फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Many Charbi mafia have become millionaires

करोड़पति हो गए कई चर्बी माफिया

Tue, 19 Jan 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Updated Tue, 19 Jan 2016 01:45 AM IST
विज्ञापन
Many Charbi mafia have become millionaires
चर्बी के धंधे से कई धंधेबाज करोड़पति हो गए। उनमें से कुछ ने तो कई जैविक खाद्य, हड्डियों सहित कई अन्य कारोबार भी शुरू कर दिए हैं, जिनकी आड़ में ‘तेजाबी चर्बी’ का भी धंधा यहां से लेकर नेपाल तक करते हैं।
विज्ञापन


जाजमऊ और वाजिदपुुर क्षेत्र के 15 लोग चर्बी के धंधे में लिप्त हैं। हालांकि तीन दिन से पुलिस और प्रशासन का शिकंजा कसने की वजह से इनमें से ज्यादातर अंडरग्राउंड हो गए हैं। कुछ जैविक खाद्य की आड़ में यह धंधा कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य उन्नाव जिले में शिफ्टिंग की तैयारी में हैं।
विज्ञापन


इस अवैध धंधे से जुड़े सूत्रों के अनुसार वाजिदपुुर में चर्बी का अवैध धंधा 15 साल पहले जाजमऊ दरगाह शरीफ के पास रहने वाले एक चर्बी माफिया ने शुरू किया। उसने शुरुआत में बट्टे वाला काला साबुन बनाने वालों को चर्बी बेचनी शुरू की, पर धीरे - धीरे उसके तार गुजरात के नकली देशी घी माफियाओं से जुड़ गए, वे उसे चर्बी का मुंह मांगा दाम देने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस कार्य में पेंचबाग (कच्चा चमड़ा मंडी) का एक हिस्ट्रीशीटर व्यापारी मध्यस्थ बना। वह पूरी चर्बी लेकर ट्रकों में लदवाकर गुजरात भेजने लगा। हर महीने लाखों रुपये की कमाई से भट्ठियों की संख्या बढ़ने लगी। ग्लू (सरेश) बनाने वाले कई लोग चर्बी के धंधे में उतर आए।

पहले चर्बी माफिया ने उनसे चर्बी खरीदकर गुजरात से लेकर नेपाल तक भेजना शुरू किया। इस धंधे से करोड़पति होने पर पुलिस की नजर पड़ी तो उसने यहां से ग्लू भट्ठियां उन्नाव जिले के अचलगंज में शिफ्ट कर दीं। वहां जैविक खाद, हड्डियों आदि का लाइसेंस लेकर कारोबार करने लगा।

उसकी आड़ में चर्बी का धंधा भी बेखौफ  जारी है। इसी माफिया के रिश्ते के भाई ने मोटी कमाई देखकर 10 साल पहले गंगा के किनारे वाजिदपुुर में ग्लू भट्ठियां लगाईं। उसकी बताई जा रहीं आठ भट्ठियों को 16, 17 जनवरी को जिला प्रशासन और पुलिस ने तोड़ा। उन्नाव जिले में भी उसका कारोबार है। उन्नाव पुलिस ने सात साल पहले उसे इसी धंधे में लिप्तता का आरोप लगाते हुए पकड़ा था। पुलिस के चंगुल से छूटकर दोबारा से धंधा करने लगा।

जाजमऊ में जिन्नातों की मसजिद के पास रहने वाला तीसरा चर्बी माफिया भी इसी धंधे से करोड़पति हो गया। पहले से ही स्कार्पियो से चलने वाला यह माफिया हाल ही में सफेद रंग की कार लाया है।उधर, चकेरी पुलिस का कहना है कि अवैध रूप से ग्लू भट्ठियां लगाकर चर्बी का धंधा करने वालों की जांच की जा रही है। कार्रवाई की जाएगी।

टेनरियों में भी धधकती हैं ग्लू फैक्ट्रियां
कानपुर। बड़ा मुनाफा देख ग्लू का धंधा टेनरियों की चहारदीवारी में भी धड़ल्ले से चल रहा है। ‘पहरेदार’ अपनी सरपरस्ती में अवैध कारोबार को खुद संवारने में जुटे हैं। जाजमऊ से प्योंदी तक जड़ें पसार चुका अवैध कारोबार पुरानी चुंगी, संजय नगर, वाजिदपुर की कुछ टेनरियों में हो रहा है।


पशुओं के अवशेष से धधकती आग
भट्ठियों पर आग जलाने को जानवरों की हड्डियां, बाल और खाल को जलाया जाता है। जानवरों के ये अवशेष पहले से ही तेजाब, क्रोमियम जैसे खतरनाक रसायनों से भीगे होते हैं। इससे निकलने वाला धुआं सांस और फेफड़ों के लिए नुकसानदेह है। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed