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lockdown in kanpur: चीजें छोटी काम बड़े, मिलने लगें तो बात बने
Sat, 25 Apr 2020 05:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 25 Apr 2020 05:50 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : गूगल
कोई साधारण सी चीज भी समय पर न मिले तो कितनी दिक्कत होती है इसका अहसास शहरवासियों को लॉकडाउन के इस दौर में हो रहा है। राशन, दूध, फल, सब्जी के अलावा भी कई ऐसी चीजें हैं जिनके ना मिलने के कारण शहरवासी परेशानी उठा रहे हैं।
चश्मा भी शामिल हो आवश्यक सेवाओं में
चश्मे की दुकानें न खुलने के कारण जिन लोगों का चश्मा या इसका फ्रेम टूट गया है। रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है। इनमें आवश्यक सेवाओं में शामिल डॉक्टर समेत समाज के हर वर्ग से जुड़े लोग शामिल हैं।
जरूरी चीजों और सेवाओं में चश्मा भी शामिल होना चाहिए। जिन लोगों के चश्मे टूट गए हैं, वे लगभग नेत्रहीन की स्थिति में समय काट रहे हैं। चश्मे की दुकानों को भी सामाजिक दूरी के नियम के साथ कुछ देर के लिए खुलने की अनुमति मिलनी चाहिए। - राजेश सिंह, एआरएम, झकरकटी बस स्टेशन
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रोजाना 20 से 25 लोग फोन कर चश्मा टूटने या नंबर बदल जाने की परेशानी बताते हैं। हर कोई यही कहता है कि थोड़ी देर के लिए दुकान खोल दें। यदि प्रशासन कुछ देर के लिए चश्मा की दुकानें खोलने की अनुमति दे, तो लोगों को राहत मिल जाए। - मसूद हसन, महक ऑप्टिकल, अस्पताल रोड, परेड
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चश्मा भी शामिल हो आवश्यक सेवाओं में
चश्मे की दुकानें न खुलने के कारण जिन लोगों का चश्मा या इसका फ्रेम टूट गया है। रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है। इनमें आवश्यक सेवाओं में शामिल डॉक्टर समेत समाज के हर वर्ग से जुड़े लोग शामिल हैं।
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जरूरी चीजों और सेवाओं में चश्मा भी शामिल होना चाहिए। जिन लोगों के चश्मे टूट गए हैं, वे लगभग नेत्रहीन की स्थिति में समय काट रहे हैं। चश्मे की दुकानों को भी सामाजिक दूरी के नियम के साथ कुछ देर के लिए खुलने की अनुमति मिलनी चाहिए। - राजेश सिंह, एआरएम, झकरकटी बस स्टेशन
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रोजाना 20 से 25 लोग फोन कर चश्मा टूटने या नंबर बदल जाने की परेशानी बताते हैं। हर कोई यही कहता है कि थोड़ी देर के लिए दुकान खोल दें। यदि प्रशासन कुछ देर के लिए चश्मा की दुकानें खोलने की अनुमति दे, तो लोगों को राहत मिल जाए। - मसूद हसन, महक ऑप्टिकल, अस्पताल रोड, परेड