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लॉकडाउन ने किया घर से दूर, किसी को जाना अपने शहर, तो कोई देख रहा लौटने की राह
Tue, 21 Apr 2020 08:35 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 21 Apr 2020 08:35 AM IST
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भारत में लॉकडाउन
- फोटो : पीटीआई
कोरोना वायरस से बचाव के लिए लागू लॉकडाउन ने बड़ी संख्या में उन लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है जो किसी काम से शहर आए थे या फिर कहीं बाहर गए थे। सोमवार से देश भर में लागू लॉकडाउन के कारण ऐसे लोग जहां तहां फंसे हुए हैं। आवागमन के सभी साधन बंद होने से इनकी दिक्कत बढ़ती जा रही है। इन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है। आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानी से जूझ रहे ये लोग घर वापसी के रास्ते तलाश रहे हैं। किसी भी कीमत पर अपने घर पहुंचना चाहते हैं लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे लोगों तथा उनके परिजनों का कहना है कि सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
केस-1:
एक दिन के लिए आए थे, 6 दिन से फंसे हैं। गाजियाबाद निवासी डॉ. सोमेश राजवर्धन बीते रविवार को दो दिनों के लिए शहर आए थे। उन्होंने जीटी रोड स्थित सिटी क्लब में कमरा बुक करा रखा था। मंगलवार को उन्हें वापस गाजियाबाद जाना था। उन्होंने बताया कि सोमवार रात लॉकडाउन की घोषणा के बाद ट्रेनों, बसों के साथ निजी टैक्सियों का आवागमन भी बंद हो गया। होटल वालों ने भी कमरा खाली करने के लिए कह दिया। बीते दो दिनों से परिचित के गेस्ट हाउस में रुका हूं। गाजियाबाद में परिजन अकेले हैं। दुर्घटना के कारण बीते साल पैर का ऑपरेशन हुआ था। अब पैर में सूजन भी बढ़ गई है। वापसी का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। सरकार और प्रशासन को ऐसी स्थिति में फंसे लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का रास्ता निकालना चाहिए।
केस -2:
फतेहपुर की राह भी मुश्किल हो गई। यहां के जयराम नगर निवासी श्यामसुंदर गुप्ता अपनी पत्नी अर्चना गुप्ता और विशाल गुप्ता के साथ पारिवारिक आयोजन में भाग लेने के लिए परेड चंदेश्वर हाता निवासी रिश्तेदार के घर आए थे। उन्हें मंगलवार को वापस जाना था। लॉकडाउन के कारण फतेहपुर की दूरी भी पहाड़ की तरह लग रही है। श्यामसुंदर ने बताया कि घर पर बूढ़े मां-बाप अकेले हैं। पत्नी और भाई भी साथ आए हैं। हममें से कोई भी घर पहुंच जाए तो माता-पिता की देखरेख हो सकेगी। प्रशासन से अनुरोध है कि किसी तरह फतेहपुर तक पहुंचा दें।
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केस 3-
कल्याणपुर के कान्हा श्याम अपार्टमेंट निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अवनीश श्रीवास्तव लॉकडाउन के कारण कोलकाता में फंसे हैं। अवनीश के पिता एसबी श्रीवास्तव ने बताया कि बेटा 11 मार्च को होली की छुट्टी के बाद कोलकाता वापस गया था। वह कॉग्निजेंट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बीते तीन-चार दिन से अवनीश को हार्ट में दर्द की शिकायत है। स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर वह इलाज करा रहा है, लेकिन अकेले होने के कारण कई और परेशानियां हो रही हैं। यदि वह शहर आ जाए तो बेहतर इलाज और देखरेख हो सके। प्रशासन से अनुरोध है कि इस तरह दूरदराज फंसे लोगों को उनके घर पहुंचाने के लिए रास्ता निकाले।
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केस-1:
एक दिन के लिए आए थे, 6 दिन से फंसे हैं। गाजियाबाद निवासी डॉ. सोमेश राजवर्धन बीते रविवार को दो दिनों के लिए शहर आए थे। उन्होंने जीटी रोड स्थित सिटी क्लब में कमरा बुक करा रखा था। मंगलवार को उन्हें वापस गाजियाबाद जाना था। उन्होंने बताया कि सोमवार रात लॉकडाउन की घोषणा के बाद ट्रेनों, बसों के साथ निजी टैक्सियों का आवागमन भी बंद हो गया। होटल वालों ने भी कमरा खाली करने के लिए कह दिया। बीते दो दिनों से परिचित के गेस्ट हाउस में रुका हूं। गाजियाबाद में परिजन अकेले हैं। दुर्घटना के कारण बीते साल पैर का ऑपरेशन हुआ था। अब पैर में सूजन भी बढ़ गई है। वापसी का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। सरकार और प्रशासन को ऐसी स्थिति में फंसे लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का रास्ता निकालना चाहिए।
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केस -2:
फतेहपुर की राह भी मुश्किल हो गई। यहां के जयराम नगर निवासी श्यामसुंदर गुप्ता अपनी पत्नी अर्चना गुप्ता और विशाल गुप्ता के साथ पारिवारिक आयोजन में भाग लेने के लिए परेड चंदेश्वर हाता निवासी रिश्तेदार के घर आए थे। उन्हें मंगलवार को वापस जाना था। लॉकडाउन के कारण फतेहपुर की दूरी भी पहाड़ की तरह लग रही है। श्यामसुंदर ने बताया कि घर पर बूढ़े मां-बाप अकेले हैं। पत्नी और भाई भी साथ आए हैं। हममें से कोई भी घर पहुंच जाए तो माता-पिता की देखरेख हो सकेगी। प्रशासन से अनुरोध है कि किसी तरह फतेहपुर तक पहुंचा दें।
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केस 3-
कल्याणपुर के कान्हा श्याम अपार्टमेंट निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अवनीश श्रीवास्तव लॉकडाउन के कारण कोलकाता में फंसे हैं। अवनीश के पिता एसबी श्रीवास्तव ने बताया कि बेटा 11 मार्च को होली की छुट्टी के बाद कोलकाता वापस गया था। वह कॉग्निजेंट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बीते तीन-चार दिन से अवनीश को हार्ट में दर्द की शिकायत है। स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर वह इलाज करा रहा है, लेकिन अकेले होने के कारण कई और परेशानियां हो रही हैं। यदि वह शहर आ जाए तो बेहतर इलाज और देखरेख हो सके। प्रशासन से अनुरोध है कि इस तरह दूरदराज फंसे लोगों को उनके घर पहुंचाने के लिए रास्ता निकाले।