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Kanpur News: मेडिकल कॉलेज में अनदेखी, एक बेड पर दो मरीज
Sun, 06 Sep 2026 01:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:26 AM IST
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कानपुर देहात। स्वाइन फ्लू के बढ़ते खतरे के बीच मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मरीजों की बढ़ती संख्या के सामने व्यवस्थाएं बेपटरी हैं। बुखार और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ने से इमरजेंसी में बेड कम पड़ रहे हैं। शनिवार को एक बेड पर दो-दो मरीज उपचार के लिए लेटे मिले। जिम्मेदार बेड की व्यवस्था करने की बात कह रहे हैं।
माैसम में हुए बदलाव के बाद वायरल बुखार के मरीज बढ़े हैं। शनिवार को मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए 1565 मरीज पहुंचे। ओपीडी में पंजीकरण से लेकर दवा वितरण कक्ष के बाहर तक लंबी लाइन नजर आई। कुछ मरीजों को भर्ती होने की लिए सलाह दी गई जबकि कुछ सीधे इमरजेंसी पहुंचे। जिन्हें कई दिन से बुखार आ रहा था। इन मरीजों को भी भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
शनिवार को मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीज लेटे मिले। इनमें बुखार के साथ अन्य बीमारियों से ग्रसित लोग भी थे। एक ही बेड पर अलग-अलग बीमारी से पीड़ित मरीजों का उपचार होने से मरीजों और तीमारदारों में भी चिंता है। स्वाइन फ्लू जैसे संक्रामक रोग के खतरे के बीच इमरजेंसी में इस तरह की व्यवस्था अस्पताल प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है। वहीं ओपीडी में पंजीकरण से लेकर दवा वितरण काउंटर तक सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो रहा है।
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भीड़ में कई लोग बिना मास्क के भी नजर आए। मरीजों का कहना है कि संक्रमण के खतरे को देखते हुए इमरजेंसी में बेड बढ़ाने और वायरल रोगियों व अन्य मरीजों के लिए अलग व्यवस्था करने की जरूरत है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन की ओर से खतरे को देखते हुए वायरल रोगियों की ओपीडी को नये भवन से पुराने भवन में शिफ्ट करने का कार्य शुरू किया गया है। ओपीडी शिफ्ट होने के बाद यह खतरा काफी हद तक कम हो सकेगा।
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केस-1
हथूमा निवासी रूबी व उनका बेटा एक ही बेड पर लेटकर उपचार करवाते मिले। रूबी ने बताया कि बेटे को करीब 10 दिन से बुखार आ रहा है। पूर्व में उन्होंने बेटे को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया था। आराम मिलने पर घर ले गई थीं। दो दिन पहले उन्हें भी बुखार आ गया और शुक्रवार को बेटे की दोबारा से तबीयत बिगड़ जाने पर दोनों मेडिकल कॉलेज आए थे। यहां डॉक्टर ने उनको भर्ती कर लिया। वार्ड में बेड कम होने पर दोनों को एक ही बेड पर लेट कर इलाज करवाना पड़ रहा है।
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केस-2
अकबरपुर निवासी ज्योति ने बताया कि उन्हें दो दिन से बुखार आ रहा था। शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज में दिखाने पर डॉक्टर ने उन्हें भर्ती होने के लिए कहा। वार्ड में जगह न होने के चलते उन्हें मल्लाहनपुरवा रसूलाबाद निवासी सौम्या 12 के साथ एक ही बेड पर लेटकर उपचार करवाना पड़ रहा है। सौम्या की मां रजनी ने बताया कि बेटी शुक्रवार रात को सीढ़ियों से गिरकर घायल हो गई थीं। इमरजेंसी वार्ड में वायरल रोगी के साथ बेड साझा करने पर बेटी को बुखार आने की आशंका बनी हुई है।
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बयान...
मौसम में बदलाव के साथ बुखार रोगियों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी होने पर इमरजेंसी वार्ड में कुछ बेड पर दो मरीजों को लिटाना पड़ा है। अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए वायरल रोगियों की ओपीडी को पुराने भवन में र शिफ्ट करने के साथ अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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माैसम में हुए बदलाव के बाद वायरल बुखार के मरीज बढ़े हैं। शनिवार को मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए 1565 मरीज पहुंचे। ओपीडी में पंजीकरण से लेकर दवा वितरण कक्ष के बाहर तक लंबी लाइन नजर आई। कुछ मरीजों को भर्ती होने की लिए सलाह दी गई जबकि कुछ सीधे इमरजेंसी पहुंचे। जिन्हें कई दिन से बुखार आ रहा था। इन मरीजों को भी भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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शनिवार को मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीज लेटे मिले। इनमें बुखार के साथ अन्य बीमारियों से ग्रसित लोग भी थे। एक ही बेड पर अलग-अलग बीमारी से पीड़ित मरीजों का उपचार होने से मरीजों और तीमारदारों में भी चिंता है। स्वाइन फ्लू जैसे संक्रामक रोग के खतरे के बीच इमरजेंसी में इस तरह की व्यवस्था अस्पताल प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है। वहीं ओपीडी में पंजीकरण से लेकर दवा वितरण काउंटर तक सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो रहा है।
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भीड़ में कई लोग बिना मास्क के भी नजर आए। मरीजों का कहना है कि संक्रमण के खतरे को देखते हुए इमरजेंसी में बेड बढ़ाने और वायरल रोगियों व अन्य मरीजों के लिए अलग व्यवस्था करने की जरूरत है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन की ओर से खतरे को देखते हुए वायरल रोगियों की ओपीडी को नये भवन से पुराने भवन में शिफ्ट करने का कार्य शुरू किया गया है। ओपीडी शिफ्ट होने के बाद यह खतरा काफी हद तक कम हो सकेगा।
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केस-1
हथूमा निवासी रूबी व उनका बेटा एक ही बेड पर लेटकर उपचार करवाते मिले। रूबी ने बताया कि बेटे को करीब 10 दिन से बुखार आ रहा है। पूर्व में उन्होंने बेटे को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया था। आराम मिलने पर घर ले गई थीं। दो दिन पहले उन्हें भी बुखार आ गया और शुक्रवार को बेटे की दोबारा से तबीयत बिगड़ जाने पर दोनों मेडिकल कॉलेज आए थे। यहां डॉक्टर ने उनको भर्ती कर लिया। वार्ड में बेड कम होने पर दोनों को एक ही बेड पर लेट कर इलाज करवाना पड़ रहा है।
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केस-2
अकबरपुर निवासी ज्योति ने बताया कि उन्हें दो दिन से बुखार आ रहा था। शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज में दिखाने पर डॉक्टर ने उन्हें भर्ती होने के लिए कहा। वार्ड में जगह न होने के चलते उन्हें मल्लाहनपुरवा रसूलाबाद निवासी सौम्या 12 के साथ एक ही बेड पर लेटकर उपचार करवाना पड़ रहा है। सौम्या की मां रजनी ने बताया कि बेटी शुक्रवार रात को सीढ़ियों से गिरकर घायल हो गई थीं। इमरजेंसी वार्ड में वायरल रोगी के साथ बेड साझा करने पर बेटी को बुखार आने की आशंका बनी हुई है।
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बयान...
मौसम में बदलाव के साथ बुखार रोगियों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी होने पर इमरजेंसी वार्ड में कुछ बेड पर दो मरीजों को लिटाना पड़ा है। अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए वायरल रोगियों की ओपीडी को पुराने भवन में र शिफ्ट करने के साथ अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज