहर के सबसे बड़े नाले (सीसामऊ नाला) के पास पहुंची। नाले का पानी तेज बहाव के साथ गंगा में गिरते देखा।


गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक एके गुप्ता ने बताया कि इस नाले से रोज 140 एमएलडी सीवेज वेस्ट गंगा में जा रहा है। सुबह और शाम गंदे पानी का फ्लो ज्यादा रहता है। गंगा बैराज का जायजा लेते हुए टीम लखनऊ चली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed