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Kanpur News: शहर में तीन हजार से ज्यादा अवैध होर्डिंग, अफसरों की आंखें बंद

Mon, 16 Jun 2025 01:53 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 Jun 2025 01:53 AM IST
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More than three thousand illegal hoardings in the city, officers turn a blind eye
चाैराहे पर लगी होर्डिंग। - फोटो : संवाद
कानपुर। शहर भर में चाैराहों समेत सड़कों के किनारे फुटपाथ पर बांस-बल्लियों और एंगल के सहारे तीन हजार से ज्यादा होर्डिंग लगी हैं। खास बात है कि ये सारी अवैध हैं। इनसे हादसों का भी खतरा है। सुविधा शुल्क के खेल में नगर निगम अफसर इन्हें हटाने के बजाय आंखें बंद किए हैं। निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
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नगर निगम ने राज्यपाल की स्वीकृति के बाद 2021 में नई विज्ञापन नियमावली लागू की थी। इसके अनुसार फुटपाथ सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर दो पायों वाली होर्डिंग लगाने पर रोक है। ऐसी होर्डिंग शर्तों के अनुसार निजी भवनों में ही लग सकती हैं। चौराहों से 50 मीटर की दूरी तक विज्ञापन पट लगाना प्रतिबंधित है। बांस-बल्लियों, एंगल के सहारे होर्डिंग्स की भी अनुमति नहीं है। हालांकि यह नियमावली फाइलों में ही बंद है। कहीं इसका पालन होता नहीं दिखता। निगम के अफसरों की मिलीभगत से अवैध रूप से होर्डिंग्स लगाई गई हैं।
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जाजमऊ, नौबस्ता, भौंती समेत शहर के अन्य प्रवेश द्वारों से लेकर चमनगंज, कोपरगंज जैसी घनी आबादी वाले मोहल्लों में तीन हजार से ज्यादा अवैध होर्डिंगें लगी हैं। इनमें करीब 20 प्रतिशत में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के चेहरे, नाम नजर आते हैं। सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं की सर्वाधिक होर्डिंग, बोर्ड आदि लगे हैं। अन्य का व्यावसायिक ताैर पर उपयोग कर विज्ञापन एजेंसियां करोड़ों रुपये कमा रही हैं। तमाम होर्डिंग कमजोर बांस-बल्लियों या पोलों पर लगी हैं। आंधी-पानी में इनके गिरने का खतरा बना रहता है। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक अवैध होर्डिंग के लिए दो से लेकर पांच हजार रुपये तक सुविधा शुल्क वसूला जाता है। यही वजह है कि इन्हें तोड़ा या हटाया नहीं जाता। खानापूरी और कार्रवाई के नाम पर वही अवैध होर्डिंग्स तोड़ी जाती हैं, जिनसे सुविधा शुल्क नहीं मिलता है।
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अवैध होर्डिंगें हटाने के लिए जल्द ही वृहद स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। शहर भर से अवैध होर्डिंग हटाई जाएंगी।
- विनय प्रताप सिंह, प्रभारी अधिकारी विज्ञापन, नगर निगम


ये है नई विज्ञापन नियमावली
वर्ष 2021 में लागू हुई नई विज्ञापन नियमावली में शहर को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें से प्रवर श्रेणी में विज्ञापन पट लगाने का सर्वाधिक शुल्क है। इसके अलावा ए, बी और सी श्रेणियां हैं।

प्रवर श्रेणी
इस श्रेणी में स्वरूपनगर, मुरे कंपनी पुल से माल रोड पर मेघदूत तिराहा, सिविल लाइंस में आदर्श व्यायामशाला से कचहरी चौराहा, जीटी रोड पर रामादेवी से आईआईटी, गुमटी, कल्याणपुर क्रासिंग से अर्मापुर आदि क्षेत्र आते हैं।

ए-श्रेणी के मोहल्ले
एक्सप्रेस रोड, घंटाघर से टाटमिल चौराहा, बाकरगंज से किदवईनगर चौराहा, रामादेवी चौराहा और उसके आसपास का क्षेत्र, जरीबचौकी रेलवे क्रासिंग से फजलगंज चौराहा, मरियमपुर हॉस्पिटल से कोकाकोला चौराहा आदि।
बी-श्रेणी के मोहल्ले
अहिरवां, सनिगवां, कोयलानगर, पोखरपुर, अवधपुरी मोड़ से सेल्सटैक्स रोड, कंपनीबाग चौराहे से रामचंद्र चौराहा, चिड़ियाघर से एचबीटीयू गेट, बंबा रोड, कल्याणपुर आदि।

सी-श्रेणी के मोहल्ले
प्रवर, ए एवं बी से बचीं सभी आंतरिक सड़कें।


नगर निगम में ली जाने वाली विज्ञापन पटों की दरें (सालाना) विज्ञापनपट का प्रकार श्रेणी प्रवर में प्रति वर्गमीटर श्रेणी ए श्रेणी बी श्रेणी सी
होर्डिंग 3200 रुपये 2400 रुपये 2000 रुपये 1600 रुपये यूनिपोल 5000 रुपये 4000 रुपये 3000 रुपये 2000 रुपये
बस शेल्टर, पुलिस बूथ 6000 5000 रुपये 4000 रुपये 3000 रुपये
कैटीलिवर, गैंट्री 6000 5000 रुपये 4000 रुपये 3000 रुपये


ये हैं प्रतिबंधित क्षेत्र
फुटपाथ, सरकारी भवन, दीवारें, उद्यान की दीवारें।
नोट- फुटपाथ पर डायरेक्शन (रेट्रो) बोर्ड लगाने की ही अनुमति दी जा सकती है। रेडियम पेंट से बनने वाले इन बोर्डों में रेडियम पेंट से नाम, दूरी अंकित होने के साथ ही एरो बनाया जाता है। इनका शुल्क क्रमश: प्रवर, ए, बी, सी श्रेणी में 3200 रुपये, 2400, 2000, 1600 रुपये प्रति वर्गमीटर है।


पांच करोड़ का लक्ष्य, वसूली सिर्फ 3.28 करोड़
नगर निगम ने पिछले वित्तीय वर्ष में विज्ञापन मद में पांच करोड़ से ज्यादा वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन मात्र 3.28 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई। इसमें भी पिछले वित्तीय वर्षों के करीब ढाई करोड़ रुपये शामिल हैं। उससे पहले इस मद में नगर निगम को एक साल में मात्र 90 लाख रुपये राजस्व मिला था। चालू वित्तीय वर्ष में भी इस मद में पांच करोड़ से ज्यादा वसूली का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन इस बार भी लक्ष्य पूरा न हो पाने की आशंका जताई जा रही है।
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