UP: 16 घंटे के उपवास से सुधरी लिवर की सेहत, नैश के रोगियों को मिला फायदा, GSVM के शोध में निकले ये परिणाम
Kanpur News: डॉ. गुप्ता ने बताया कि शोध में शामिल डायबिटीज के रोगियों को फैटी लिवर की दिक्कत थी। कुछ नैश की गिरफ्त में भी थे। रोगियों के लिवर की फाइब्रो स्कैन जांच कराई गई, तो उनकी बीमारी रिवर्स होने लगी थी।
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24 घंटे में 16 घंटे उपवास रखें और बाकी आठ घंटे की अवधि में खाएं-पीएं तो डायबिटीज, मोटापा के साथ लिवर की सेहत भी दुरुस्त होगी। फैटी लिवर फिर सामान्य होने लगेगा। लिवर फाइब्रोसिस भी ठीक होने लगेगी। यह तथ्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के शोध में उजागर हुआ है। शोध के अगुवा मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विशाल कुमार गुप्ता का कहना है कि उपवास (इंटरमिटेंट फास्टिंग) से खराब लिवर में भी सुधार आया है। नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (नैश) के रोगियों को फायदा मिला। उपवास से लिवर ठीक होने का यह तथ्य पहली बार दर्ज किया गया।
हैलट में आए डायबिटीज के 74 रोगियों को इस शोध में शामिल किया गया। इन रोगियों को दिन में आठ घंटे खाने की छूट दी गई। वह दोपहर दो बजे से रात 10 बजे तक हर रोज की तरह सामान्य भोजन लेते रहे। रोगियों ने सिर्फ लंच और डिनर लिया। रात 10 बजे के बाद अगले दिन दोपहर दो बजे के पहले तक रोगियों ने कुछ नहीं खाया। रोगियों को सिर्फ पानी पीने, बिना चीनी और दूध की ब्लैक कॉफी और चाय पीने की छूट दी गई। इसके बाद रोगियों की जांच की गई। इसमें रोगी का ब्लड शुगर लेवल और मोटापा को नियंत्रित करने में मदद मिली, लेकिन सबसे चौंकाने वाला परिणाम लिवर की सेहत में सुधार का आया।
फाइब्रो स्कैन जांच कराई, तो बीमारी रिवर्स होने लगी थी
डॉ. गुप्ता ने बताया कि शोध में शामिल डायबिटीज के रोगियों को फैटी लिवर की दिक्कत थी। कुछ नैश की गिरफ्त में भी थे। रोगियों का वजन कम होने लगा और इसके साथ ही लिवर में वसा का जमाव कम हुआ। इससे सूजन कम हो गई। रोगियों के लिवर की फाइब्रो स्कैन जांच कराई गई, तो उनकी बीमारी रिवर्स होने लगी थी। उपवास से तीन महीने के अंदर ही लिवर की जांच में फर्क आ गया। शोध में 18 से लेकर 60 साल के रोगी शामिल किए गए। इनमें 36 महिलाएं और 38 पुरुष रोगी थे। ज्यादातर रोगी 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग के थे। शोध की कुल अवधि दो साल थी।
डायबिटीज के शत-प्रतिशत रोगियों को होता नैश
डायबिटीज के शत-प्रतिशत रोगी देर-सबेर नैश की गिरफ्त में आते हैं। इसके साथ मोटापा से ग्रस्त 90 फीसदी रोगियों को नैश होता है। डायबिटीज और मोटापा के साथ नैश के रोगी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नैश के रोगी को अगर वायरल और दूसरा संक्रमण हुआ तो लिवर बहुत जल्दी फेल हो जाता है। हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण नैश रोगियों के लिए जानलेवा साबित होता है।
नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (नैश) पर यह पहला काम हुआ है। डायबिटीज और मोटापा पर तो इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर शोध किए गए हैं। लेकिन, नैश पर पहली बार डाटा रिकॉर्ड किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल आफ डायबिटोलॉजी में इसे प्रकाशन के लिए स्वीकृत कर लिया गया है। हैलट में आए पांच सौ रोगियों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 74 रोगियों को शोध में शामिल किया गया। -डॉ. विशाल कुमार गुप्ता, शोध के अगुवा