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कानपुर में जल्द दौड़ेगी मेट्रो: हर मेट्रो ट्रेन में 24 सीसीटीवी से निगरानी, आधुनिक संसाधनों से होगी लैस
Sun, 19 Sep 2021 09:13 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 19 Sep 2021 09:13 AM IST
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कानपुर मेट्रो रेल
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में चलने वाली मेट्रो ट्रेनें अन्य शहरों में संचालित ट्रेनों से अलग होंगी। इन्हें कई आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है। मसलन, री-जेनरेटिव ब्रेक सिस्टम, दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर रखने की सुविधा समेत अन्य तमाम सुविधाएं होंगी। 974 यात्री क्षमता वाली प्रत्येक ट्रेन की निगरानी के लिए 24-24 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनका कंट्रोल ट्रेन ऑपरेटर और सेंट्रल सिक्योरिटी रूम के पास होगा।
ये होंगी खासियतें
- इन ट्रेनों में री-जेनरेटिव ब्रेकिंग (बिजली के पुन: उत्पादन) का फीचर है, जिसकी मदद से संचालन के दौरान ब्रेक लगने से 45 प्रतिशत तक ऊर्जा को फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इन ट्रेनों में प्रॉपल्सन सिस्टम भी लगाया गया है।
- ट्रेनों में कार्बन डाईऑक्साइड सेंसर आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम होगा, जो यात्रियों की संख्या के हिसाब से चलेगा और ऊर्जा की बचत करेगा।
- ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए ये ट्रेनें संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली से चलेंगी।
- आधुनिक फायर और क्रैश सेफ़्टी के मानकों पर डिजाइन मेट्रो ट्रेनों की यात्री क्षमता 974 होगी।
- ट्रेन के पहले और आखिरी कोच में दिव्यांगजनों की व्हीलचेयर के लिए अलग से जगह मिलेगी। व्हीलचेयर के स्थान के पास लॉन्ग स्टॉप रिक्वेस्ट बटन होगा, जिसकी मदद से दिव्यांगजन ट्रेन ऑपरेटर को
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अधिक देर तक दरवाजा खुला रखने के लिए सूचित कर सकेंगे।
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ये होंगी खासियतें
- इन ट्रेनों में री-जेनरेटिव ब्रेकिंग (बिजली के पुन: उत्पादन) का फीचर है, जिसकी मदद से संचालन के दौरान ब्रेक लगने से 45 प्रतिशत तक ऊर्जा को फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इन ट्रेनों में प्रॉपल्सन सिस्टम भी लगाया गया है।
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- ट्रेनों में कार्बन डाईऑक्साइड सेंसर आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम होगा, जो यात्रियों की संख्या के हिसाब से चलेगा और ऊर्जा की बचत करेगा।
- ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए ये ट्रेनें संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली से चलेंगी।
- आधुनिक फायर और क्रैश सेफ़्टी के मानकों पर डिजाइन मेट्रो ट्रेनों की यात्री क्षमता 974 होगी।
- ट्रेन के पहले और आखिरी कोच में दिव्यांगजनों की व्हीलचेयर के लिए अलग से जगह मिलेगी। व्हीलचेयर के स्थान के पास लॉन्ग स्टॉप रिक्वेस्ट बटन होगा, जिसकी मदद से दिव्यांगजन ट्रेन ऑपरेटर को
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अधिक देर तक दरवाजा खुला रखने के लिए सूचित कर सकेंगे।
- ट्रेनों में अग्निशामक यंत्र, स्मोक डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरे आदि भी लगे होंगे। हर ट्रेन में 24 सीसीटीवी कैमरे होंगे, जिनका वीडियो सीधे ट्रेन ऑपरेटर और डिपो में बने सेंट्रल सिक्योरिटी रूम में पहुंचेगा। हर ट्रेन में 56 यूएसबी चार्जिंग प्वाइंट भी होंगे।
- कानपुर की मेट्रो ट्रेनें थर्ड रेल यानी पटरियों के समानांतर चलने वाली तीसरी रेल से ऊर्जा प्राप्त करेंगी, इसलिए इसमें खंभों और तारों के सेटअप की जरूरत नहीं होगी और बुनियादी ढांचा बेहतर और सुंदर नजर आएगा।
- सूचनाएं प्रसारित करने के लिए हर ट्रेन में 36 एलसीडी पैनल भी होंगे।
इसलिए कहा जा रहा है प्रोटोटाइप
मेट्रो ट्रेन का प्रोटोटाइप इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि गुजरात से आने के बाद पॉलिटेक्निक डिपो में इसकी असेंबलिंग कर टेस्टिंग की जाएगी। कॉरिडोर वन के प्राथमिकता वाले सेक्शन (आईआईटी से मोतीझील तक) में आठ मेट्रो ट्रेनें संचालित होनी हैं। जबकि, दोनों कॉरिडोर को मिलाकर कुल 39 ट्रेनें चलेंगी। प्रत्येक ट्रेन में 3-3 कोच होंगे।
- कानपुर की मेट्रो ट्रेनें थर्ड रेल यानी पटरियों के समानांतर चलने वाली तीसरी रेल से ऊर्जा प्राप्त करेंगी, इसलिए इसमें खंभों और तारों के सेटअप की जरूरत नहीं होगी और बुनियादी ढांचा बेहतर और सुंदर नजर आएगा।
- सूचनाएं प्रसारित करने के लिए हर ट्रेन में 36 एलसीडी पैनल भी होंगे।
इसलिए कहा जा रहा है प्रोटोटाइप
मेट्रो ट्रेन का प्रोटोटाइप इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि गुजरात से आने के बाद पॉलिटेक्निक डिपो में इसकी असेंबलिंग कर टेस्टिंग की जाएगी। कॉरिडोर वन के प्राथमिकता वाले सेक्शन (आईआईटी से मोतीझील तक) में आठ मेट्रो ट्रेनें संचालित होनी हैं। जबकि, दोनों कॉरिडोर को मिलाकर कुल 39 ट्रेनें चलेंगी। प्रत्येक ट्रेन में 3-3 कोच होंगे।