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शहीद की मां का दर्द,‘प्रधानमंत्री से कुछ नहीं होता तो मैं ही कर दूंगी आतंकवादियों का खात्मा’

Sat, 29 Apr 2017 01:04 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 29 Apr 2017 01:04 AM IST
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martyr ayush mother says about pm modi
इकलौते बेटे आयुष की मौत से मां सरला का रो-रोकर बुरा हाल
‘मेरा इकलौता बेटा चला गया, अब मेरे पास कुछ नहीं बचा। अगर पीएम से कुछ नहीं होता तो वो मुझे बम दे दें। मै खुद ही आतंकवादियों का खात्मा कर दूंगी।’ ये शहीद आयुष की मां सरला का वो दर्द था जो आंसुओं के साथ जुबां से बार-बार फूट रहा था। शहीद आयुष यादव की मां ने रोते- रोते बताया क‍ि बुधवार रात को ही बेटे का फोन आया था। वह कह रहा था क‍ि मैं जल्द ही कानपुर आने वाला हूं, रिजर्वेशन करा लेता हूं। सरला ने बताया कि उसकी पहली पोस्टिंग देहरादून में हुई थी। वह बचपन से कहता था कि मुझे सेना में ही जाना है।  
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तू सो रही है मैं पीटी कर आया
शहीद की बड़ी बहन रूपल ने बताया की आयुष से रेग्युलर बात होती थी। वह रोज सुबह फोन करता था। वह मुझे हर बात बताता था। कहता था कि तू अभी सो रही है, आफिस नहीं जाना। मैं पीटी करके लौट आया। वह हमेशा पोस्टिंग के बारे में बताता था। बुधवार रात को 10 बजे ही भाई की मम्मी से बात हुई थी। उसने खाना खाने की बात कही थी। बोला था कि सुबह बात करूंगा। हमें क्या पता था कि सुबह हमें ये खबर मिलेगी।  
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सरकार से न अपील न उम्मीद
शहीद आयुष के पिता को इकलौते बेटे को खोने का गहरा सदमा लगा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार जब विपक्ष में होती है, तब कुछ और बात करती है लेकिन जब सरकार में जाती है तो सबकुछ भूल जाती है। आज भी कश्मीर में पत्थरबाजी हो रही है। वहां आतंकियों के समर्थकों सरकार बना रखी है।  इस दौरान वह बार-बार बेटे की तस्वीर निहारते रहे। उन्होंने बड़ी हिम्मत  के साथ मीडिया के सवालों का जवाब दिया।  
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टूटा बहू लाने का सपना
शहीद के माता - पिता का बड़ी बेटी रुपल की शादी के बाद आयुष की शादी का सपना था। परिजनों ने बताया कि कुछ रिश्ते आ रहे थे। उनका कहना था कि इससे पहले ही वह हमसे दूर चला गया। अरुणकांत के भाई तरणकांत ने बताया कि वह फर्रुखाबाद से मशेनी गांव के रहने वाले है, यहां (कानपुर) में 56 वर्षों से रह रहे हैं।
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