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नकली दवा के कारोबार का सरगना गिरफ्तार

Thu, 24 Jun 2021 01:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:48 AM IST
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mastermind arrest
लखनऊ/कानपुर। नकली दवाओं का कारोबार करने वाले लखनऊ के एलडीए कॉलोनी निवासी मनीष मिश्रा को बुधवार को क्राइम ब्रांच ने लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। टीम उसे साथ लेकर कानपुर ले गई और पूछताछ शुरू कर दी।
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क्राइम ब्रांच ने सोमवार को कानपुर की गोविंद नगर पुलिस के साथ मिलकर दबौली टेंपो स्टैंड के पास से चकेरी निवासी पिंटू गुप्ता उर्फ गुड्डू व बेकनगंज निवासी आसिफ मोहम्मद खां उर्फ मुन्ना को भारी मात्रा में दवाओं के साथ गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ में नकली दवाओं के बड़े स्तर पर किए जा रहे कारोबार का पता चला था। शातिरों की निशानदेही पर क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को लखनऊ के अमीनाबाद स्थित नकली दवाओं के गोदाम से करीब दो करोड़ रुपये की दवाएं बरामद कर सचिन को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हालांकि, सरगना लखनऊ एलडीए कॉलोनी निवासी मनीष मिश्रा भाग निकला था। बुधवार को क्राइम ब्रांच के हाथ सफलता लग गई है। पुलिस उसे गिरफ्तार कर टीम कानपुर के लिए रवाना हो गई।
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दवाओं की पैकिंगकरने वाले निशाने पर
कानपुर। ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवाओं की बाजार में सप्लाई करने वाले गैंग केपकड़े जाने के बाद क्राइम ब्रांच दवा तस्करों को नकली स्ट्रिप व प्रिंटेड डिब्बे उपलब्ध कराने वालों को खोज रही है। पुलिस के अनुसार, स्ट्रिप व डिब्बे पर प्रिंटिंग व स्कैनिंग कोड लगाने वालों का पता किया जा रहा है। क्योंकि ऐसी मशीनें 50 से 60 लाख में आती हैं। एडीसीपी क्राइम दीपक भूकर के अनुसार, दवा तस्कर नकली दवाओं को पैक करने के लिए बिलकुल असली दिखने वाली स्ट्रिप और डिब्बों का इस्तेमाल करते थे। ऐसे में ब्रांडेड कंपनियों के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है। साथ ही ये कंपनियां जहां से अपने स्ट्रिप व डिब्बे बनवाते व छपवाते हैं, उनकी भी जानकारी मांगी गई है।
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एसएमएस से पता चल जाता है दवा असली या नकली
एडीसीपी क्राइम के अनुसार, कुछ बड़ी दवा कंपनियां अपने ग्राहकों की सुविधा केलिए दवा केस्ट्रिप पर एक मोबाइल नंबर देती हैं। स्ट्रिप पर लिखे बैच नंबर को एसएमएस के माध्यम से दिए हुए नंबर पर भेजने पर कंपनी दवा के असली या नकली होने की जानकारी दे देती है।
हिमाचल प्रदेश से होती है नकली दवाओं की आपूर्ति
लखनऊ। राजधानी में नकली दवाओं का कारोबार काफी तेजी से फैला है। इसकी आपूर्ति हिमाचल प्रदेश की दवा कंपनियों द्वारा की जाती है। नकली दवा के कारोबारियों ने लखनऊ व कानपुर में बड़े गोदाम बना रखे हैं। इसका खुलासा सोमवार को कानपुर क्राइम ब्रांच की टीम की छापेमारी में हुआ था। इस मामले में कानपुर व लखनऊ से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। नकली दवा आपूर्ति के कारोबार का सरगना मनीष और उसके साथी हिमाचल प्रदेश से दवाओं की खेप लाकर इन दोनों जिलों में खपाते हैं। यहीं से इन दवाओं को अन्य जिलों के एजेंटों के पास भेजा जाता है। पुलिस अब इस गिरोह के एजेंटों सहित गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। उनकी कुंडली खंगाल रही है। कानपुर व लखनऊ पुलिस की संयुक्त आपरेशन में अमीनाबाद से दबोचे गये दवा कारोबारी सचिन से लंबी पूछताछ हुई। उसने इस दौरान बताया कि बरामद नकली दवाओं का निर्माण हिमाचल प्रदेश में होता है। दवा वहीं से मनीष नाम का व्यक्ति अपने साथियों के सहयोग से भेजता है।
पैकिंग ऐसी असली-नकली का फर्क नहीं दिखेगा
प्रभारी निरीक्षक अमीनाबाद आलोक कुमार राय के मुताबिक गिरोह के लोग जिफी, नाइट्रावेट टेबलेट और एंटीबायोटिक के नकली इंजेक्शन की पैकिंग काफी शातिराना तरीके से करते हैं। ताकि आम लोगों को असली व नकली का फर्क न दिखे। पैकिंग नामी कंपनियों जैसे की जाती है। इससे लोगों को संदेह नहीं होता है। आसानी से दवाईयां खरीदकर चले जाते हैं। कई कंपनियों केएमआर भी पुलिस की पड़ताल की जद में है। उनकी कुंडली खंगाली जा रही है। वहीं दवा कारोबार से जुड़े ऐसे लोग जो गिरोह से संपर्क में थे। उनकी कुडंली पुलिस तैयार कर रही है। कई दवा कारोबारी भी पुलिस व औषधि विभाग के निशाने पर है। वहीं इन दवाओं के रैपर जहां निर्माण कराये जाते हैं। उस प्रिंटिंग प्रेस के बारे में भी पुलिस जानकारी हासिल कर रही है।

पांच महीने पहले आई थी खेप
पुलिस के मुताबिक नकली दवाओं के बीच समझौता हुआ था। जिसके तहत इसकी खेप पांच महीने पहले लखनऊ और कानपुर भेजी गई थी। इसके लिए माडल हाउस में गोदाम भी बनाया गया था। पुलिस ने अमीनाबाद के दो गोदामों में मंगलवार देर शाम तक छापा मारती रही। इस दौरान ढाई करोड़ की नकली दवा बरामद हुई है।
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