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Kanpur News: अखिलेश पर सुस्ती या पुलिस की सधी चाल

Fri, 05 Sep 2025 02:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Sep 2025 02:21 AM IST
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Laziness on Akhilesh or a smart move by the police
अ​खिलेश दुबे। - फोटो : आर्काइव
कानपुर। अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उसके साथियों के खिलाफ अभी तक 25 से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं। हालांकि, अब तक सिर्फ नौ मामलों में ही एफआईआर हुई है। इनमें से तीन में अखिलेश भी नामजद है। उसके खिलाफ आखिरी मुकदमा किदवईनगर थाने में नौ अगस्त को दर्ज हुआ था। शुरुआत में तेजी से कार्रवाई करने वाली कमिश्नरी पुलिस की अचानक सुस्त पड़ी चाल चर्चा का विषय बनी हुई है। आखिर क्या वजह है? इसे हर कोई जानना चाहता है। इधर, पुलिस अफसरों का तर्क है कि पुख्ता साक्ष्य जुटाकर ही नए मामले दर्ज किए जाएंगे। जल्दबाजी में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जिसे आधार बनाकर अखिलेश राहत ले ले।
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पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे फर्जी मामलों में एफआईआर कराकर वसूली करने की कई शिकायतें आई थीं। सीपी के निर्देश पर एसआईटी ने जांच की जिसमें अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उसके साथियों का नाम सामने आए। एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर बर्रा थाने में छह अगस्त को पहली एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद किदवईनगर, कोतवाली, ग्वालटोली समेत अन्य थानों में कई रिपोर्ट दर्ज हुईं तो शिकायतों की बाढ़ आ गई। इस बीच, 25 अगस्त को पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के एमडी बनने का आदेश जारी होने के बाद धीमी पड़ी कार्रवाई ने तमाम चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
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सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के अधिकारियों ने तीन जांचें पूरी कर ली हैं। इन मामलों में अभी तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हुई, इस पर सब चुप्पी साधे हैं। खबर यह भी है नई एसआईटी नए सिरे से सभी शिकायतों की जांच में जुटी है। दोबारा जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं। पूर्व में अफसरों ने बताया था कि कुछ नए आरोप भी लगे और शिकायतें बहुत आने लगीं, इस कारण नई एसआईटी का गठन किया गया। फिलहाल, शिकायतकर्ताओं, गवाहों के बयान, सुबूत और दस्तावेजों के बावजूद एफआईआर दर्ज न होने को लोग पुलिस कमिश्नर के कार्यकाल से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसा इसलिए भी, क्योंकि डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन का एमडी बनाए जाने के आदेश के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय अखिल कुमार को जल्द रिलीव करने का अनुरोध कर चुका है।
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कहीं प्रभावशाली दरबारियों का दबाव तो नहीं



पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में अखिलेश के दरबार में कई प्रभावशाली अफसरों के आने-जाने की बात भी सामने आ चुकी है। ऐसी ही एक लॉबी अधिवक्ता के पक्ष में दिख रही है। इस वजह से भी अखिलेश पर कोई नया मुकदमा न दर्ज करने का दबाव है।







नई एसआईटी के गठन पर दो तरह की बात



एसआईटी का गठन करीब पांच माह पहले हुआ था। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर 28 अगस्त को चार सदस्यीय एसआईटी की टीम को बदलकर आठ सदस्यीय नई टीम बनाई गई। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव जांच में तेजी लाने के लिए किया गया, जबकि सूत्र बताते हैं कि आरोपियों के एक पक्ष की ओर से उन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगा था।







अखिलेश के दरबारियों में कई सफेदपोश भी



एसआईटी की जांच में सामने आया है कि कई सफेदपोशों का अखिलेश दुबे के कार्यालय में आना-जाना रहता था। जांच में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर उनका नाम भी सामने आ रहा था, जिसकी वजह से संबंधित की ओर से शासन में शिकायत की गई। आरोपियों ने भी कोर्ट में द्वेषपूर्ण कार्रवाई करने की बात कही थी। इन मामलों को देखते हुए पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है।








वर्जन

अब तक 25 से 30 शिकायतें आ गई हैं। एसआईटी हर मामले की गहनता से जांच कर रही है जिसमें शिकायतकर्ताओं और गवाहों के बयान, साक्ष्य, दस्तावेजों का आकलन आदि शामिल है। एसआईटी के गठन के बाद पहली एफआईआर अच्छी तरह से विवेचना के बाद हुई। ये शिकायतें कुछ वर्ष पुराने मामलों की है जिसकी जांच कई चरणों में चल रही है। जल्द ही कमिश्नरी पुलिस बड़ी कार्रवाई करेगी।



- अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर
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