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जिताऊ दावेदार तलाश रहीं नमो की खुफिया टीमें
पंकज प्रसून, कानपुर
Updated Sun, 04 Sep 2016 05:26 PM IST
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बीजेपी
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यूपी में भाजपा की सरकार बनाने के लिए नरेंद्र मोदी (नमो) की खुफिया टीमें लगा दी गई हैं। टीमों के सदस्य पूरे प्रदेश में भाजपाइयों के साथ दूसरी पार्टियों की गतिविधियों पर निगाह रखे हुए हैं। पूरा जोर मिशन यूपी के लिए योग्य उम्मीदवारों पर है। यही वजह है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के पास अच्छे उम्मीदवार नहीं हैं, वहां दूसरी पार्टियों के दमदार नेताओं, खासकर वर्तमान विधायकों को पार्टी अपनी तरफ खींचने में लगी है। बताया जा रहा है कि खुफिया टीमें सीधे नरेंद्र मोदी और अमित शाह को रिपोर्ट करती हैं। भाजपा मिशन यूपी 2017 चुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव को आधार बनाकर लड़ने की तैयारी में जुटी है। यह योजना प्रधानमंत्री और पार्टी के मुख्य कर्ताधर्ता नरेंद्र मोदी के निर्देशन में बनाई जा चुकी है। कहा जा रहा है कि यह लड़ाई जीतने के लिए पार्टी हर तरह की रणनीति इस्तेमाल करेगी। यही वजह है कि टीम गुपचुप तरीके से जमीनी स्तर पर पड़ताल में जुटी है। पड़ताल करने वाली टीम के मुख्य सदस्य गुजरात से हैं, जो पहले भी नरेंद्र मोदी के विधानसभा चुनावों में इस तरह का काम करते आए हैं। नमो की इस खुफिया रणनीति से खुद भाजपाई भी भौचक हैं। मजे की बात यह है कि यह टीमें अपनी पड़ताल में भाजपाइयों को भनक भी नहीं लगने दे रही हैं।
इस तरह से हो रही पड़ताल
नमो की टीमें यूपी में दो दौर की पड़ताल कर रही हैं। पहले दौर में यह देखा जा रहा है कि किस विधानसभा में जातिगत वोट कितना है। हिंदू और मुस्लिम का समीकरण भी साथ लेकर चला जा रहा है। साथ ही दलित वोट का आंकलन भी किया जा रहा है। दूसरी पड़ताल में भाजपा और दूसरी पार्टी के उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन विधानसभावार किया जा रहा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि किस विधानसभा में भाजपा का कौन नेता जीतने की स्थिति में हैं। इसमें वर्तमान विधायकों को भी देखा जा रहा है। टीम की रिपोर्ट में यदि किसी विधानसभा में पार्टी को कोई दमदार उम्मीदवार नजर नहीं आ रहा है तो साफ निर्देश है कि दूसरी पार्टी का जिताऊ नेता शामिल किया जाए। पिछले दिनों पार्टी में शामिल किए गए कुछ दमदार नेता इसी प्रक्रिया के तहत पार्टी में लाए गए हैं।
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इस तरह से हो रही पड़ताल
नमो की टीमें यूपी में दो दौर की पड़ताल कर रही हैं। पहले दौर में यह देखा जा रहा है कि किस विधानसभा में जातिगत वोट कितना है। हिंदू और मुस्लिम का समीकरण भी साथ लेकर चला जा रहा है। साथ ही दलित वोट का आंकलन भी किया जा रहा है। दूसरी पड़ताल में भाजपा और दूसरी पार्टी के उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन विधानसभावार किया जा रहा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि किस विधानसभा में भाजपा का कौन नेता जीतने की स्थिति में हैं। इसमें वर्तमान विधायकों को भी देखा जा रहा है। टीम की रिपोर्ट में यदि किसी विधानसभा में पार्टी को कोई दमदार उम्मीदवार नजर नहीं आ रहा है तो साफ निर्देश है कि दूसरी पार्टी का जिताऊ नेता शामिल किया जाए। पिछले दिनों पार्टी में शामिल किए गए कुछ दमदार नेता इसी प्रक्रिया के तहत पार्टी में लाए गए हैं।
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