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Kanpur News: दूध-फल के खाते पर ताला, बच्चों की थाली में सूखा निवाला

Wed, 12 Aug 2026 01:52 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Wed, 12 Aug 2026 01:52 AM IST
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Milk and fruit accounts are locked, and children have dry morsels on their plates.
कानपुर देहात। प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद परिषदीय स्कूलों में लागू पोषण योजना दम तोड़ते दिखाई दे रही है। प्रधानों के प्रशासक बनते ही मध्याह्न भोजन के खातों का संचालन बंद कर दिया गया है। इससे बच्चों को दूध और फल का वितरण नहीं हो पा रहा है। करीब डेढ़ माह से बच्चों को सिर्फ मध्याह्न भोजन ही मिल रहा है।
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जनपद में संचालित 1922 परिषदीय स्कूलों में 1.25 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। परिषदीय स्कूलों में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य देखभाल को लेकर पोषण योजना लागू है। योजना के तहत बच्चों को पका पकाया मध्याह्न भोजन तो प्रतिदिन मिल रहा है लेकिन प्रति सप्ताह बुधवार को मिलने वाला दूध और सोमवार को मिलने वाला मौसमी फल नहीं मिल रहा। ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्राम प्रधानों के प्रशासक बनने के बाद ग्राम पंचायतों का खाता बंद है।
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ग्राम पंचायत के खाते से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के फल और दूध की व्यवस्था की जाती थी। ग्राम प्रधानों के प्रशासक बनने के बाद से यह खाता बंद हो गया है। एमडीएम में पोषण के तहत आने वाले फल इसी खाते से प्रधान उपलब्ध कराते थे। अब खाता बंद हो गया तो स्कूलों के मेन्यू से फल और दूध गायब हो गए हैं। वहीं, एमडीएम का खाता भी प्रभावित होने के कारण विभाग इसके अलग संचालन की तैयारी में जुटा है।
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संदलपुर के संविलियन विद्यालय गहिलापुर में प्रधानाध्यापक विजय शंकर ने बताया कि स्कूल में 65 बच्चे पंजीकृत हैं। इनको मिलने वाले मध्याह्न भोजन के खाद्यान्न का भुगतान शासन स्तर से किया जाता है। राशन कोटे की दुकान से मिलता है इसलिए समस्या नहीं हो रही है लेकिन फल व दूध समय पर नहीं मिल पा रहा है। इस मद में खर्च होने वाली धनराशि का भुगतान करने के लिए बैंक के खाते में प्रधानाध्यापक, एसएमसी अध्यक्ष व प्रधान के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। प्रधान के प्रशासक बनने से खाता बंद हो गया है। हालांकि विभाग ने जल्द ही एसएमसी अध्यक्ष व प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर से खाते का संचालन शुरू होने का आश्वासन दिया है। इससे समस्या का समाधान हो जाएग
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प्रशासन से की नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी
जिले में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना के बैंक खातों के संचालन के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। विद्यालयों के मध्याह्न भोजन निधि खाते विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होंगे। प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो चुका है। अब तक एमडीएम खातों का संचालन ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता था। ग्राम पंचायतों के सामान्य निर्वाचन तक योजना के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए इसके लिए शासन के निर्देश पर यह नई व्यवस्था प्रभावी होगी।

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बयान....
जिलाधिकारी के निर्देश पर नई व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। इसके तहत विद्यालयों में मध्याह्न भोजन निधि खाते का एसएमसी अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से संचालन करेंगे। सभी आय-व्यय का अभिलेख सुरक्षित रखा जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश है कि विद्यालयों में इस व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं। - आशीष कुमार पांडेय, बीएसए
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एमडीएम में बच्चों को मिलने वाले खाद्यान्न की मात्रा
प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के लिए मात्रा
चावल/गेहूं - 100 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
दाल - 20 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
सब्जी (मौसमी व हरी) - 50 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
तेल/घी - 5 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
दूध - सप्ताह में एक दिन 150 मिलीलीटर गरम उबला हुआ दूध प्रति छात्र।
फल - सप्ताह में एक दिन ताजा एवं मौसमी फल का वितरण।
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उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के लिए मात्रा
चावल/गेहूं - 150 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
दाल - 30 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
सब्जी (मौसमी व हरी) - 75 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
तेल/घी - 7.5 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन।
दूध - सप्ताह में एक दिन 200 मिलीलीटर गरम उबला हुआ दूध प्रति छात्र।
फल - सप्ताह में एक दिन ताजा एवं मौसमी फल का वितरण।
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