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बीमार लाल इमली के ठाठ निराले
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 23 Apr 2015 02:27 AM IST
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बीमार लाल इमली के ठाठ-बाट अभी भी पुराने हैं। पैसा सरकार का है तो इसे बचाने की फ्रिक किसी को नहीं है। उत्पादन ठप है। काम धेला भर का नहीं है। पर यहां तीन वक्त की चाय फ्री है, साथ ही पुराने जमाने की अंबेसडर कार एक लीटर पेट्रोल पीने के बाद चार-पांच किलोमीटर ही चलती है।
अगर इस कार पर होने वाला खर्च जोड़ लें तो छह महीने में नई कार आ जाए। महीने में तकरीबन पौने दो करोड़ रुपये भी बंटता है। मिल के आला अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि सब कुछ सरकार तय करती है। जो चल रहा है हम इसे बदल नहीं सकते।
लाल इमली मिल 1992 से बीमार घोषित है। दिसंबर 2013 से उत्पादन ठप है। अधिकारी और कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अधिकारियों को 10 महीने, तो कर्मियों को नौ महीने से वेतन के नाम पर चवन्नी नहीं मिली। इसके बावजूद सरकार मिल की शान-ओ-शौकत पर हर महीने करोड़ों खर्च करती है।
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जबकि मिल में फिर से उत्पादन शुरू करने को कच्चे माल के लिए चंद लाख नहीं मिल रहे हैं। अब तो कर्मचारी यहां तक कह रहे हैं कि 2002 में मिल पुनरुद्धार के लिए करोड़ों की योजना ठंडे बस्ते में डालने वाली सरकार मिल के अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगाती तो लाल इमली मिल कभी ठप नहीं होती..।
मिल में होने अन्य खर्च (औसतन अनुमानित रुपये में)
- चार लाख बिजली मीटर का किराया
- 10 हजार रुपये की दवाएं
- 10-15 हजार रुपये डॉक्टर
- 10 हजार रुपये टेलीफोन व संचार
- 10 हजार रुपये पेपर-स्टेशनरी खर्च
- 75 हजार से एक लाख तक सेटलमेंट एरिया का रखरखाव और सुरक्षा के
ये सब सरकार ने तय किया है। मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता। सब सरकार की नजर में है। अब जरूरी खर्चे तो किए ही जाएंगे।
- राजा मित्रा, कार्यवाहक महाप्रबंधक
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अगर इस कार पर होने वाला खर्च जोड़ लें तो छह महीने में नई कार आ जाए। महीने में तकरीबन पौने दो करोड़ रुपये भी बंटता है। मिल के आला अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि सब कुछ सरकार तय करती है। जो चल रहा है हम इसे बदल नहीं सकते।
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लाल इमली मिल 1992 से बीमार घोषित है। दिसंबर 2013 से उत्पादन ठप है। अधिकारी और कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अधिकारियों को 10 महीने, तो कर्मियों को नौ महीने से वेतन के नाम पर चवन्नी नहीं मिली। इसके बावजूद सरकार मिल की शान-ओ-शौकत पर हर महीने करोड़ों खर्च करती है।
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जबकि मिल में फिर से उत्पादन शुरू करने को कच्चे माल के लिए चंद लाख नहीं मिल रहे हैं। अब तो कर्मचारी यहां तक कह रहे हैं कि 2002 में मिल पुनरुद्धार के लिए करोड़ों की योजना ठंडे बस्ते में डालने वाली सरकार मिल के अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगाती तो लाल इमली मिल कभी ठप नहीं होती..।
मिल में होने अन्य खर्च (औसतन अनुमानित रुपये में)
- चार लाख बिजली मीटर का किराया
- 10 हजार रुपये की दवाएं
- 10-15 हजार रुपये डॉक्टर
- 10 हजार रुपये टेलीफोन व संचार
- 10 हजार रुपये पेपर-स्टेशनरी खर्च
- 75 हजार से एक लाख तक सेटलमेंट एरिया का रखरखाव और सुरक्षा के
ये सब सरकार ने तय किया है। मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता। सब सरकार की नजर में है। अब जरूरी खर्चे तो किए ही जाएंगे।
- राजा मित्रा, कार्यवाहक महाप्रबंधक