{"_id":"618fbb312d417d44303596aa","slug":"mahoba-fire-extinguishers-of-expiry-date-are-installed-in-district-hospital-and-chc","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महोबा: जिला अस्पताल व सीएचसी में लगे हैं एक्सपायरी डेट के अग्निशमन यंत्र, हो सकता है हादसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महोबा: जिला अस्पताल व सीएचसी में लगे हैं एक्सपायरी डेट के अग्निशमन यंत्र, हो सकता है हादसा
Sat, 13 Nov 2021 06:48 PM IST
शिखा पांडेय
चंद्रशेखर यादव, अमर उजाला, महोबा
चंद्रशेखर यादव, अमर उजाला, महोबा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 13 Nov 2021 06:48 PM IST
विज्ञापन
सीएचसी कुलपहाड़ में लगा एक्सपायर अग्निशमन यंत्र
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महोबा जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल होने से लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। सुरक्षा नियमों की अनदेखी से जिले के कई सरकारी अस्पताल कभी भी आग का गोला बन सकते हैं। इसकी वजह यह सामने आ रही है कि अस्पतालों में लगे अग्निशमन यंत्र की तारीख एक्सपायर हो चुकी है।
ऐसे में अग्निशमन यंत्र मात्र शोपीस बने हैं। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर लाखों रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। लेकिन सुरक्षा के लिए मानकों की अनदेखी की जा रही है। बिना एनओसी के सरकारी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इससे अस्पताल पहुंचने वाले हजारों मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं।
पड़ताल करने में सामने आया कि जिला अस्पताल के ओपीडी भवन में प्रथम तल, इसी तरह सर्जिकल वार्ड-चार में एक साल पुराने अग्निशमन यंत्र लगे हैं। वहीं सीएचसी कुलपहाड़ में भी एक्सपायर हो चुके अग्निशमन यंत्र शोपीस के रूप में लगे हुए हैं।
विज्ञापन
उधर, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी महोबा देवेश कुमार तिवारी का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अस्पतालों में सुरक्षा के निर्देश दिए गए थे। जिला अस्पताल के पास एनओसी नहीं हैं। जिसको लेकर दो बार सीएमओ और जिलाधिकारी को पत्राचार किया जा चुका है। अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
विज्ञापन
ऐसे में अग्निशमन यंत्र मात्र शोपीस बने हैं। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर लाखों रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। लेकिन सुरक्षा के लिए मानकों की अनदेखी की जा रही है। बिना एनओसी के सरकारी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इससे अस्पताल पहुंचने वाले हजारों मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं।
विज्ञापन
पड़ताल करने में सामने आया कि जिला अस्पताल के ओपीडी भवन में प्रथम तल, इसी तरह सर्जिकल वार्ड-चार में एक साल पुराने अग्निशमन यंत्र लगे हैं। वहीं सीएचसी कुलपहाड़ में भी एक्सपायर हो चुके अग्निशमन यंत्र शोपीस के रूप में लगे हुए हैं।
विज्ञापन
उधर, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी महोबा देवेश कुमार तिवारी का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अस्पतालों में सुरक्षा के निर्देश दिए गए थे। जिला अस्पताल के पास एनओसी नहीं हैं। जिसको लेकर दो बार सीएमओ और जिलाधिकारी को पत्राचार किया जा चुका है। अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
खोजने से भी नहीं मिलती बाल्टी
आग की घटनाओं से निपटने के लिए फायर स्ट्रिंगविशर के अतिरिक्त अस्पतालों के महत्वपूर्ण स्थानों पर खाली बाल्टी और बालू से भरी बाल्टी रखनी चाहिए, जो पूरे अस्पताल खोजने के बाद भी नहीं मिलेगी।
फायर स्ट्रिंगविशर में भी होता है खेल
सरकारी अस्पतालों में आग की घटनाओं से बचाव के लिए स्ट्रिंग विशर के नाम पर भी खूब खेल होता है। कागजों पर जितने स्ट्रिंगविशर दिखाए जाते हैं उतने नहीं होते हैं। पुराने स्ट्रिंगविशर में ही नया लेबल लगा दिया जाता है।
आग की घटनाओं से निपटने के लिए फायर स्ट्रिंगविशर के अतिरिक्त अस्पतालों के महत्वपूर्ण स्थानों पर खाली बाल्टी और बालू से भरी बाल्टी रखनी चाहिए, जो पूरे अस्पताल खोजने के बाद भी नहीं मिलेगी।
फायर स्ट्रिंगविशर में भी होता है खेल
सरकारी अस्पतालों में आग की घटनाओं से बचाव के लिए स्ट्रिंग विशर के नाम पर भी खूब खेल होता है। कागजों पर जितने स्ट्रिंगविशर दिखाए जाते हैं उतने नहीं होते हैं। पुराने स्ट्रिंगविशर में ही नया लेबल लगा दिया जाता है।
अस्पतालों में सुरक्षा के लिए अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। जहां पर यंत्र एक्सपायर हो गए हैं उन्हे बदलकर नए अग्निशमन यंत्रों को लगाया जाएगा। - डॉ. मनोज कांत सिन्हा, मुख्य चिकित्साधिकारी