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ओएफसी धमाकाः नहीं लिखाई गई रिपोर्ट, अब तक तीन अफसरों की हो चुकी है मौत, कई और खुलासे

Thu, 09 May 2019 12:22 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 09 May 2019 12:22 AM IST
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Negligence in OFC kanpur blast case
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री धमाका (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर (ओएफसी) में हुए धमाके को एक महीना बीत गया है लेकिन अभी तक धमाके के कारणों की जांच पूरी नहीं हो पाई है। लापरवाही का यह आलम है कि हादसे की अब तक एफआईआर तक पुलिस में नहीं दर्ज कराई गई है। लगातार मामले को दबाया जा रहा है। हादसे में अब तक तीन अफसरों की मौत हो चुकी है। 
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निर्माणी में 9 अप्रैल को एलएफजी (लाइट फील्ड गन) को टेस्टिंग के लिए तैयार करते समय उसमें लगे नाइट्रोजन और ऑयल सिलेंडर फटने से सहायक इंजीनियर मोहन सिंह राजपूत और एग्जामिनर एमपी महतो के अलावा इंजीनियर पंकज श्रीवास्तव की मौत हो गई थी।
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अफसरों के सामने कुछ भी न बोलने का दबाव भी बनाए हुए हैं

सूत्रों ने बताया कि हादसे के बाद आयुध निर्माणी बोर्ड की ओर से गठित चार सदस्यीय हाई पावर कमेटी के अलावा डायरेक्टर जनरल क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) जबलपुर की टीम ने ब्रिगेडियर रवि भारद्वाज की अगुवाई में हादसे की जांच की थी। इसके अलावा निर्माणी से जुड़ी डीजीक्यूए की टीम अभी भी जांच कर रही है।
 

 

सूत्रों ने बताया कि हादसे के पांचवें दिन ही हादसा स्थल में पड़े खून, कैरिज, सिलेंडरों के फटने के अवशेषों आदि को हटा दिया गया था। पूरे स्थल की पानी से सफाई की गई थी। इससे अब भी कई सवाल खड़े हैं। यहीं नही हादसे में मृतक के परिजनों को भी अभी तक कोई राहत राशि या नौकरी आदि नहीं दी गई है। सूत्रों ने बताया कि जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।

 

बताया कि हादसे के लिए जिम्मेदार अफसरों को बचाने के लिए ही अब तक कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई गई। इसके चलते मृतक के परिजनों को कोई बीमा आदि का लाभ भी नहीं मिल सकेगा। बताया गया कि मृतक के परिजनों को मृतक आश्रित के नाम पर नौकरी दिलाने की बातें कहकर जांच अफसरों के सामने कुछ भी न बोलने का दबाव भी बनाए हुए हैं।

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