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थाने में हत्या, दरोगा-सिपाही बरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2016 01:51 AM IST
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प्रतीकात्मक
- फोटो : symbolc
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हिरासत में पीट-पीटकर युवक की हत्या के आरोप में तत्कालीन रेलबाजार थानाध्यक्ष जेबी पांडेय, दो सिपाही और एक अन्य व्यक्ति को एडीजे उदय प्रताप सिंह की कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। दो गवाह कोर्ट में मुकर गए थे। ट्रायल के दौरान यह साबित नहीं हो सका कि पुलिस ने युवक को हिरासत में लिया था।
बाबूपुरवा निवासी शारदा देवी ने तत्कालीन थानाध्यक्ष जेबी पांडेय, सिपाही राजेश कुमार दीक्षित, सिपाही अरुण उपाध्याय और अजय गौड़ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि चार मार्च 2010 को रेलबाजार पुलिस उसके पति मुकेश कुमार गुप्ता को पूछताछ के लिए ले गई थी। पांच मार्च को वह थाने गई तो कहा गया कि पूछताछ के बाद पति को छोड़ दिया जाएगा। अगले दिन फिर गई तो कहा गया कि पुलिस उसके पति को थाने लाई ही नहीं है।
13 मार्च को मुकेश कुमार गुप्ता का शव कानपुर देहात के अकबरपुर में मिला था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता आदित्य दुबे ने बताया कि इस मामले यह साबित नहीं हो सका कि मुकेश कुमार गुप्ता को रेलबाजार पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसलिए कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया। जेबी पांडेय वर्तमान में लखनऊ में तैनात हैं।
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प्रोन्नत दरोगा और ड्यूटी आफीसर छेदीलाल संखवार, सिपाही धर्मेंद्र और दत्ताराम ने कोर्ट में कहा कि घटना वाले दिन हवालात में दो लोग लिखापढ़ी में और तीन लोग बिना लिखापढ़ी के बंद थे। एसओ ने कहा था कि इन लोगों से पूछताछ के बाद लिखापढ़ी होगी। रात 12 बजे हवालात से चिल्लाने की आवाज आई। बताया गया कि एक व्यक्ति हवालात के शौचालय में काफी देर पहले गया था।
न लौटने पर आवाज दी जा रही है लेकिन बोल नहीं रहा है। हवालात का ताला खोलकर देखा तो शौचालय में मुकेश कुमार तहमद से शौचालय की जाली से लटका मिला। सूचना देने पर एसओ एक प्राइवेट व्यक्ति के साथ आए। मुकेश कुमार को उतारा तो देखा कि उसकी सांसें चल रहीं थी। एसओ इलाज कराने की बात कहते हुए उसे प्राइवेट व्यक्ति के साथ कार से ले गए।
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बाबूपुरवा निवासी शारदा देवी ने तत्कालीन थानाध्यक्ष जेबी पांडेय, सिपाही राजेश कुमार दीक्षित, सिपाही अरुण उपाध्याय और अजय गौड़ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि चार मार्च 2010 को रेलबाजार पुलिस उसके पति मुकेश कुमार गुप्ता को पूछताछ के लिए ले गई थी। पांच मार्च को वह थाने गई तो कहा गया कि पूछताछ के बाद पति को छोड़ दिया जाएगा। अगले दिन फिर गई तो कहा गया कि पुलिस उसके पति को थाने लाई ही नहीं है।
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13 मार्च को मुकेश कुमार गुप्ता का शव कानपुर देहात के अकबरपुर में मिला था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता आदित्य दुबे ने बताया कि इस मामले यह साबित नहीं हो सका कि मुकेश कुमार गुप्ता को रेलबाजार पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसलिए कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया। जेबी पांडेय वर्तमान में लखनऊ में तैनात हैं।
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प्रोन्नत दरोगा और ड्यूटी आफीसर छेदीलाल संखवार, सिपाही धर्मेंद्र और दत्ताराम ने कोर्ट में कहा कि घटना वाले दिन हवालात में दो लोग लिखापढ़ी में और तीन लोग बिना लिखापढ़ी के बंद थे। एसओ ने कहा था कि इन लोगों से पूछताछ के बाद लिखापढ़ी होगी। रात 12 बजे हवालात से चिल्लाने की आवाज आई। बताया गया कि एक व्यक्ति हवालात के शौचालय में काफी देर पहले गया था।
न लौटने पर आवाज दी जा रही है लेकिन बोल नहीं रहा है। हवालात का ताला खोलकर देखा तो शौचालय में मुकेश कुमार तहमद से शौचालय की जाली से लटका मिला। सूचना देने पर एसओ एक प्राइवेट व्यक्ति के साथ आए। मुकेश कुमार को उतारा तो देखा कि उसकी सांसें चल रहीं थी। एसओ इलाज कराने की बात कहते हुए उसे प्राइवेट व्यक्ति के साथ कार से ले गए।