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मोरारी बापू ने युवाअों को बताए सुखी दांपत्य के सूत्र, कहा पहले शादी करो फिर 'ये सब'

Sat, 04 Aug 2018 04:23 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 04 Aug 2018 04:23 PM IST
सार

- राम कथा के 7वें दिन बापू ने युवाओं को बताए सुखी दांपत्य के सूत्र
- बापू ने कहा पहले शादी करो कथा सुनने बाद में आना

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Morari Bapu statement about youth
मोरारी बापू - फोटो : अमर उजाला
संत और कथा वाचक मोरारी बापू ने युवाओं को सुखी दांपत्य के सूत्र बताए। कहा कि पहले शादी करो, कथा सुनने बाद में आना। युवाओं से मेरी गुजारिश है कि अगर घर में कभी झगड़ा हो तो रात को सोने से पहले सुलझा लेना।
Morari Bapu statement about youth
मोरारी बापू की रामकथा
कानपुर में चल रही राम कथा के 7वें दिन मोरारी बापू ने कहा कि यह राम कथा नहीं, प्रेम यज्ञ है। शहर में प्रेम के यज्ञ का आयोजन हुआ है। बापू ने सदगुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि जो विमुख को भी राम के सम्मुख कर दे, वही बुद्ध पुरुष है। सदगुरु इस बात का ध्यान रखता है कि साधक को किस के सम्मुख करना है। राम प्रेम, सत्य, करुणा हैं। बापू ने कहा सदगुरु को कभी-कभी झूठ बोलना पड़ता है पर वह ऐसा अपने शिष्यों को सही रास्ते पर लाने के लिए करता है। सदगुरु तो सत्य का स्वरूप होता है। वह असत्य कैसे बोल सकता है। बापू ने कहा पहले तो खूब उलझो फिर सुलझने में मजा आता है। बापू ने व्यास पीठ को बुद्ध पुरुष बताया है। 

जल रहा है पूरा संसार
बापू ने बताया इस समय पूरा संसार जल रहा है। लोग धन, सांसारिकता, लालच, द्वेष, ईष्या और लालसा में इतना डूब चुके हैं कि कोई सदगुरु उन्हें बुलाता भी है तो भी वह नहीं सुनते हैं। सदगुरु तो शिष्य को बहलाने के लिए झूठ की ऐसी डिजाइन पेश करता है कि मनुष्य सब कुछ छोड़ कर बाहर आ जाए। वह हमें बचाने के लिए सत्य को छुपाता है।
 
Morari Bapu statement about youth
मोरारी बापू
साधना को तीन चीजे जरूरी 
बापू ने बताया कि साधना के लिए तीन चीजों गुरु की पूर्ण कृपा, मंत्र शुद्धि और एकांत व मौन जरूरी है। बिना गुरु के कोई भी साधना नहीं कर सकता। साधन के लिए मंत्र शुद्धि की जरूरत होती है। गुरु जो भी दे, वहीं मंत्र होता है। शिष्य को उसी का जाप करना चाहिए। तीसरी और सबसे जरूरी चीज एकांत और मौन है। साधना दो लोग एक साथ बैठ कर नहीं कर सकते हैं। ये एकांत में होती है। गुरु के मुख से जो भी निकले, उसे शुद्ध हृदय से जपना चाहिए।

हर पत्र का उत्तर नहीं दे सकता 
मोरारी बापू ने कहा, मैं भी आपकी तरह ही आम इंसान हूं। लोग मुझे ज्ञानी ना समझे। मैं तो अनपढ़ हूं। बापू को यह समझकर पत्र मत लिखा करो कि उत्तर मिल ही जाएगा। मैं सभी पत्रों के उत्तर नहीं दे सकता हूं। मुझे तो व्हाटसएप, फेसबुक, इंटरनेट चलाना भी नहीं आता। सिर्फ कॉल करना और रिसीव करना आता है। मेरा कोई कल्चर नहीं है। मेरा तो एग्रीकल्चर है।

गुरु के वचनों पर विश्वास होना चाहिए
बापू ने कहा शिष्य को गुरु पर विश्वास करना चाहिए। कृष्ण झूठ बोलकर गोपियों से वादा करते है कि मैं आऊंगा। जब भी आऊंगा पर मैं आऊंगा। तुम मेरे पीछे मत आना। कृष्ण ने जो बोला, वृंदावन वालों ने इसका भरोसा किया क्योंकि गुरु जो भी बोले वो सत्य होता है। कृष्ण के एक भरोसे पर बृज सूना हो गया। बापू ने कहा शिष्य को ऐसा होना चाहिए कि मैं टूट जाऊं पर मेरे गुरु का वचन नहीं टूटना चाहिए। दुनिया में दो ही प्रमाण होते हैं। एक तो गुरु प्रमाण होता है। दूसरा शास्त्र प्रमाण। गुरु ने जो कहा है वो तो होगा ही होगा। बस समय लग सकता है।
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Morari Bapu statement about youth
मोरारी बापू
गुरु की पादुकाएं ही आधार 
कर्ण ने कुंती से कहा मैं तेरा बेटा नहीं हूं। मुझे तो राधा मां ने पाला है। मैं तो राधेय हूं। मैं कौंतेय नहीं हूं। सूर्य मेरा पिता है। मुझे इस बात का गर्व है। उस वक्त तेरी ममता कहां गई थी जब मुझे टोकरी में छोड़कर नदी में बहा दिया था। बापू ने बताया साधू का भजन जो बोले वही प्रमाण है। सभी ग्रंथ उसके पीछे चलेंगे। अध्यात्म जगत में गुरु की पादुकाओं को आधार कहा गया है। गुरु पादुकाओं की रज से शिष्य को ज्ञान प्राप्त हो जाता है। भरत के लिए राम की पादुकाएं आधार बनीं। भरत ने चौदह साल तक राम की पादुकाएं रखकर अयोध्या पर शासन किया।

सोने से पहले निपटाना झगड़ा
युवाओं से मेरी गुजारिश है कि अगर घर में कभी झगड़ा हो तो रात को सोने से पहले सुलझा लेना। बापू की प्रार्थना है रात को झगड़ा सुलझाने के बाद ही सोना नहीं तो घर स्वर्ग से नरक बन जाएगा। घर को कनक भवन होना चाहिए, कोप भवन नहीं। बापू ने कहा सुखी दांपत्य के तीन सूत्र होते हैं। पहला पुरुष को पत्नी के प्रति प्रेम होना चाहिए। दूसरा पत्नी का पति के प्रति आदर भाव होना चाहिए। दोनों जिस कुल के भी हों, उस कुल के देवता की पूजा होनी चाहिए। स्त्रिी प्रेम की और पुरुष आदर का भूखा होता है। समाज को पता नहीं क्या हो गया है। सभी के दांपत्य बिगड़ते जा रहे हैं। जिनकी शादियों में मैं दिल से आशीर्वाद देकर आया था एक साल बाद वो कोर्ट में अलग होने की अर्जी लिए खड़े रहते हैं।

पार्वती बनी है राम कथा की निमित
कैलाश पर्वत पर भगवान शंकर से पार्वती ने पूछा प्रभु सती रूप में मैने जो किया उसका परिणाम भोग चुकी हूं। अब मैने पार्वती के रूप में जन्म लिया है। प्रभु में पूछना चाहती हूं क्या राम सच में ब्रह्म हैं। सच में वो ईश्वर है। उन्हें दो दंडकारण्य में रोते-बिलखते विलाप करते हुए देखा है। यह कैसे प्रभु। भगवान शिव ने पार्वती को देखते हुए कहा, धन्य-धन्य गिरिराज कुमारी, तुम समान नहीं कोऊ हितकारी। भगवान शंकर ने कहा पूछे रघुपति कथा प्रसंगा सकल लोग जग पावति गंगा। जैसे मेरी जटाओं से गंगा को धरती पर जाने के लिए भगीरथ ने तपस्या की, वैसे ही राम कथा जन-जन तक पहुंचाने के लिए तुम निमित बनी हो।
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