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संगीत और राग ने कानों में घोला फाग
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 05 Mar 2015 02:54 AM IST
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बुधवार को लाजपत भवन के मंच पर सुर-ताल की लहरियों और संगीत विभूतियों की साधना का सुंदर समागम देखने और सुनने को मिला। ये मौका ‘स्मृति’ साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था के 35वें वार्षिक संगीत समारोह का था।
‘अमर उजाला’ के सहयोग से आयोजित यह समारोह साहित्य प्रेमी एवं संगीत साधक स्वर्गीय मुन्नू गुरु की स्मृति में आयोजित किया गया था। इस मंच पर जहां बनारस घराने के पद्मभूषण गायक पंडित राजन-साजन मिश्र की गायकी के रंग चमके वहीं, उस्ताद सुजात खान के सितार वादन ने कनपुरियों के कान में फाग का रंग घोल दिया।
समारोह के इसी मंच पर पंडित राजन-साजन मिश्र को 21 किलो फूल की माला पहना कर पुष्प वर्षा के साथ ‘मुन्नू गुरु संगीत एवार्ड’ और शहर के वयोवृद्ध फौजदारी वकील श्रीतिलक को ‘मुन्नू गुरु स्मृति एवार्ड’ से नवाजा गया।
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समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेयर कैप्टन जगतवीर सिंह द्रोण, समारोह अध्यक्ष पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और आरटीओ कानपुर नगर वीके सोनकिया ने भगवान श्रीगणेश के समक्ष दीप जलाकर किया। इसके बाद स्वर्गीय मुन्नू गुरु के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।
अतिथियों ने डीआईजी एन चौधरी व पंडित राजन-साजन और श्रीतिलक के सम्मान साथ संस्था की स्मारिका का विमोचन भी किया। समारोह का आरंभ शंख ध्वनि के साथ शहर के गायक विजय कुमार मेहरोत्रा की वाणी वंदना ‘स्वयं सिद्ध स्वरूप’ से हुआ।
इनके साथ तबले पर शहर के तबला वादक ओम प्रकाश तिवारी और हारमोनियम पर गोपाल पाठक ने संगत की। समारोह की अगली कड़ी में सबसे पहले सितार वादन के ‘इमदाद’ घराने के उस्ताद सुजात खान ने सुंदर सितार वादन किया।
उन्होंने राग ‘यमन कल्याण’ में गजखानी और मसीत खानी बजायी। कई शेर सुनाए। इसके बाद गजल ‘मैं पिया से नजरें मिलाय आई’ सुनाई और बजायी भी। उनके ‘दादरा’ पर संगीत प्रेमी वारी गए। इनके साथ दिल्ली के अमजद खान और कोलकाता के संदीप घोष ने तबले पर बेहतरीन जुगलबंदी और सात-संगत पेश की।
इसके बाद पंडित राजन साजन ने गायन पेश किया। उन्होंने राग नंद में बड़ा ख्याल, विलंबित लय एकताल में मोरे बाले छइयां...बंदिश सुनाई। इनके साथ हारमोनियम पर लखनऊ के पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर बनारस के राजेश मिश्र ने सुंदर संगत किया।
समारोह का आयोजन संस्था के अध्यक्ष एपी सिंह, संयोजक राजेंद्र मिश्र, अरुण मिश्रा, सर्वांग, रवि शुक्ला, निर्मल, नरेंद्र और स्मृति परिवार ने किया। संचालन कपिल बाजपेयी और वंदना देवराय ने किया।
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‘अमर उजाला’ के सहयोग से आयोजित यह समारोह साहित्य प्रेमी एवं संगीत साधक स्वर्गीय मुन्नू गुरु की स्मृति में आयोजित किया गया था। इस मंच पर जहां बनारस घराने के पद्मभूषण गायक पंडित राजन-साजन मिश्र की गायकी के रंग चमके वहीं, उस्ताद सुजात खान के सितार वादन ने कनपुरियों के कान में फाग का रंग घोल दिया।
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समारोह के इसी मंच पर पंडित राजन-साजन मिश्र को 21 किलो फूल की माला पहना कर पुष्प वर्षा के साथ ‘मुन्नू गुरु संगीत एवार्ड’ और शहर के वयोवृद्ध फौजदारी वकील श्रीतिलक को ‘मुन्नू गुरु स्मृति एवार्ड’ से नवाजा गया।
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समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेयर कैप्टन जगतवीर सिंह द्रोण, समारोह अध्यक्ष पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और आरटीओ कानपुर नगर वीके सोनकिया ने भगवान श्रीगणेश के समक्ष दीप जलाकर किया। इसके बाद स्वर्गीय मुन्नू गुरु के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।
अतिथियों ने डीआईजी एन चौधरी व पंडित राजन-साजन और श्रीतिलक के सम्मान साथ संस्था की स्मारिका का विमोचन भी किया। समारोह का आरंभ शंख ध्वनि के साथ शहर के गायक विजय कुमार मेहरोत्रा की वाणी वंदना ‘स्वयं सिद्ध स्वरूप’ से हुआ।
इनके साथ तबले पर शहर के तबला वादक ओम प्रकाश तिवारी और हारमोनियम पर गोपाल पाठक ने संगत की। समारोह की अगली कड़ी में सबसे पहले सितार वादन के ‘इमदाद’ घराने के उस्ताद सुजात खान ने सुंदर सितार वादन किया।
उन्होंने राग ‘यमन कल्याण’ में गजखानी और मसीत खानी बजायी। कई शेर सुनाए। इसके बाद गजल ‘मैं पिया से नजरें मिलाय आई’ सुनाई और बजायी भी। उनके ‘दादरा’ पर संगीत प्रेमी वारी गए। इनके साथ दिल्ली के अमजद खान और कोलकाता के संदीप घोष ने तबले पर बेहतरीन जुगलबंदी और सात-संगत पेश की।
इसके बाद पंडित राजन साजन ने गायन पेश किया। उन्होंने राग नंद में बड़ा ख्याल, विलंबित लय एकताल में मोरे बाले छइयां...बंदिश सुनाई। इनके साथ हारमोनियम पर लखनऊ के पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर बनारस के राजेश मिश्र ने सुंदर संगत किया।
समारोह का आयोजन संस्था के अध्यक्ष एपी सिंह, संयोजक राजेंद्र मिश्र, अरुण मिश्रा, सर्वांग, रवि शुक्ला, निर्मल, नरेंद्र और स्मृति परिवार ने किया। संचालन कपिल बाजपेयी और वंदना देवराय ने किया।