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Kanpur News: शादी के दो माह बाद मायके में पत्नी की हत्या करने वाले को उम्रकैद

Fri, 22 Aug 2025 02:46 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 Aug 2025 02:46 AM IST
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Life imprisonment to the person who murdered his wife in her parents' house two months after marriage
कानपुर। दहेज के लिए शादी के दो महीने बाद ही मायके में पत्नी की जलाकर हत्या करने वाले को फास्ट ट्रैक कोर्ट 41 के न्यायाधीश पीयूष सिद्धार्थ ने उम्रकैद और तीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 26 साल तक मुकदमा चला। इस दाैरान सास-ससुर की मौत हो चुकी है जबकि देवर की फाइल किशोर न्याय बोर्ड में लंबित है।
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फतेहपुर में शिक्षक और नाैबस्ता स्थित संजयगांधी नगर निवासी सुरेश कुमार तिवारी ने बेटी आशा की शादी 23 जून 1999 को हंसपुरम आवास विकास काॅलोनी निवासी अतुल किशोर अवस्थी से की थी। पति अतुल, सास प्रभा व ससुर श्याम किशोर दहेज के लिए आशा को प्रताड़ित करते थे। इस पर आशा मायके संजय गांधीनगर आकर रहने लगी थी। अतुल 26 अगस्त को मायके आया और रात में रुक गया। अगले दिन आशा के शिक्षक माता-पिता नौकरी पर चले गए तभी अतुल ने अपने किशोर भाई की मदद से आशा को जलाकर मार डाला।
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सुरेश ने नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सिर्फ अतुल के खिलाफ दहेज हत्या के आरोप में चार्जशीट दाखिल की गई थी। अभियोजन की ओर से कोर्ट में दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सास, ससुर और देवर को भी तलब कर लिया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सास-ससुर की मौत हो चुकी है और देवर की फाइल किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी। सिर्फ अतुल के मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। अभियोजन की ओर से नौ गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने अतुल को दोषी मानकर सजा सुनाई।
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प्रौढ़ावस्था के कारण अभियुक्त सहानुभूति का पात्र नहीं

अतुुल के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में तर्क रखा गया कि अब उसकी उम्र 55 साल की है। 26 साल से मुकदमा चल रहा है। उसके दो बच्चे हैं जो पढ़ रहे हैं। उनकी जिम्मेदारी उस पर है। इसलिए सजा में रहम बरती जाए। वहीं एडीजीसी ने कहा कि घटना के समय आशा सिर्फ 20 साल की थी। मां-बाप की इकलौती बेटी थी लेकिन दहेज लोभी पति ने शादी के दो महीने बाद ही बेरहमी से जलाकर मार डाला। सख्त सजा दी जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि दहेज जैसी सामाजिक कुप्रथा के कारण एक नवयुवती की मौत हुई। घटना पुरानी है और अभियुक्त प्रौढ़ावस्था में है लेकिन इस आधार पर सामाजिक बुराई और लालचवश किए गए जघन्य अपराध के लिए अभियुक्त सहानुभूति का पात्र नहीं है।
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